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जब पॉलीथिन बंद होगी, तभी सुचारू होगी जलनिकासी
ब्यूरो/अंबाला,अमर उजाला
Updated Fri, 27 May 2016 12:49 AM IST
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नालों में जमा पालीथिन मानसून में जबरदस्त जलभराव के कारण बन रहे हैं। नालों का सर्वे करने के बाद यह बात सामने आई है। सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बावजूद यह पॉलीथिन नालों और नालियों में जमा है, जबकि अधिकारी साल भर चैन की नींद सोते हैं और जनता मानसून सीजन में जलभराव से जूझती रहती है। इस समस्या पर आज तक अधिकारी काबू नहीं पा सके हैं।
डस्टबिन हैं नहीं, नालों में डालते हैं पॉलीथिन
ट्विन सिटी की करीब साठ प्रतिशत कॉलोनियों में नगर निगम द्वारा डस्टबिन तक नहीं रखे गए हैं। यदि बाजारों में यह डस्टबिन रखे गए हैं, तो उनकी दूरी काफी अधिक है या फिर यह मिलते ही नहीं है।
यही कारण है कि लोग व दुकानदार भी नालों व नालियों में ही पॉलीथिन डाल रहे हैं। कैंट के बीडी फ्लोर मिल के पीछे, महेश नगर, गोविंद नगर एरिया, राय मार्केट सहित अन्य क्षेत्रों, सिटी में कांवला, जंडली, दुर्गा नगर, नाहन हाउस, डेहा कॉलोनी, कैथ माजरी, वाल्मीकि नगर, रविदास बस्ती, झुग्गी बस्ती सहित कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर डस्टबिन हैं ही नहीं। यही कारण है कि लोग नालों अथवा नालियों में पॉलीथिन फेंक रहे हैं, जबकि इनकी नियमित सफाई न होने के कारण यह पॉलीथिन बुरी तरह से जम रहा है।
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कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा
नगर निगम द्वारा पॉलीथिन इस्तेमाल को लेकर की जाने वाली कार्रवाई सिर्फ दिखावा ही साबित हो रही है। सरकार द्वारा पॉलीथिन की बिक्री अथवा इस्तेमाल पर प्रतिबंध है, लेकिन इसके बावजूद जिला भर में इसकी बिक्री हो रही है। निगम द्वारा कार्रवाई भी दिखावे की है, जिसके कारण नालों में यह पालीथिन जमा होता है और मानसून सीजन में इसके कारण पानी की निकासी बुरी तरह से प्रभावित होती है। सफाई कर्मचारी भी मानते हैं, नालों व नालियों की सफाई में सबसे ज्यादा पालीथिन निकलते हैं।
ठोस कार्रवाई हो
अधिकारी यदि सख्ती करें, तो सब कुछ हो सकता है। न तो पॉलीथिन बिके और न ही यह नालियों व नालों को ब्लाक करे। कार्रवाई ठोस हो, तभी इसका फायदा है, नहीं तो जनता तो इसका खामियाजा भुगत रही है।
- निर्मल शुक्ला, अंबाला
सफाई नियमित होना चाहिए
अधिकारी खुद मानते हैं कि नालों नालियों में पॉलीथिन सबसे ज्यादा मिलता है। यदि सब कुछ पता है, तो क्यों कार्रवाई नहीं करते। साल भर आराम करते हैं और जब मानसून सिर पर आता है, तो इस ओर ध्यान दिया जाता है, जबकि यह सब नियमित होना चाहिए।
- आनंद मोहन शुक्ला, अंबाला
प्रशासनतो कहीं सख्ती करे
नालों व नालियों की सफाई नियमित होनी चाहिए जबकि पॉलीथिन की प्रोडक्शन पर ही रोक लगे। यदि डस्टबिन की संख्या ज्यादा होगी, तो लोग भी नालों में इसे फेंकने की बजाए डस्टबिन में ही इसे फेकेगें प्रशासन कहीं पर तो सख्ती करे।
- अमनप्रीत सिंह, अंबाला
प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ दिखावा
नालियों व नालों में जिस तरह पालीथिन जमा है, उससे साफ दिख रहा है कि प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ दिखावे की है। नालियों में जमा यही पॉलीथिन निकासी रोकता है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
- इंप्रीत सिंह, अंबाला
अभियान चलाया जा रहा है
नालों व नालियों में पालीथिन सबसे ज्यादा मिलता है, लेकिन निगम की ओर से भी लगातार कार्रवाई होती है। जनता भी पॉलीथिन का इस्तेमाल बंद करें। रही बात नालों की सफाई की, इसे लेकर अभियान चल रहा है और हर नाले की सफाई पूरी तरह से की जाएगी, ताकि मानसून सीजन में जलभराव की स्थिति न बने।
- रमेश मल, मेयर नगर निगम अंबाला
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डस्टबिन हैं नहीं, नालों में डालते हैं पॉलीथिन
ट्विन सिटी की करीब साठ प्रतिशत कॉलोनियों में नगर निगम द्वारा डस्टबिन तक नहीं रखे गए हैं। यदि बाजारों में यह डस्टबिन रखे गए हैं, तो उनकी दूरी काफी अधिक है या फिर यह मिलते ही नहीं है।
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यही कारण है कि लोग व दुकानदार भी नालों व नालियों में ही पॉलीथिन डाल रहे हैं। कैंट के बीडी फ्लोर मिल के पीछे, महेश नगर, गोविंद नगर एरिया, राय मार्केट सहित अन्य क्षेत्रों, सिटी में कांवला, जंडली, दुर्गा नगर, नाहन हाउस, डेहा कॉलोनी, कैथ माजरी, वाल्मीकि नगर, रविदास बस्ती, झुग्गी बस्ती सहित कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर डस्टबिन हैं ही नहीं। यही कारण है कि लोग नालों अथवा नालियों में पॉलीथिन फेंक रहे हैं, जबकि इनकी नियमित सफाई न होने के कारण यह पॉलीथिन बुरी तरह से जम रहा है।
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कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा
नगर निगम द्वारा पॉलीथिन इस्तेमाल को लेकर की जाने वाली कार्रवाई सिर्फ दिखावा ही साबित हो रही है। सरकार द्वारा पॉलीथिन की बिक्री अथवा इस्तेमाल पर प्रतिबंध है, लेकिन इसके बावजूद जिला भर में इसकी बिक्री हो रही है। निगम द्वारा कार्रवाई भी दिखावे की है, जिसके कारण नालों में यह पालीथिन जमा होता है और मानसून सीजन में इसके कारण पानी की निकासी बुरी तरह से प्रभावित होती है। सफाई कर्मचारी भी मानते हैं, नालों व नालियों की सफाई में सबसे ज्यादा पालीथिन निकलते हैं।
ठोस कार्रवाई हो
अधिकारी यदि सख्ती करें, तो सब कुछ हो सकता है। न तो पॉलीथिन बिके और न ही यह नालियों व नालों को ब्लाक करे। कार्रवाई ठोस हो, तभी इसका फायदा है, नहीं तो जनता तो इसका खामियाजा भुगत रही है।
- निर्मल शुक्ला, अंबाला
सफाई नियमित होना चाहिए
अधिकारी खुद मानते हैं कि नालों नालियों में पॉलीथिन सबसे ज्यादा मिलता है। यदि सब कुछ पता है, तो क्यों कार्रवाई नहीं करते। साल भर आराम करते हैं और जब मानसून सिर पर आता है, तो इस ओर ध्यान दिया जाता है, जबकि यह सब नियमित होना चाहिए।
- आनंद मोहन शुक्ला, अंबाला
प्रशासनतो कहीं सख्ती करे
नालों व नालियों की सफाई नियमित होनी चाहिए जबकि पॉलीथिन की प्रोडक्शन पर ही रोक लगे। यदि डस्टबिन की संख्या ज्यादा होगी, तो लोग भी नालों में इसे फेंकने की बजाए डस्टबिन में ही इसे फेकेगें प्रशासन कहीं पर तो सख्ती करे।
- अमनप्रीत सिंह, अंबाला
प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ दिखावा
नालियों व नालों में जिस तरह पालीथिन जमा है, उससे साफ दिख रहा है कि प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ दिखावे की है। नालियों में जमा यही पॉलीथिन निकासी रोकता है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
- इंप्रीत सिंह, अंबाला
अभियान चलाया जा रहा है
नालों व नालियों में पालीथिन सबसे ज्यादा मिलता है, लेकिन निगम की ओर से भी लगातार कार्रवाई होती है। जनता भी पॉलीथिन का इस्तेमाल बंद करें। रही बात नालों की सफाई की, इसे लेकर अभियान चल रहा है और हर नाले की सफाई पूरी तरह से की जाएगी, ताकि मानसून सीजन में जलभराव की स्थिति न बने।
- रमेश मल, मेयर नगर निगम अंबाला