फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Writers played an important role in the freedom movement, Kurukshetra

साहित्यकारों की स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 May 2022 01:51 AM IST
विज्ञापन
Writers played an important role in the freedom movement, Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कुरुक्षेत्र। देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रांतिकारियों व आंदोलनकारियों के साथ ही लेखकों, कवियों और पत्रकारों ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। साहित्यकारों ने साहित्य सृजन के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन में अहम योगदान दिया। ये बातें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहीं।
वे मंगलवार को हिंदी विभाग की ओर से आजादी का अमृत महोत्सव के तहत 1857 की क्रांति की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और साहित्य’ विषय को लेकर आर्ट्स फैकल्टी में आयोजित प्रदर्शनी के उद्घाटन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 1857 की चिंगारी देखते ही देखते पूरे देश में फैल गई थी। इससे यह तय हो गया था कि अंग्रेज अब यहां ज्यादा समय रहने वाले नहीं हैं। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारियों के चित्र एवं स्वतंत्रता आंदोलन पर आधारित कविताओं के पोस्टर और मॉडल प्रदर्शित किए।
विज्ञापन

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता शहीद भगत सिंह के भांजे प्रो. जगमोहन सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में भगत सिंह व क्रांतिकारी दल के लोगों में पढ़ने का गजब का उत्साह था। भगत सिंह ने जेल में रहते हुए करीब 300 किताबें पढ़ीं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों की ओर से जब्त की गई प्रेमचंद की किताब सोजे वतन में पांच कहानियां थीं। इनमें से एक कहानी का जिक्र भगत सिंह ने किया गया है। अपने जीवन के अंतिम समय में भी भगत सिंह के मन में केवल एक ही बात को लेकर उत्साह था कि पढ़ें, पढ़ें और पढ़ें।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रो. दिनेश कुशवाह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के साथ हिंदी साहित्य का नाभिनाल संबंध है। संगोष्ठी का संचालन करते हुए हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुभाष चंद्र ने कहा कि आजादी की लड़ाई में भगत सिंह के नेतृत्व में क्रांतिकारी दल, महात्मा गांधी की अगुवाई वाले अहिंसावादी आंदोलन व डॉ. भीमराव आंबेडकर के समता व न्याय के आंदोलन साहित्य से गहरे रूप से जुड़े हुए थे। संचालन पंजाबी विभाग के प्रोफेसर कुलदीप सिंह ने किया। इस अवसर पर शिक्षक जसबीर सिंह, विकास साल्यान, ब्रजपाल, डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. मनोज जोशी, डॉ. अजीत चहल, विकास सभ्रवाल, डॉ. वैशाली, डॉ. अशोक चौहान आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed