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हमें संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए
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मुख्यातिथि डॉ. अंशु सिंगला को पुस्तक भेंट करते प्रो. सुनील ढ़ींगरा व अन्य। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। पंचनद शोध संस्थान अध्ययन केंद्र व यूआईईटी के संयुक्त तत्वाधान में महिला सशक्तिकरण : वर्तमान परिदृश्य में अवसर एवं चुनौतियां विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्यातिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. अंशु सिंगला ंने कहा कि सकारात्मक विचार, अच्छा स्वास्थ्य, आध्यात्मिक शक्ति और प्रकृति के प्रति सम्मान किसी भी समाज के उत्थान के लिए नितांत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि हमें अपने संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए। जितनी मर्यादा महिला के लिए है, उतनी ही पुरुष के लिए भी है। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि अपने व्यवहार को इस तरह बनाइए कि आपके आस-पड़ोस और जानकार लोग आपका सम्मान करें, जिसका व्यवहार अच्छा नहीं होता, समाज उसका सम्मान नहीं करता। आप अपना रास्ता खुद तैयार कर रहे हैं। भ्रूण हत्या पर उन्होंने कहा कि पिछले जमाने में शिक्षा न होते हुए भी एक परिवार में पांच से छह लड़कियां और एक लड़का होता था, लेकिन कोई भ्रूण हत्या नहीं होती थी। वर्तमान में एक-दो बच्चों के बावजूद भी भ्रूण हत्या देखने को मिल रही है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. अनीता दुआ ने कहा कि केंद्र महिलाओं को सशक्त करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रहा है एवं उसके सफल परिणाम भी दिखाई पड़ रहे हैं। समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. वनिता ढींगरा ने कहा कि क्या हम अपनी बेटियों को अपनी स्वेच्छा से आने जाने की, अपना कॅरिअर चुनने आदि की स्वतंत्रता प्रदान कर रहे हैं?
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पंचनद शोध संस्थान अध्ययन केंद्र की उपाध्यक्ष डॉ. मधु दीप सिंह ने कहा कि पंचनद का उद्देश्य समाज में अनछुए विषयों पर विचार विमर्श करना और समाज में चेतना स्थापित करना है। केंद्र के अध्यक्ष डॉ. सीडीएस कौशल ने अतिथियों का धन्यवाद किया। अध्यक्षता यूआईईटी के निदेशक प्रो. सुनील ढ़ींगरा ने कीष संचालन राजेश शर्मा ने किया। इस मौके पर प्रो. अरविंद मलिक, प्रो एसी राणा, प्रो. संजीव अरोड़ा, प्रो. प्रदीप चौहान, डॉ. सुनीता दलाल, डॉ. अजय जांगड़ा, डॉ. रीटा, डॉ. अमिता, डॉ. राज कमल, डॉ. प्रियंका, डॉ. सुनील, डॉ. वंदना, डॉ. राम अवतार, डॉ. कर्मवीर, डॉ. संजीव आहूजा आदि मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। पंचनद शोध संस्थान अध्ययन केंद्र व यूआईईटी के संयुक्त तत्वाधान में महिला सशक्तिकरण : वर्तमान परिदृश्य में अवसर एवं चुनौतियां विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्यातिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. अंशु सिंगला ंने कहा कि सकारात्मक विचार, अच्छा स्वास्थ्य, आध्यात्मिक शक्ति और प्रकृति के प्रति सम्मान किसी भी समाज के उत्थान के लिए नितांत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि हमें अपने संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए। जितनी मर्यादा महिला के लिए है, उतनी ही पुरुष के लिए भी है। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि अपने व्यवहार को इस तरह बनाइए कि आपके आस-पड़ोस और जानकार लोग आपका सम्मान करें, जिसका व्यवहार अच्छा नहीं होता, समाज उसका सम्मान नहीं करता। आप अपना रास्ता खुद तैयार कर रहे हैं। भ्रूण हत्या पर उन्होंने कहा कि पिछले जमाने में शिक्षा न होते हुए भी एक परिवार में पांच से छह लड़कियां और एक लड़का होता था, लेकिन कोई भ्रूण हत्या नहीं होती थी। वर्तमान में एक-दो बच्चों के बावजूद भी भ्रूण हत्या देखने को मिल रही है।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. अनीता दुआ ने कहा कि केंद्र महिलाओं को सशक्त करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रहा है एवं उसके सफल परिणाम भी दिखाई पड़ रहे हैं। समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. वनिता ढींगरा ने कहा कि क्या हम अपनी बेटियों को अपनी स्वेच्छा से आने जाने की, अपना कॅरिअर चुनने आदि की स्वतंत्रता प्रदान कर रहे हैं?
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पंचनद शोध संस्थान अध्ययन केंद्र की उपाध्यक्ष डॉ. मधु दीप सिंह ने कहा कि पंचनद का उद्देश्य समाज में अनछुए विषयों पर विचार विमर्श करना और समाज में चेतना स्थापित करना है। केंद्र के अध्यक्ष डॉ. सीडीएस कौशल ने अतिथियों का धन्यवाद किया। अध्यक्षता यूआईईटी के निदेशक प्रो. सुनील ढ़ींगरा ने कीष संचालन राजेश शर्मा ने किया। इस मौके पर प्रो. अरविंद मलिक, प्रो एसी राणा, प्रो. संजीव अरोड़ा, प्रो. प्रदीप चौहान, डॉ. सुनीता दलाल, डॉ. अजय जांगड़ा, डॉ. रीटा, डॉ. अमिता, डॉ. राज कमल, डॉ. प्रियंका, डॉ. सुनील, डॉ. वंदना, डॉ. राम अवतार, डॉ. कर्मवीर, डॉ. संजीव आहूजा आदि मौजूद रहे।