फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Whenever there was a loss of religion then God was born: Parashar

जब-जब हुई धर्म की हानि तब जन्मे प्रभु : पाराशर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jan 2025 01:45 AM IST
विज्ञापन
Whenever there was a loss of religion then God was born: Parashar
कुरुक्षेत्र। सेक्टर तीन के शिव मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इसमें श्रद्धालु जमकर थिरके। इस मौके पर पूरा कथा परिसर भगवान श्री कृष्ण के जयकारों तथा नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की जय से गुंजायमान हो उठा। कथा के दौरान कथाव्यास रमेश पाराशर ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन

उन्होंने कहा जब-जब अत्याचार और अन्याय बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड़ दी तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। रमेश पाराशर ने अपने संबोधन में बताया कि भगवान विष्णु ने स्वयं वामन अवतार के रूप में आकर दैत्य राजा बली का अभिमान चूर किया, श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर कंस का वध किया, भगवान राम ने रावण का वध किया और नरसिंह अवतार ने हिरण्यकश्यप का वध किया।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि जब-जब इस पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है तब तब भगवान भी किसी न किसी रूप में अवतार लेकर इस पृथ्वी को अत्याचारों से मुक्त करते हैं। श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन करते हुए गुरुजी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि के समय कंस की कारागार में हुआ था। श्री कृष्ण ने बड़े होकर अत्याचारी कंस का वध किया और अपने माता-पिता (देवकी-वासुदेव) को कारागार से मुक्त करवाकर पृथ्वी को अत्याचारों से मुक्त किया। इस प्रसंग से पूर्व वामन अवतार की कथा सुनाते हुए गुरुजी ने बताया कि विष्णु भगवान ने स्वयं वामन का वेश बनाकर राजा बलि से तीन पग भूमि दान के रूप में मांगकर सारी पृथ्वी को नाप लिया और अंत में राजा बलि के सेवाभाव को देखकर उसे पाताल लोक का अधिपति बनाया। इस मौके पर वेदपाठी मनदीप जोशी, वेदपाठी सोहन पराशर, वेदपाठी मुकेश शर्मा वशिष्ठ, वेदपाठी बलराज शर्मा ने वेद मंत्रों सहित विधिवत रूप से पूजा करवाई। इस अवसर पर मंदिर सभा प्रधान जोगिंदर चौहान, संतोष कम्बोज, लवनीश अग्रवाल, मंजू मक्कड़ आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed