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Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Virasat has prepared Haryana Pavilion to give a live view of Haryanvi rural culture at Baisakhi Fair.

Kurukshetra News: बैसाखी मेले में हरियाणवी ग्रामीण संस्कृति से जीवंत रूबरू करवाने के लिए विरासत ने तैयार किया हरियाणा पैवेलियन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Apr 2026 01:52 AM IST
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Virasat has prepared Haryana Pavilion to give a live view of Haryanvi rural culture at Baisakhi Fair.
कुरुक्षेत्र। हरियाणा पैवेलियन में सांस्कृतिक प्रदर्शनी। विज्ञप्ति - फोटो : संगठन
कुरुक्षेत्र। सिख गुरुओं की पावन धरा पर 13 और 14 अप्रैल को होने वाले बैसाखी महोत्सव में प्रदेश की परंपरागत सांस्कृतिक विरासत देखने को मिलेगी। इस महोत्सव में विरासत दि हेरिटेज विलेज कुरुक्षेत्र की ओर से हरियाणा पैवेलियन में सांस्कृतिक प्रदर्शनी हरियाणा के हस्तशिल्प का आकर्षण का केंद्र बनेगी।
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विरासत प्रदर्शनी में हरियाणा के गांवों से जुड़ी हुई सभी प्राचीन वस्तुओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जो अब लुप्तप्राय हो चुकी हैं। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि विरासत प्रदर्शनी के हरियाणा पैवेलियन में मेले का मुख्य आकर्षण हरियाणवी पगड़ी का सेक्शन व सेल्फी प्वाइंट होगा। इसमें पगड़ी बंधाओ, फोटो खिंचाओ इवेंट के माध्यम से युवा हरियाणा की पगड़ी परंपरा से रूबरू होंगे।
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उन्होंने कहा कि इस लोक पारंपरिक हस्तकला के अनेक हरियाणवी नमूने हरियाणवी फुलझड़ी, हरियाणवी लोक वेशभूषा प्रदर्शनी में पारंपरिक परिधानों को जीवंत रूप से दिखाने के लिए महिलाओं की ओर से पारंपरिक पहनावे में ग्रामीण जीवन की झांकी प्रस्तुत की जाएगी। इस मेले में हरियाणा की फुलकारी कला को दिखाया जाएगा जिसमें शिल्पकार मौके पर ही सुंदर डिजाइन तैयार करते नजर आएंगे। वहीं कुम्हार की ओर से पारंपरिक चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाते देखना दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगा।
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मेले में लोहार कला के माध्यम से प्राचीन ताले भी प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके अलावा रथ निर्माण कला के माध्यम से हरियाणा के पारंपरिक परिवहन और उससे जुड़ी कारीगरी को दर्शाया जाएगा। इसके साथ ही इंडी बनाने की पारंपरिक विधि, बिजना और दरी बुनाई जैसे शिल्प, गुड्डा-गुड़िया निर्माण, पीढ़ा और चारपाई बुनाई विशेष रूप से खाट (चारपाई) बुनाई का प्रदर्शन भी मेले में जीवंत रूप में देखने को मिलेंगे। खाट व पीढ़ा हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। पीढ़ा, खटौला, खाट, पिलंग, दैहला आदि घरों, बैठकों व चौपालों में प्रयोग किए जाते रहे हैं। यहां पर सैकड़ों वर्ष पुराने तांबे और पीतल के बर्तन भी प्रदर्शित किए जाएंगे।
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