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Kurukshetra News: दोबारा सर्वेक्षण हुआ तो प्रशासन ने माना फसलों में हुआ बारिश व ओलावृष्टि से नुकसान, पोर्टल भी खोला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 08 Mar 2025 01:25 AM IST
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When the survey was done again, the administration accepted that the crops were damaged due to rain and hailstorm and also opened a portal
कुरुक्षेत्र। इस तरह हुआ था बारिश व ओलावृ​ष्टि से गेहूं की फसल में नुकसान। फाइल
कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। करीब एक सप्ताह पहले हुई बारिश व ओलावृष्टि से जिले के विभिन्न गांवों के किसानों की फसलों में नुकसान हुआ। गेहूं, सरसों की फसलों में 50 फीसदी तक नुकसान माना गया है। प्रशासन ने दोबारा सर्वेक्षण कराया तो न केवल स्पष्ट तौर पर नुकसान दिखाई दिया बल्कि ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल भी खोलना पड़ा। इसके साथ ही कृषि विभाग द्वारा कराए गए सर्वेक्षण पर भी मुहर लग गई। वहीं खोले गए पोर्टल पर किसान 20 मार्च तक शिकायत दर्ज करवा सकेंगे। ऐसे में अब किसानों को सरकार से मुआवजे के तौर पर भरपाई की उम्मीद जगी है।
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पिछले सप्ताह बारिश और ओलावृष्टि से फसलों में हुए नुकसान के लिए सैकड़ों किसान दो विभागों के बीच फंस गए थे जहां राजस्व विभाग ने किसी प्रकार का नुकसान न होने (20 फीसदी से कम) की बात की थी तो वहीं कृषि विभाग ने 45 हजार एकड़ फसल पर बारिश व ओलावृष्टि की मार मानी थी। इसमें 28 हजार 500 एकड़ गेहूं, 6500 एकड़ सरसों व 10 हजार एकड़ सूरजमुखी की फसल शामिल थी। दोनों विभागों की ओर से जिला उपायुक्त को रिपोर्ट भी सौंपी गई, जो उच्चाधिकारियों तक भी पहुंची।
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राजस्व विभाग की ओर से फसलों में नुकसान न माने जाने के चलते ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल नहीं खोला गया था जबकि प्रदेश सरकार के आदेश पर अन्य संबंधित जिलों में इसे दो दिन पहले खोला जा चुका है, ऐसे में पीड़ित किसानों में खलबली मच गई थी। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद जिला उपायुक्त ने विगत दिवस दोनों विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की और पूरा ब्योरा लिया। दोबारा से सर्वेक्षण कराने का फैसला लिया गया, जिसमें भी फसलों में बारिश व ओलावृष्टि से नुकसान का अनुमान जताया गया है। ऐसे में अब किसानों के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल भी खोलना पड़ा। इस पर किसान 20 मार्च तक शिकायत दर्ज करवा सकेंगे।
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भाकियू भी दे चुका था चेतावनी
भाकियू चढूनी गुट ने फसलों में नुकसान मानते हुए क्षतिपूर्ति पोर्टल खोले जाने की मांग की थी, इसके साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि पोर्टल नहीं खोला गया तो यूनियन आंदोलन की राह पर आने को मजबूर होगी।


अभी 40 गांव के किसानों के लिए खोला जा चुका पोर्टल : डॉ. कर्मचंद
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि जिला उपायुक्त के आदेशानुसार दोबारा कराए गए सर्वेक्षण में नुकसान का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में शुक्रवार शाम तक संबंधित 40 गांवों के किसानों के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला जा चुका है। अब जो किसान इस पर शिकायत दर्ज कराएंगे, वहां फिर फाइनल सर्वेक्षण होगा, जिसके आधार पर ही सरकार भरपाई तय कर सकेगी। उन्होंने माना कि सूरजमुखी की फसल में भी नुकसान का अनुमान सामने आया है। उधर डीआरओ चेतना चौधरी का कहना है कि किसानों द्वारा शिकायत मिलने के बाद किए जाने वाले सर्वेक्षण में ही नुकसान का सही आकलन हो पाएगा।


शाहाबाद व बाबैन क्षेत्र के हैं गांव : डीसी

उपायुक्त नेहा सिंह का कहना है बारिश व ओलावृष्टि से प्रभावित गांव शाहाबाद व बाबैन क्षेत्र के हैं। अब किसान अपनी शिकायत पोर्टल पर दर्ज करवा सकते हैं। किसानों को शिकायत दर्ज करवाने में ढील नहीं करनी चाहिए।
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