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Kurukshetra: आखिरकार शांत हुई मारकंडा, खतरे के निशान से 11 हजार क्यूसेक नीचे आया पानी का बहाव
Mon, 08 Sep 2025 08:18 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 08 Sep 2025 08:18 AM IST
सार
एक सप्ताह के दौरान ही मारकंडा का जलस्तर 36 हजार से भी ज्यादा पहुंच गया था और इसी वजह से शाहाबाद, इस्माईलाबाद व पिहोवा क्षेत्र में करीब 60 हजार एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी।
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इस्माइलाबाद के खेतों में भरा पानी
- फोटो : संवाद
विस्तार
करीब 15 दिनों तक अपना राैद्र रूप दिखाती रही मारकंडा नदी शांत हो गई है। नदी में सोमवार सुबह 7:30 बजे शाहाबाद में 14007 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया जो खतरे के निशान 25000 क्यूसेक से करीब 11 हजार क्यूसेक कम रहा।
इससे न केवल बाढ़ का दंश झेल रहे आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है बल्कि प्रशासन को भी बड़ी राहत मिली है। एक सप्ताह के दौरान ही मारकंडा का जलस्तर 36 हजार से भी ज्यादा पहुंच गया था और इसी वजह से शाहाबाद, इस्माईलाबाद व पिहोवा क्षेत्र में करीब 60 हजार एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी। वहीं गांव कठवा, तगौर, अजमतपुर शहीद कई गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए थे।
मारकंडा शांत हुई तो पानी भी उतरने की उम्मीद जगी है। हालांकि जल भराव से अभी बड़े स्तर पर किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन अब धीरे-धीरे हालत सुधारने की उम्मीद की जाने लगी है। उधर इस्माईलाबाद के गांव नैंसी के पास टूटे एक तटबंध को दुरुस्त किए जाने का अधिकतर काम पूरा हो गया है तो आज दोपहर बाद दूसरे तटबंध को भी दुरुस्त करने का काम शुरू किया जाएगा। हालांकि दीवार टूटने से बीबीपुर झील में अभी पानी का बहाव तेज है लेकिन मारकंडा में पानी होने के चलते शाम तक यहां भी कुछ राहत मिल सकेगी।
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इससे न केवल बाढ़ का दंश झेल रहे आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है बल्कि प्रशासन को भी बड़ी राहत मिली है। एक सप्ताह के दौरान ही मारकंडा का जलस्तर 36 हजार से भी ज्यादा पहुंच गया था और इसी वजह से शाहाबाद, इस्माईलाबाद व पिहोवा क्षेत्र में करीब 60 हजार एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी। वहीं गांव कठवा, तगौर, अजमतपुर शहीद कई गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए थे।
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मारकंडा शांत हुई तो पानी भी उतरने की उम्मीद जगी है। हालांकि जल भराव से अभी बड़े स्तर पर किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन अब धीरे-धीरे हालत सुधारने की उम्मीद की जाने लगी है। उधर इस्माईलाबाद के गांव नैंसी के पास टूटे एक तटबंध को दुरुस्त किए जाने का अधिकतर काम पूरा हो गया है तो आज दोपहर बाद दूसरे तटबंध को भी दुरुस्त करने का काम शुरू किया जाएगा। हालांकि दीवार टूटने से बीबीपुर झील में अभी पानी का बहाव तेज है लेकिन मारकंडा में पानी होने के चलते शाम तक यहां भी कुछ राहत मिल सकेगी।
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