फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   We have closed the avenues for communication, we will have to work on resilience training:

हमने बात करने के रास्ते किए बंद , लचीलापन प्रशिक्षण पर करना होगा काम :

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2026 02:58 AM IST
विज्ञापन
We have closed the avenues for communication, we will have to work on resilience training:
कुरुक्षेत्र। पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक डॉ उपदेश कुमार चर्चा करते हुए। संवाद - फोटो : samvad
कुरुक्षेत्र। एनआईटी में दो माह में चार विद्यार्थियों की आत्महत्या के मामले में रक्षा मनोवैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान (डीआरडीओ) के मानसिक स्वास्थ्य प्रभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. उपदेश कुमार से बात की गई। उन्होंने कहा कि हमने बात करने के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। सबसे पहले हमें अपने अंदर और अपने बच्चों को लचीलापन प्रशिक्षण देना चाहिए, जो जीवन की समस्याओं से निपटने के लिए सबसे ज्यादा काम आता है। इतना ही नहीं, बच्चों में खासकर जो छात्र जीवन में हैं, उनको अपना सामाजिक दायरा बढ़ाना चाहिए, न कि सामाजिक माध्यमों का दायरा।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि दैनिक जीवन में आपका सामाजिक दायरा बड़ा होता जाएगा तो वह तय करता है कि आप कितने अवसाद में हैं। क्योंकि जितना मजबूत आपका सहयोग तंत्र होगा, उतने मजबूत आप बनेंगे। उम्मीदें भी अक्सर आपको अवसाद की तरफ ले जाती हैं। अगर आप किसी उम्मीद पर खरे नहीं उतर पाए तो हम उसे अवसाद के रूप में ले लेते हैं और यह हमारी मनोस्थिति को बुरी तरह से प्रभावित करता है। डॉ. उपदेश ने कहा कि जीवन में कमियां हर किसी में होती हैं लेकिन उसे अपने पर हावी करना किसी तरह से सही नहीं है। बच्चों को जीवन कौशल, तनाव प्रबंधन, लचीलापन प्रशिक्षण, सामाजिक सहयोग, दोषारोपण से बाहर आना, ये सब सिखाना चाहिए, जो घर से ही शुरू हो जाता है।
विज्ञापन

डॉ. उपदेश ने कहा कि देश में हर साल करीब एक लाख 75 हजार से ज्यादा लोग आत्महत्या कर रहे हैं जबकि पूरे संसार में यह संख्या करीब सात लाख से ज्यादा है। साल 2013 से साल 2023 तक छात्रों की आत्महत्या में करीब 65 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, यानी हर 20 से 30 सेकेंड में एक आत्महत्या हो रही है। हालांकि आत्महत्या कभी भी एक मिनट, एक घंटा, एक दिन की अवधारणा नहीं रही। यह एक लंबी प्रक्रिया होती है, जो किसी बात, किसी चीज आदि के लिए गुबार मन में बन जाता है और फिर यह आत्मघाती कदम उठाया जाता है। सहने की क्षमता होनी चाहिए। हमें तीन केंद्र बिंदु पर काम करना चाहिए तनाव, सहनशीलता और क्षमता।
विज्ञापन
विज्ञापन


वे आत्महत्या और यह कदम उठाने से पहले के रहने वाले व्यवहार पर पांच किताबें लिख चुके हैं। इनमें आत्मघाती व्यवहार जोखिमग्रस्त लोगों का आकलन और आत्मघाती व्यवहार अंतर्निहित गतिशीलता, आत्महत्या व्यवहार की पुस्तिका, आत्महत्या रोकथाम की पुस्तिका आदि शामिल हैं।

छात्रों से संवाद का रास्ता खुला होना चाहिए : प्रो. हरदीप

मनोविज्ञान विभाग से चेयरमैन प्रो. हरदीप ने बताया कि संवाद एक मात्र रास्ता है जिससे इस अनहोनी को रोका जा सकता है। प्रो. हरदीप ने बताया कि जरूरी नहीं माता-पिता या बच्चे ही संवाद करें, शिक्षक भी पहल कर सकते हैं, बेशक इसके लिए उनका अलग से प्रशिक्षण हो। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को भी चाहिए कि वे महीने में एक बार छात्रों से संवाद जरूर करें। उन्होंने कहा कि हमने भी अपने विभाग में सभी को कहा है कि अगर कोई समस्या हो तो किसी भी शिक्षक से बात करें, अपना मन हल्का करें, आपकी बातें गोपनीय रखी जाएंगी।



छवि के प्रति अत्यधिक सजग होना भी अवसाद का कारण : डॉ. रोहतास

मनोविज्ञान विभाग के प्रो. डॉ. रोहतास ने बताया कि छवि के प्रति अत्यधिक सजग होना भी एक बड़ा कारण रहता है। अगर हम अपनी छवि, जीवनशैली के लिए चिंतित रहेंगे तो हम कभी न कभी अवसाद का हिस्सा बन जाएंगे। कभी खुद को दोष मत दें, यह काम तो छात्र आज से ही बंद कर दें। दोष किस बात का देना, आपने मेहनत की, फल नहीं मिला तो दोबारा कोशिश करें। ध्यान आकर्षित करने की प्रवृत्ति भी एक कारक होता है, आजकल बच्चों के संतुलन को खराब करने का।

कुरुक्षेत्र। पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक डॉ उपदेश कुमार चर्चा करते हुए। संवाद

कुरुक्षेत्र। पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक डॉ उपदेश कुमार चर्चा करते हुए। संवाद- फोटो : samvad

कुरुक्षेत्र। पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक डॉ उपदेश कुमार चर्चा करते हुए। संवाद

कुरुक्षेत्र। पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक डॉ उपदेश कुमार चर्चा करते हुए। संवाद- फोटो : samvad

कुरुक्षेत्र। पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक डॉ उपदेश कुमार चर्चा करते हुए। संवाद

कुरुक्षेत्र। पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक डॉ उपदेश कुमार चर्चा करते हुए। संवाद- फोटो : samvad

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed