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मारकंडा नदी में जलस्तर बढ़ा : प्रशासन सतर्क, ग्रामीणों को किया गया अलर्ट
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- 15 हजार क्यूसिक पहुंचा जलस्तर, प्रशासन भी हुआ अलर्ट
कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। तीन दिन से सामान्य रहा मारकंडा नदी का जलस्तर मंगलवार को फिर बढ़ गया, जो 15 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया। काला अंब के आसपास पहाड़ों में हुई बारिश के चलते यह जलस्तर और भी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसके चलते प्रशासन अलर्ट हो गया है तो आसपास के गांवों को भी मुनादी करवा सतर्क किया गया है।
नदी के तटों से सटे गांव कठवा, पट्टी जामड़ा, गुमटी, मलकपुर, कलसाना, तंगौर और मुगलमाजरा में सरपंचों के माध्यम से मुनादी करवाई गई। गेज रीडर रविंदर कुमार के मुताबिक मंगलवार सुबह तक नदी का जलस्तर महज दो हजार क्यूसेक के आसपास था लेकिन सुबह 11 बजे के बाद पानी का स्तर लगातार बढ़ता गया और शाम छह बजे तक यह 15 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी स्थानीय क्षेत्रों में नहीं, बल्कि पहाड़ों और काला अंब के आसपास हुई तेज बारिश के कारण हुई है। काला अब के गेज रीडर कश्मीरा सिंह के मुताबिक सोमवार व मंगलवार को पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक बारिश होने के चलते यहां पर मारकंडा नदी में करीब 27 हजार क्यूसेक पानी बहने लगा है। वहीं मुलाना में तैनात गेज रीडर पवन ने बताया कि यहां नदी में अधिकतम 35 हजार क्यूसेक तक पानी दर्ज किया गया है। काला अब और मुलाना के बीच नित नदी, रुन-बेंगना तथा अन्य बरसाती नालों के जुड़ने से नदी का जलस्तर बढ़ा है।
उधर मुलाना के बाद पानी का बहाव अंबाला के हेमामाजरा गांव तक पहुंच गया, जिससे आसपास के किसानों की चिंता बढ़ गई। शाहाबाद में मारकंडा नदी का खतरे का निशान 35 हजार क्यूसेक के आसपास माना जाता है, लेकिन तटबंधों के अभाव, नदी का समतल बहाव और माइनिंग बंद होने से कम जल प्रवाह में भी खेतों और घरों में पानी घुसने की आशंका बनी रहती है। कठवा गांव के किसान सतपाल, राजेश कुमार का कहना है कि पहले मारकंडा में 20 हजार क्यूसेक पानी आया था, जिससे उनके गांव के आसपास फसलें नष्ट हो गई थी। अब फिर जलस्तर बढ़ने लगा है।
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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। तीन दिन से सामान्य रहा मारकंडा नदी का जलस्तर मंगलवार को फिर बढ़ गया, जो 15 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया। काला अंब के आसपास पहाड़ों में हुई बारिश के चलते यह जलस्तर और भी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसके चलते प्रशासन अलर्ट हो गया है तो आसपास के गांवों को भी मुनादी करवा सतर्क किया गया है।
नदी के तटों से सटे गांव कठवा, पट्टी जामड़ा, गुमटी, मलकपुर, कलसाना, तंगौर और मुगलमाजरा में सरपंचों के माध्यम से मुनादी करवाई गई। गेज रीडर रविंदर कुमार के मुताबिक मंगलवार सुबह तक नदी का जलस्तर महज दो हजार क्यूसेक के आसपास था लेकिन सुबह 11 बजे के बाद पानी का स्तर लगातार बढ़ता गया और शाम छह बजे तक यह 15 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी स्थानीय क्षेत्रों में नहीं, बल्कि पहाड़ों और काला अंब के आसपास हुई तेज बारिश के कारण हुई है। काला अब के गेज रीडर कश्मीरा सिंह के मुताबिक सोमवार व मंगलवार को पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक बारिश होने के चलते यहां पर मारकंडा नदी में करीब 27 हजार क्यूसेक पानी बहने लगा है। वहीं मुलाना में तैनात गेज रीडर पवन ने बताया कि यहां नदी में अधिकतम 35 हजार क्यूसेक तक पानी दर्ज किया गया है। काला अब और मुलाना के बीच नित नदी, रुन-बेंगना तथा अन्य बरसाती नालों के जुड़ने से नदी का जलस्तर बढ़ा है।
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उधर मुलाना के बाद पानी का बहाव अंबाला के हेमामाजरा गांव तक पहुंच गया, जिससे आसपास के किसानों की चिंता बढ़ गई। शाहाबाद में मारकंडा नदी का खतरे का निशान 35 हजार क्यूसेक के आसपास माना जाता है, लेकिन तटबंधों के अभाव, नदी का समतल बहाव और माइनिंग बंद होने से कम जल प्रवाह में भी खेतों और घरों में पानी घुसने की आशंका बनी रहती है। कठवा गांव के किसान सतपाल, राजेश कुमार का कहना है कि पहले मारकंडा में 20 हजार क्यूसेक पानी आया था, जिससे उनके गांव के आसपास फसलें नष्ट हो गई थी। अब फिर जलस्तर बढ़ने लगा है।
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