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पंचगव्य व आयुर्वेदिक औषधियों पर करेंगे शोध: कुलपति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 02:27 AM IST
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Will do research on Panchagavya and Ayurvedic medicines: Vice Chancellor
आयुर्वेद में गाय का दूध, दही, घी,गोमूत्र और गोमय आदी का अत्यंत महत्व बताया गया है। इन द्रव्यों को आयुर्वेद में गव्य कहा गया है। पांचों को मिलाकर पंचगव्य बनता है। ये विचार आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव कुमार ने गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र,देवलापार, नागपुर से आई टीम के सदस्यों को संबोधित करतेे हुए व्यक्त किए। इस दौरान शोध कार्य के लिए समझौता मसौदे पर गहन विचार-विमर्श किया गया। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के शोध एवं नवाचार विभाग द्वारा अनेकों विषयों पर शोध कार्य जारी है। विश्वविद्यालय का प्रयास रहेगा कि गो-आधारित औषधियों पर आयुर्वेद शास्त्र सम्मत शोध किया जाए।
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उन्होंने कहा कि संस्थान में बहुत सारे ऐसे मरीज आते हैं जो असाध्य बीमारी से ग्रसित होते हैं। उन मरीजों को यहां पर शास्त्र सम्मत विधि से आयुर्वेदिक औषधि दी जाती है। कोरोना महामारी में विश्वविद्यालय द्वारा महासुदर्शन घनवटी और षडंगपानीय कोरोना मरीजों को दी गई। इसके सेवन से कोविंड-19 के मरीजों ने सात से दस दिन के भीतर कोरोना को मात दी। शोध को लेकर आयुष विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार विभाग स्थापित किया गया है, जिसमें आधुनिक विज्ञान के चौदह और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के 14 विभागों पर शोध कार्य किया जा रहा है।
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समन्वयक गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र देवलापार, नागपुर से सुनील मानसिंहका ने कहा कि गोवंश को केंद्र में रखकर यदि काम किया जाए तो देश का चहुंमुखी विकास होगा। गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र निरंतर इस उद्देश्य को सफल बनाने में लगा है। गाय प्राचीन काल से हमारे देश में आर्थिकी का आधार था और अब पंचगव्य बन सकता है। घर-घर गाय और गांव-गांव गौशाला संस्थान का लक्ष्य है। संस्थान में पंचगव्यों से दवाइयों का निर्माण किया जा रहा है। नागपुर में चल रहे दो पंचगव्य चिकित्सा केंद्रों से आजतक पचास हजार से अधिक रोगी लाभांवित हुए हैं। विशेष रूप से सफेद दाग, एक्जिमा, सोरायसिस तथा अन्य त्वचा रोग, मुंहासे, बालों में रूशी, वात-व्याधि, मोटापा और यहां तक मधुमेह और किडनी के मरीजों को भी लाभ पहुंचा है। इस अवसर पर डीन अकेडेमिक आशीष मेहता, डॉ.राजेंद्र सिंह, डॉ रजनीकांत, अतुल गोयल,मनोज कुमार और गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र नागपुर से आए सदस्य मौजूद रहे।
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