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कुरुक्षेत्र के पिहोवा और शाहाबाद सहित कई इलाकों में सफेद धुआं घोंट रहा युवाओं की सांसें
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डॉ सुरेंद्र मढान
- फोटो : Kurukshetra
पुलिस प्रशासन की सतर्कता के बावजूद भी नशे के आगोश में कुरुक्षेत्र का भविष्य सिमटता जा रहा है। पिहोवा, शाहाबाद, लाडवा सहित अन्य कई इलाकों में स्मैक का सफेद धुआं युवा पीढ़ी की सांसें घोंट रहा है और इन क्षेत्रों में चिट्टे का कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसके आलवा इस्माईलाबाद, थानेसर और बाबैन सहित अन्य इलाकों में भी नशे का कारोबार अपने पैर पसार रहा है, जिसकी चपेट में खासकर युवा को बताया जाता है। उक्त क्षेत्रों में स्मैक, चिट्टा, भुक्की, गांजा, अफीम, भांग और शराब का नशा ज्यादा है।
उन्होंने बताया जाता है कि जब नशा इंसानी खून से मिलता है तो यह बारे बार लेना मजबूरी बनने लगता है। फिर नशे के बंदोबस्त के लिए नशेड़ी अपराध की ओर बढ़ते हैं। अब जिला पुलिस प्रशासन ने कुरुक्षेत्र को नशा मुक्त बनाने के लिए कमर कस ली है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के नशा मुक्ति केंद्र पहले से ही नशे को खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2018 में 2 984, वर्ष 2019-20 में अब तक 5 हजार 82 नशेड़ियों ने जिला के नशा मुक्ति केंद्र में उपचार कराया। हालांकि इसमें वो आंकड़ा नहीं है, जो मरीज निजी अस्पतालों से उपचार करा रहे हैं और या वे नशेड़ी हैं, जो नशे की लत को छोड़ना नहीं चाहते।
जनवरी 2019 से अगस्त 2020 तक का आंकड़ा
1. स्मैक और चिट्टा- 1649
2. शराब- 1532
3. सुल्फा, गांजा- 301
4. अफीम, भुक्की सहित अन्य नशा- 418
नोट:- यह उन नशेड़ियों का आंकड़ा है जो अपनी इच्छानुसार या फिर परिवार के दबाव में नशा मुक्ति केंद्र में उपचार कराने पहुंचे हैं।
नशे की लत में फंसे लोगों की पहचान जरूरी : डॉ. सुरेंद्र
एलएनजेपी अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मंढाण ने कहा कि नशे की लत में फंसे अपने दोस्त, परिजन एवं रिश्तेदार की पहचान करना आवश्यक है। कई बार कोई व्यक्ति तनाव और अवसाद की स्थिति में धीरे-धीरे नशीले पदार्थों का सेवन करके इसकी लत में फंसना शुरू करता है। बाद में नशे के सेवन की मात्रा बढ़ जाती है। जेब खर्च में बढ़ोतरी तथा घर से कीमती सामान गायब होना, व्यवहार परिवर्तन, कार्य में रुचि का अभाव, कार्य स्थल से अनुपस्थिति, खेलकूद में मन न लगना, अंतर्मुखी हो जाना, विद्यालय या कॉलेज से गैरहाजिर रहना या अधर में भाग जाना, घर के लोगों के प्रति उदासीन रवैया अपनाना, स्वभाव में अचानक परिवर्तन, झूठ बोलना, उधार लेना एवं असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो जाना। इस तरह के लक्षण शुरुआती दौर में दिखाई देते हैं तो परिजनों ने सतर्कता बरतते हुए नजदीकी नशा मुक्ति केंद्र से परामर्श लेनी चाहिए और उक्त व्यक्ति का उपचार कराना चाहिए।
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पुलिस की टीमें नशीले पदार्थों के तस्करों का कस रही शिकंजा : एसपी
पुलिस अधीक्षक राजेश दुग्गल ने कहा कि उन्हें भी सूचना मिली है कि कुरुक्षेत्र जिला के कई इलाकों में नशे का कारोबार अपने पैर पसार रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासन की नशीले पदार्थों की तस्करी में जुटे लोगों को नजर है और पुलिस की विभिन्न टीमें इन लोगों पर शिकंजा कस रही हैं। भविष्य में भी पुलिस ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करती रहेगी। उन्होंने कहा कि जिले को नशा मुक्त बनाने के लिये पुलिस विशेष अभियान चलाने जा रही है।
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उन्होंने बताया जाता है कि जब नशा इंसानी खून से मिलता है तो यह बारे बार लेना मजबूरी बनने लगता है। फिर नशे के बंदोबस्त के लिए नशेड़ी अपराध की ओर बढ़ते हैं। अब जिला पुलिस प्रशासन ने कुरुक्षेत्र को नशा मुक्त बनाने के लिए कमर कस ली है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के नशा मुक्ति केंद्र पहले से ही नशे को खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2018 में 2 984, वर्ष 2019-20 में अब तक 5 हजार 82 नशेड़ियों ने जिला के नशा मुक्ति केंद्र में उपचार कराया। हालांकि इसमें वो आंकड़ा नहीं है, जो मरीज निजी अस्पतालों से उपचार करा रहे हैं और या वे नशेड़ी हैं, जो नशे की लत को छोड़ना नहीं चाहते।
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जनवरी 2019 से अगस्त 2020 तक का आंकड़ा
1. स्मैक और चिट्टा- 1649
2. शराब- 1532
3. सुल्फा, गांजा- 301
4. अफीम, भुक्की सहित अन्य नशा- 418
नोट:- यह उन नशेड़ियों का आंकड़ा है जो अपनी इच्छानुसार या फिर परिवार के दबाव में नशा मुक्ति केंद्र में उपचार कराने पहुंचे हैं।
नशे की लत में फंसे लोगों की पहचान जरूरी : डॉ. सुरेंद्र
एलएनजेपी अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मंढाण ने कहा कि नशे की लत में फंसे अपने दोस्त, परिजन एवं रिश्तेदार की पहचान करना आवश्यक है। कई बार कोई व्यक्ति तनाव और अवसाद की स्थिति में धीरे-धीरे नशीले पदार्थों का सेवन करके इसकी लत में फंसना शुरू करता है। बाद में नशे के सेवन की मात्रा बढ़ जाती है। जेब खर्च में बढ़ोतरी तथा घर से कीमती सामान गायब होना, व्यवहार परिवर्तन, कार्य में रुचि का अभाव, कार्य स्थल से अनुपस्थिति, खेलकूद में मन न लगना, अंतर्मुखी हो जाना, विद्यालय या कॉलेज से गैरहाजिर रहना या अधर में भाग जाना, घर के लोगों के प्रति उदासीन रवैया अपनाना, स्वभाव में अचानक परिवर्तन, झूठ बोलना, उधार लेना एवं असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो जाना। इस तरह के लक्षण शुरुआती दौर में दिखाई देते हैं तो परिजनों ने सतर्कता बरतते हुए नजदीकी नशा मुक्ति केंद्र से परामर्श लेनी चाहिए और उक्त व्यक्ति का उपचार कराना चाहिए।
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पुलिस की टीमें नशीले पदार्थों के तस्करों का कस रही शिकंजा : एसपी
पुलिस अधीक्षक राजेश दुग्गल ने कहा कि उन्हें भी सूचना मिली है कि कुरुक्षेत्र जिला के कई इलाकों में नशे का कारोबार अपने पैर पसार रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासन की नशीले पदार्थों की तस्करी में जुटे लोगों को नजर है और पुलिस की विभिन्न टीमें इन लोगों पर शिकंजा कस रही हैं। भविष्य में भी पुलिस ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करती रहेगी। उन्होंने कहा कि जिले को नशा मुक्त बनाने के लिये पुलिस विशेष अभियान चलाने जा रही है।