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Kurukshetra News: नहरों में मौत की छलांग लगा रहे युवा, प्रशासन बेखबर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 May 2023 01:47 AM IST
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Youth jumping to death in canals, administration unaware
कुरुक्षेत्र। भाखड़ा नहर का ढांड रोड पुल, जहां कोई भी चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाया गया।
कुरुक्षेत्र। नहरें हमें जीवनदान देने के साथ-साथ जिंदगी भी लगातार निगल रही है, जिसके बावजूद न प्रशासन सबक ले रहा और न ही माता-पिता गंभीरता दिखा रहे हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ये मामले भी हर साल बढ़ने लगते हैं। भले ही युवा गर्मी से निजात पाने के लिए नहरों में छलांग ला रहे हैं, लेकिन ये मौत की छलांग साबित हो रही है, जो प्रशासन द्वारा नहरों पर हादसे रोकने के लिए किए जाने वाले प्रबंधों की पोल खोल रही है। नहरों पर जगह-जगह युवा नहाते दिखाई देते हैं, लेकिन न पुलिस की कोई गश्त है और न ही कहीं सिंचाई विभाग की ओर से चेतावनी बोर्ड तक ही लगाए जा रहे, जिससे यहां नहाने के लिए आने वाले युवाओं को पानी की गहराई बहाव तक का पता नहीं चल पाता। अचानक गहरे पानी में जाने के बाद बचने की उम्मीद न के बराबर रह जाती है।
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....जब विधायक भी नहरों को देख रह गए हैरान
वीरवार को भाखड़ा नहर में दो नाबालिग दोस्त डूब गए, जिनके शव अगले दिन शुक्रवार को मिले। हादसे के चलते विधायक सुभाष सुधा भी नहर किनारे पहुंचे, जहां नहर में सर्च अभियान चलाया जा रहा था। यहां जब लोगों ने प्रशासन की ओर से नहरों पर सुरक्षा प्रबंधों की बात की तो नहरों के हालात देख विधायक भी हैरान रह गए। उन्होंने तत्काल ही पुलिस अधीक्षक एसएस भौरिया को गर्मी के सीजन के दौरान नहरों पर गश्त जारी रखने तो वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी चेतावनी व सूचना बोर्ड तथा फेंसिंग लगाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने भी माना कि प्रशासन को अपनी ओर से हादसे रोकने के लिए जरूरी कदम अवश्य उठाने होंगे।
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एनआईटी भी खो चुका तीन छात्र
बता दें कि गत 28 मार्च को ही एनआईटी कुरुक्षेत्र के दो छात्रों अनुभव व राहुल त्रिपाठी की नहर में डूबने से मौत हुई थी। इससे पहले भी संस्थान के एक छात्र की नहर में डूबने से मौत हुई थी। संस्थान की ओर से प्रशासन को ऐसे हादसे रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाने के लिए पत्र भी लिखा गया था। यहां तक कि 28 मार्च को हादसे के बाद शवों की तलाश करने के लिए कुरुक्षेत्र व करनाल के डीसी भी कई घंटे तक नहर किनारे ही रहे थे। उस दौरान जिला उपायुक्त ने भी माना था कि यहां उचित कदम उठाए जाएंगे, ताकि ऐसा हादसा दोबारा न हो। एक माह 12 दिन बाद ही फिर एक साथ दो जिंदगी नहर में ही खत्म हो गई, जिससे हर कोई सन्न है।
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हर माह 10 से ज्यादा हादसे : प्रगट
गोताखोर प्रगट सिंह बताते हैं कि नहरों में जिला की सीमा के दौरान हर माह औसतन 10 से ज्यादा हादसे होते हैं। ज्योतिसर पुल बढ़े हादसों के चलते इसे सुसाइड प्वाइंट भी कहा जाने लगा था, जहां प्रशासन को फेंसिंग, गश्त आदि करनी पड़ी थी और इससे हादसों पर अंकुश भी लगा है। ऐसे ही कदम अन्य जगहों पर भी उठाए जाने की जरूरत है।


अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश : सुधा
विधायक सुभाष सुधा का कहना है कि नहरों पर बेहद दर्दनाक हादसे हो रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए हम सभी की जिम्मेदारी है। जहां एसपी को गर्मी के सीजन में गश्त कराए जाने के निर्देश दिए हैं तो वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी उचित कदम उठाने को कहा गया है। लापरवाही बरते जाने पर संबंधित अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। माता-पिता को भी जागरूकता दिखानी होगी।
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