फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Worshiping Shivalinga here gives relief from sufferings and fulfills wishes

Kurukshetra News: यहां शिवलिंग की पूजा करने से मिलती है कष्टों से मुक्ति, पूरी होती है मनोकामनाएं

Mon, 28 Jul 2025 03:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Mon, 28 Jul 2025 03:19 AM IST
विज्ञापन
Worshiping Shivalinga here gives relief from sufferings and fulfills wishes
कुरुक्षेत्र। धर्म और श्रद्धा की भूमि कुरुक्षेत्र स्थित प्राचीन दुखभंजन महादेव मंदिर सावन माह में आस्था और भक्ति का मुख्य केंद्र बना हुआ है। सन्निहित सरोवर तट पर स्थित यह मंदिर न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं भी इसे विशेष बनाती हैं। शिवभक्तों का विश्वास है कि इस मंदिर में शिवलिंग की पूजा करने से कष्टों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
विज्ञापन


श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के पूर्व प्रधान जयनारायण शर्मा का कहना है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की स्थापना का संबंध महाभारत काल से है। ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास काल में जब वे अनेक दुखों से पीड़ित थे, तो उन्होंने इस स्थान पर भगवान शिव की आराधना की थी। शिव की कृपा से उनके दुख दूर हो गए और तभी से यह स्थान दुखभंजन महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। यह भी मान्यता है कि जो श्रद्धालु सावन के महीने में पांच सोमवार तक विधिवत शिवलिंग की पूजा करता है, उसके सारे दुख भस्म हो जाते हैं।
विज्ञापन


श्रद्धालुओं की भीड़ हर सोमवार को सुबह से ही मंदिर में जुटने लगती है। जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। इसके साथ ही बेलपत्र, पुष्प और धतूरा अर्पित कर भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है। मंदिर के पुजारी पंडित सुशील शास्त्री ने बताया कि सावन माह में शिवलिंग को विशेष मुखौटे से सजाया जाता है और हर सोमवार को विशेष आरती की जाती है। सावन में शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


महाशिवरात्रि और सावन में लगता है विशाल मेला

मंदिर में महाशिवरात्रि के पर्व पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं। सावन मास के दौरान कावड़ यात्रा करने वाले भक्त भी यहां आकर भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करते हैं। यह मंदिर सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की भी श्रद्धा का केंद्र है। मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। इसके चारों ओर पौराणिक वातावरण आज भी महसूस किया जा सकता है। सन्निहित सरोवर तट पर होने के कारण यह स्थान और अधिक पवित्र और प्रभावशाली माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed