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Kurukshetra News: 24 घंटे बिजली गुल रहने पर भड़के ग्रामीण, महिलाओं ने दोनों सड़कें की जाम
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पिहोवा। गांव भट्ट माजरा में बिजली संकट को लेकर जाम लगाते हुए ग्रामीण। संवाद
पिहोवा। गांव भट्ट माजरा में पिछले 24 घंटे से बिजली आपूर्ति ठप रहने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। शुक्रवार को महिलाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अंबाला-हिसार रोड और पटियाला रोड पर जाम लगा दिया। इससे दोनों मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करवाने का आश्वासन दिया। करीब एक घंटे बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया।
ग्रामीण गुरचरण सिंह, बिट्टू, बलकार और गुरदेव ने बताया कि गांव में एक दिन से बिजली नहीं आने के कारण घरों में पीने का पानी तक खत्म हो गया है। जरूरी काम अटके पड़े हैं और पशुओं के लिए पानी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो रहा है। उनका कहना था कि बाजार में किराये पर जनरेटर भी उपलब्ध नहीं हैं। परेशान होकर उन्हें प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए सड़क जाम करनी पड़ी।
ग्रामीणों के अनुसार, बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से पहले सप्लाई चालू थी, लेकिन बाद में कई जगह फॉल्ट आने से आपूर्ति बाधित हो गई। बिजली केंद्रों पर तैनात पटवारी और पुलिसकर्मी इन फॉल्ट को ढूंढने और ठीक करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण अपने स्तर पर खराबी ढूंढकर निजी मैकेनिकों की मदद से बिजली चालू करवाने का प्रयास कर रहे हैं।
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फोटो 38
निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का रोष मार्च
दूसरी ओर, बिजली कर्मचारियों ने शुक्रवार को शहर में रोष मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। इसमें रोडवेज कर्मचारी और किसान यूनियन के सदस्य भी शामिल हुए। बिजली विभाग की यूनियन के प्रधान बलबीर रंगा, सचिव रणजीत सिंह, ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य महासचिव बलदेव सिंह मामू माजरा और किसान नेता प्रिंस वड़ैच ने आरोप लगाया कि सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि निजीकरण से कर्मचारियों और आम जनता के हित प्रभावित होंगे। उन्होंने गुरुग्राम और नूंह में जारी लाइसेंस रद्द होने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी। उनका कहना था कि इस लड़ाई में सभी वर्गों को एकजुट होना चाहिए।
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ग्रामीण गुरचरण सिंह, बिट्टू, बलकार और गुरदेव ने बताया कि गांव में एक दिन से बिजली नहीं आने के कारण घरों में पीने का पानी तक खत्म हो गया है। जरूरी काम अटके पड़े हैं और पशुओं के लिए पानी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो रहा है। उनका कहना था कि बाजार में किराये पर जनरेटर भी उपलब्ध नहीं हैं। परेशान होकर उन्हें प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए सड़क जाम करनी पड़ी।
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ग्रामीणों के अनुसार, बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से पहले सप्लाई चालू थी, लेकिन बाद में कई जगह फॉल्ट आने से आपूर्ति बाधित हो गई। बिजली केंद्रों पर तैनात पटवारी और पुलिसकर्मी इन फॉल्ट को ढूंढने और ठीक करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण अपने स्तर पर खराबी ढूंढकर निजी मैकेनिकों की मदद से बिजली चालू करवाने का प्रयास कर रहे हैं।
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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का रोष मार्च
दूसरी ओर, बिजली कर्मचारियों ने शुक्रवार को शहर में रोष मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। इसमें रोडवेज कर्मचारी और किसान यूनियन के सदस्य भी शामिल हुए। बिजली विभाग की यूनियन के प्रधान बलबीर रंगा, सचिव रणजीत सिंह, ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य महासचिव बलदेव सिंह मामू माजरा और किसान नेता प्रिंस वड़ैच ने आरोप लगाया कि सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि निजीकरण से कर्मचारियों और आम जनता के हित प्रभावित होंगे। उन्होंने गुरुग्राम और नूंह में जारी लाइसेंस रद्द होने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी। उनका कहना था कि इस लड़ाई में सभी वर्गों को एकजुट होना चाहिए।