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कान्हा संग महिला श्रद्धालुओं ने खेली फूलों की होली
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फूलों की होली उत्सव में हिस्सा लेती महिलाएं। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। शहर स्थित ज्योशियांन गली में हंस कुटीर नरुला निवास पर होली उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया, जिसमें श्रद्धालु अपने घरों में विराजमान लगभग 200 कान्हा को लेकर मोनिका नरुला श्री राधे कृष्ण बुटीक के निवास पर पहुंचे। कान्हा के सुंदर-सुंदर रूप देख महिलाओं ने फूलों की वर्षा की।
इस होली उत्सव की छटा बहुत ही निराली नजर आई। कान्हा के भजनों पर मौके पर मौजूद हर महिला थिरकने पर मजबूर हो गई। इस मौके पर भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें पहले कान्हा जी को भोग लगाया गया और इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम की आयोजक मोनिका नरुला ने बताया कि इस बार होली उत्सव पर कान्हा जी को 56 प्रकार का भोग लगाया गया और फूलों की होली खेली गई।
उन्होंने बताया कि होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वह फूलों से या गुलाल से सूखी होली ही खेलें, ताकि जल को बचाया जा सके। इस मौके पर अंबाला, पटियाला, देहली, पिहोवा और बाबैन से भी महिला श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई।
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कुरुक्षेत्र। शहर स्थित ज्योशियांन गली में हंस कुटीर नरुला निवास पर होली उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया, जिसमें श्रद्धालु अपने घरों में विराजमान लगभग 200 कान्हा को लेकर मोनिका नरुला श्री राधे कृष्ण बुटीक के निवास पर पहुंचे। कान्हा के सुंदर-सुंदर रूप देख महिलाओं ने फूलों की वर्षा की।
इस होली उत्सव की छटा बहुत ही निराली नजर आई। कान्हा के भजनों पर मौके पर मौजूद हर महिला थिरकने पर मजबूर हो गई। इस मौके पर भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें पहले कान्हा जी को भोग लगाया गया और इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम की आयोजक मोनिका नरुला ने बताया कि इस बार होली उत्सव पर कान्हा जी को 56 प्रकार का भोग लगाया गया और फूलों की होली खेली गई।
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उन्होंने बताया कि होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वह फूलों से या गुलाल से सूखी होली ही खेलें, ताकि जल को बचाया जा सके। इस मौके पर अंबाला, पटियाला, देहली, पिहोवा और बाबैन से भी महिला श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई।
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