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Kurukshetra News: स्लोगन लिख बताए तंबाकू के दुष्प्रभाव
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में हिस्सा लेते वि
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में बुधवार को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में अगद तंत्र विभाग की ओर से स्लोगन लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई।
प्रतियोगिता में विभिन्न कक्षाओं से 60 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया और तंबाकू के दुष्प्रभावों के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाले रचनात्मक स्लोगन प्रस्तुत किए। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान और कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कुलपति ने कहा कि तंबाकू और नशे की लत आज के युवाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। आयुष पद्धति स्वस्थ जीवन की राह दिखाती है और हमें विद्यार्थियों को इसके प्रति सजग करना चाहिए। ऐसी प्रतियोगिताएं न केवल ज्ञानवर्धक हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा भी देती हैं।
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अगद तंत्र विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. अंशुल ने बताया कि प्रतियोगिता के मूल्यांकन के लिए आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. वैद्य देवेंद्र खुराना, प्रो. शीतल सिंगला और डॉ. मनीषा खत्री की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो विजेताओं का चयन करेगी। चयनित प्रतिभागियों को शीघ्र ही प्रमाणपत्र और पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में तंबाकू के खिलाफ जन जागरूकता पैदा करना और उन्हें नशा मुक्त समाज की दिशा में सहभागी बनाना था।
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में बुधवार को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में अगद तंत्र विभाग की ओर से स्लोगन लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई।
प्रतियोगिता में विभिन्न कक्षाओं से 60 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया और तंबाकू के दुष्प्रभावों के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाले रचनात्मक स्लोगन प्रस्तुत किए। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान और कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
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कुलपति ने कहा कि तंबाकू और नशे की लत आज के युवाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। आयुष पद्धति स्वस्थ जीवन की राह दिखाती है और हमें विद्यार्थियों को इसके प्रति सजग करना चाहिए। ऐसी प्रतियोगिताएं न केवल ज्ञानवर्धक हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा भी देती हैं।
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अगद तंत्र विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. अंशुल ने बताया कि प्रतियोगिता के मूल्यांकन के लिए आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. वैद्य देवेंद्र खुराना, प्रो. शीतल सिंगला और डॉ. मनीषा खत्री की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो विजेताओं का चयन करेगी। चयनित प्रतिभागियों को शीघ्र ही प्रमाणपत्र और पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में तंबाकू के खिलाफ जन जागरूकता पैदा करना और उन्हें नशा मुक्त समाज की दिशा में सहभागी बनाना था।