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निजी वाहनों में सफर के लिए ग्रामीण मजबूर
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शाम सात बजे के बाद पुराने बस अड्डे के बाहर बस का इंतजार करते यात्री। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। शाम सात बजे के बाद शहर से अधिकतर रूटों पर रोडवेज बसें नहीं चलाई जा रही हैं। इसके कारण देहातों से रोजाना शहर में आकर काम करने आने वाले लोगों को निजी वाहनों में सफर करना पड़ रहा है। कोरोना काल में लोकल रूटों पर अधिकतर बसें बंद हो गई थीं, जिन्हें आज तक चलाया ही नहीं गया।
कुरुक्षेत्र से निसंग के लिए फिलहाल कोई बस संचालित नहीं की जा रही है। करीब एक महीने पहले तीन बसें संचालित की जा रही थीं। पहली बस सुबह सवा आठ बजे, इसके बाद साढ़े 12 और इसी क्रम में सवा पांच बजे बस का संचालन किया जा रहा था लेकिन अब इस मार्ग पर एक भी बस नहीं चल रही। इसके चलते ग्रामीण अंचल के परेशान यात्री निसंग की ओर जाने वाले यात्री निजी वाहनों में सफर करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही लोकल रूटों से होकर कुरुक्षेत्र से पिहोवा, कौल, इस्माईलाबाद, शाहाबाद आदि रूटों के लिए भी बसों का संचालन काफी समय से बंद हैं। दिन के समय लंबे रूटों की बस में सफर करके लोकल रूटों के यात्री काम चला लेते हैं, लेकिन शाम सात के बाद बसें बंद होने से इधर-उधर भटकना पड़ता है।
इन रूटों पर बंद हैं बस
पिहोवा के लिए दो बस, जिनमें पहली बस वाया थानेसर, बाहरी मोहल्ला, जोगनाखेड़ा, दबखेड़ी, बलाही, बगथला, छैलों, सुरमी, चनालहेड़ी, तलहेड़ी, टिकरी व भट्ट माजरा से पिहोवा पहुंचती थी। इस बस का रात्रि ठहराव गांव बगथला में होता था। सुबह फिर इस रूट से बस वापस कुरुक्षेत्र आती थी। दूसरी बस वाया थानेसर, भिवानी खेड़ा, घमूरखेड़ी, बचगावां, हसनपुर, संतोखपुरा, लुखी, चकचकातियां, बचकी, कैंथला, मलिकपुर, टीकरी, भट्ट माजरा से पिहोवा पहुंचती थी। वहीं कुरुक्षेत्र से कौल के लिए वाया मिर्जापुर, खानपुर, कमोदा, बारना, हथीरा व रायसन से होती हुई कौल पहुंचती थी और कौल में रात्रि ठहराव के बाद सुबह इसी रूट से वापस आती थी। इसी तरह कुरुक्षेत्र से झांसा के लिए वाया भिवानी खेड़ा, घमूरखेड़ी, बचगावां व बोगपुर से झांसा और रात झांसा में रुकने के बाद सुबह कुरुक्षेत्र पहुंचती थी। कुरुक्षेत्र से उमरी व गादरी से होते हुए केवल एक बस लाडवा आती थी। यह बस ही एक दिन में तीन चक्कर लगाती थी। इसी तरह कुरुक्षेत्र से वाया ठोल व इस्माइलाबाद की ओर जाने वाली कुल आठ बस चलती थीं, अब मात्र चार ही चल रही हैं।
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शाम साढे़ छह के बाद नहीं मिलती बस : बलविंद
बलविंद्र ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र में फर्नीचर का काम करता है और रोजाना अपने गांव हिंगा खेड़ी से कुरुक्षेत्र आता है। वह अपने गांव पहुंचने के लिए इस्माईलाबाद की बस पकड़ता है। उसके बाद रूट पर कोई बस नहीं है। आखिरी बस सहकारी समिति की होती है इसमें काफी भीड़ होती है।
यात्रियों की संख्या के अनुसार चला दी जाती है अतिरिक्त बस : अशोक मुंजाल
कुरुक्षेत्र रोडवेज डिपो के महाप्रबंधक अशोक मुंजाल ने बताया कि बस अड्डे के बाहर खड़े लोगों का पता नहीं चलता कि वे यात्री हैं या वैसे ही खड़े हैं। परिसर में भीड़ दिखती है तो अतिरिक्त बस चला दी जाती है। यदि मौके पर बस उपलब्ध नहीं है तो ऐसे रूटों पर अगले दिन से बसें शुरू कर दी जाती हैं। वहीं 35 चालक अस्पताल में एंबुलेंस पर तैनात हैं और दो से तीन छुट्टी पर रहते हैं। इस वजह से समस्या आ ही जाती है। निसंग, बाबैन व लुखी मार्ग पर एक-दो दिनों में बस शुरू की जाएगी।
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कुरुक्षेत्र। शाम सात बजे के बाद शहर से अधिकतर रूटों पर रोडवेज बसें नहीं चलाई जा रही हैं। इसके कारण देहातों से रोजाना शहर में आकर काम करने आने वाले लोगों को निजी वाहनों में सफर करना पड़ रहा है। कोरोना काल में लोकल रूटों पर अधिकतर बसें बंद हो गई थीं, जिन्हें आज तक चलाया ही नहीं गया।
कुरुक्षेत्र से निसंग के लिए फिलहाल कोई बस संचालित नहीं की जा रही है। करीब एक महीने पहले तीन बसें संचालित की जा रही थीं। पहली बस सुबह सवा आठ बजे, इसके बाद साढ़े 12 और इसी क्रम में सवा पांच बजे बस का संचालन किया जा रहा था लेकिन अब इस मार्ग पर एक भी बस नहीं चल रही। इसके चलते ग्रामीण अंचल के परेशान यात्री निसंग की ओर जाने वाले यात्री निजी वाहनों में सफर करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही लोकल रूटों से होकर कुरुक्षेत्र से पिहोवा, कौल, इस्माईलाबाद, शाहाबाद आदि रूटों के लिए भी बसों का संचालन काफी समय से बंद हैं। दिन के समय लंबे रूटों की बस में सफर करके लोकल रूटों के यात्री काम चला लेते हैं, लेकिन शाम सात के बाद बसें बंद होने से इधर-उधर भटकना पड़ता है।
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इन रूटों पर बंद हैं बस
पिहोवा के लिए दो बस, जिनमें पहली बस वाया थानेसर, बाहरी मोहल्ला, जोगनाखेड़ा, दबखेड़ी, बलाही, बगथला, छैलों, सुरमी, चनालहेड़ी, तलहेड़ी, टिकरी व भट्ट माजरा से पिहोवा पहुंचती थी। इस बस का रात्रि ठहराव गांव बगथला में होता था। सुबह फिर इस रूट से बस वापस कुरुक्षेत्र आती थी। दूसरी बस वाया थानेसर, भिवानी खेड़ा, घमूरखेड़ी, बचगावां, हसनपुर, संतोखपुरा, लुखी, चकचकातियां, बचकी, कैंथला, मलिकपुर, टीकरी, भट्ट माजरा से पिहोवा पहुंचती थी। वहीं कुरुक्षेत्र से कौल के लिए वाया मिर्जापुर, खानपुर, कमोदा, बारना, हथीरा व रायसन से होती हुई कौल पहुंचती थी और कौल में रात्रि ठहराव के बाद सुबह इसी रूट से वापस आती थी। इसी तरह कुरुक्षेत्र से झांसा के लिए वाया भिवानी खेड़ा, घमूरखेड़ी, बचगावां व बोगपुर से झांसा और रात झांसा में रुकने के बाद सुबह कुरुक्षेत्र पहुंचती थी। कुरुक्षेत्र से उमरी व गादरी से होते हुए केवल एक बस लाडवा आती थी। यह बस ही एक दिन में तीन चक्कर लगाती थी। इसी तरह कुरुक्षेत्र से वाया ठोल व इस्माइलाबाद की ओर जाने वाली कुल आठ बस चलती थीं, अब मात्र चार ही चल रही हैं।
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शाम साढे़ छह के बाद नहीं मिलती बस : बलविंद
बलविंद्र ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र में फर्नीचर का काम करता है और रोजाना अपने गांव हिंगा खेड़ी से कुरुक्षेत्र आता है। वह अपने गांव पहुंचने के लिए इस्माईलाबाद की बस पकड़ता है। उसके बाद रूट पर कोई बस नहीं है। आखिरी बस सहकारी समिति की होती है इसमें काफी भीड़ होती है।
यात्रियों की संख्या के अनुसार चला दी जाती है अतिरिक्त बस : अशोक मुंजाल
कुरुक्षेत्र रोडवेज डिपो के महाप्रबंधक अशोक मुंजाल ने बताया कि बस अड्डे के बाहर खड़े लोगों का पता नहीं चलता कि वे यात्री हैं या वैसे ही खड़े हैं। परिसर में भीड़ दिखती है तो अतिरिक्त बस चला दी जाती है। यदि मौके पर बस उपलब्ध नहीं है तो ऐसे रूटों पर अगले दिन से बसें शुरू कर दी जाती हैं। वहीं 35 चालक अस्पताल में एंबुलेंस पर तैनात हैं और दो से तीन छुट्टी पर रहते हैं। इस वजह से समस्या आ ही जाती है। निसंग, बाबैन व लुखी मार्ग पर एक-दो दिनों में बस शुरू की जाएगी।