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30 गांवों में 140 से 250 फीट तक घटा जलस्तर
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अटल भूजल योजना के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करती टीम। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जिले के पिहोवा और शाहाबाद ब्लॉक के 189 गांवों को भूजल प्रबंधन के लिए चिह्नित किया गया है। इस माह जिला कार्यान्वयन भागीदार टीम ने 30 गांवों का दौरा किया। इन गांवों में जलस्तर 140 से 250 फीट घटा पाया गया।
टीम ने शाहाबाद प्रखंड के 18 गांवों जैनपुर, भोकर माजरा, रतनगढ़, छपरा, छपरी, मोहनपुर, ढकला, सुरखपुर, रावा, डडलू, पडलू, दामली, शरीफगढ़, गोरीपुर, किशनगढ़, तेओरा, रामनगर और टंगौर का दौरा किया। टीम ने पिहोवा प्रखंड के 12 गांव गढ़ी सिंहा, भोर सयान, मुकीमपुरा, संधोला, संधोली, गढ़ी रोडन, टिकरी, तलहेरी, चुनिया फार्म, सिंहपुरा, सैयना खुर्द और हमीरा फार्म में सामुदायिक भागीदारी से भूजल प्रबंधन के लिए दौरा किया। वर्तमान समय में यहां का जल स्तर 140-250 फीट तक चला गया है।
अधिकांश ग्रामीणों ने तालाब के जीर्णोद्धार, नए तालाब की खुदाई, नहर के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल प्रबंधन, पुनर्भरण बोरवेल, नई झीलों के निर्माण, सामाजिक धार्मिक स्थलों में वर्षा जल संचयन संरचनाओं, सूक्ष्म सिंचाई और फसल विविधीकरण के लिए सुझाव दिया। सरपंच व ग्राम सचिवों ने बताया कि स्थानीय लोगों को इसके बारे में पहले से ही पता है, लेकिन उत्कृष्ट योजना की कमी के कारण वे भूजल की स्थिति का प्रबंधन करने में सक्षम नहीं हैं।
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भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन ने बताया कि 30 गांवों में जलस्तर संकेतक के आंकड़ों की जांच की और पाया कि पिछले 10 वर्षों में जलस्तर तेजी से घट रहा है। कृषि विशेषज्ञ शंकर राणा ने भी इन 30 गांवों की मिट्टी की गुणवत्ता की जांच की और पाया कि ऊपरी सतह (चिकनी मिट्टी) जलभृत में सतही जल पुनर्भरण की अनुमति नहीं दे रही है।
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कुरुक्षेत्र। जिले के पिहोवा और शाहाबाद ब्लॉक के 189 गांवों को भूजल प्रबंधन के लिए चिह्नित किया गया है। इस माह जिला कार्यान्वयन भागीदार टीम ने 30 गांवों का दौरा किया। इन गांवों में जलस्तर 140 से 250 फीट घटा पाया गया।
टीम ने शाहाबाद प्रखंड के 18 गांवों जैनपुर, भोकर माजरा, रतनगढ़, छपरा, छपरी, मोहनपुर, ढकला, सुरखपुर, रावा, डडलू, पडलू, दामली, शरीफगढ़, गोरीपुर, किशनगढ़, तेओरा, रामनगर और टंगौर का दौरा किया। टीम ने पिहोवा प्रखंड के 12 गांव गढ़ी सिंहा, भोर सयान, मुकीमपुरा, संधोला, संधोली, गढ़ी रोडन, टिकरी, तलहेरी, चुनिया फार्म, सिंहपुरा, सैयना खुर्द और हमीरा फार्म में सामुदायिक भागीदारी से भूजल प्रबंधन के लिए दौरा किया। वर्तमान समय में यहां का जल स्तर 140-250 फीट तक चला गया है।
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अधिकांश ग्रामीणों ने तालाब के जीर्णोद्धार, नए तालाब की खुदाई, नहर के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल प्रबंधन, पुनर्भरण बोरवेल, नई झीलों के निर्माण, सामाजिक धार्मिक स्थलों में वर्षा जल संचयन संरचनाओं, सूक्ष्म सिंचाई और फसल विविधीकरण के लिए सुझाव दिया। सरपंच व ग्राम सचिवों ने बताया कि स्थानीय लोगों को इसके बारे में पहले से ही पता है, लेकिन उत्कृष्ट योजना की कमी के कारण वे भूजल की स्थिति का प्रबंधन करने में सक्षम नहीं हैं।
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भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन ने बताया कि 30 गांवों में जलस्तर संकेतक के आंकड़ों की जांच की और पाया कि पिछले 10 वर्षों में जलस्तर तेजी से घट रहा है। कृषि विशेषज्ञ शंकर राणा ने भी इन 30 गांवों की मिट्टी की गुणवत्ता की जांच की और पाया कि ऊपरी सतह (चिकनी मिट्टी) जलभृत में सतही जल पुनर्भरण की अनुमति नहीं दे रही है।