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Kurukshetra News: लड्डू गोपाल की पोशाक बना रहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं
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करोशिया से लड्डू गोपाल की पोशाक बनाती परमजीत।
कुरुक्षेत्र। जन्माष्टमी पर्व के लिए बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। इसी के साथ स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय हो गई हैं। लड्डू गोपाल की पोशाक और पूजन सामग्री की बढ़ती मांग को देखते हुए समूह से जुड़ी महिलाएं हाथों से सुंदर-सुंदर पोशाक तैयार कर रही हैं और उन्हें बाजारों में सप्लाई कर रही हैं।
गांव अमीन की परमजीत यश स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने लड्डू गोपाल की पोशाक बनानी कुछ वर्षों पहले शुरू की थी। अब उन्होंने अपने काम में विविधता लाते हुए सर्दियों के लिए ऊनी वस्त्र जैसे टॉपी, जुराबें, कुर्ता और धोती सेट बनाने भी शुरू कर दिए हैं। वे कहती हैं कि मैं एक घंटे में पूरा सेट तैयार कर लेती हूं। अब जन्माष्टमी और गीता महोत्सव के लिए विशेष स्टॉक तैयार कर रही हूं।
परमजीत ने बताया कि वह समूह से जुड़ने के बाद अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण दे रही हैं। वह चाहती हैं कि गांव की अधिक से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। समूह की कई महिलाएं अब ऑर्डर पर भी काम कर रही हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने उत्पादों का प्रचार कर रही हैं।
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बाजारों में बढ़ रही मांग, महिलाओं को मिल रहा रोजगार
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला सत्या देवी ने बताया कि वह मुख्य बाजार में अपनी बनाई पोशाकें और वस्त्र बेच रही हैं। इन उत्पादों की डिमांड केवल धार्मिक पर्वों तक सीमित नहीं रह गई बल्कि सालभर छोटे आयोजनों और मेलों में भी इनकी मांग बनी रहती है। इससे न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से लाभ हो रहा है बल्कि आत्मनिर्भरता का भाव भी जागृत हो रहा है।
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गांव अमीन की परमजीत यश स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने लड्डू गोपाल की पोशाक बनानी कुछ वर्षों पहले शुरू की थी। अब उन्होंने अपने काम में विविधता लाते हुए सर्दियों के लिए ऊनी वस्त्र जैसे टॉपी, जुराबें, कुर्ता और धोती सेट बनाने भी शुरू कर दिए हैं। वे कहती हैं कि मैं एक घंटे में पूरा सेट तैयार कर लेती हूं। अब जन्माष्टमी और गीता महोत्सव के लिए विशेष स्टॉक तैयार कर रही हूं।
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परमजीत ने बताया कि वह समूह से जुड़ने के बाद अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण दे रही हैं। वह चाहती हैं कि गांव की अधिक से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। समूह की कई महिलाएं अब ऑर्डर पर भी काम कर रही हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने उत्पादों का प्रचार कर रही हैं।
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बाजारों में बढ़ रही मांग, महिलाओं को मिल रहा रोजगार
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला सत्या देवी ने बताया कि वह मुख्य बाजार में अपनी बनाई पोशाकें और वस्त्र बेच रही हैं। इन उत्पादों की डिमांड केवल धार्मिक पर्वों तक सीमित नहीं रह गई बल्कि सालभर छोटे आयोजनों और मेलों में भी इनकी मांग बनी रहती है। इससे न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से लाभ हो रहा है बल्कि आत्मनिर्भरता का भाव भी जागृत हो रहा है।