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Kurukshetra News: वार्डाें में धूल फांक रहे वेंटिलेटर
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कोरोना काल में पीएम केयर योजना के तहत एलएनजेपी को मिले थे 32 वेंटिलेटर, 20 वेंटिलेटर का पता नहीं
अस्पताल का दावा : अस्पताल की पहली मंजिल पर बने एचडीयू-एक और दो वार्ड में लगे हैं 12 वेंटिलेटर
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, मगर जिले में यह सुविधाएं कितनी बेहतर उसकी हकीकत एलएनजेपी अस्पताल खुद बयां कर रहा है। वेंटिलेटर न मिलने से लोग अपने मरीज को निजी अस्पताल में दाखिल कराने को मजबूर हैं। कोरोना काल में अस्पताल को 32 वेंटिलेटर दिए गए थे। इसमें से अधिकतर धूल से अटे पड़े हैं। प्रबंधन 12 वेंटिलेटर इंस्टॉल होने का दावा कर रहा है। पर इनमें से अधिकतर काम नहीं कर रहे हैं। वहीं अस्पताल में आए 20 वेंटिलेटर का पता नहीं है।
जानकारी के अनुसार पीएम केयर योजना के तहत कोरोना काल में एलएनजेपी अस्पताल को 32 वेंटिलेटर दिए गए थे ताकि गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर के लिए भटकना न पड़े। उस समय प्रबंधन ने जगह की कमी बताकर केवल 12 वेंटिलेटर को इंस्टॉल कर चलाने का दावा किया था। हालांकि 12 वेंटिलेटर अभी भी अस्पताल की पहली मंजिल पर एचडीयू-एक और दो वार्ड में पड़े हैं। हैरानी की बात तो यह है कि करीब चार साल का समय बीत जाने के बाद भी इन वेंटिलेटर को भी इंस्टॉल नहीं किया गया है।
उधर, बकाया 20 वेंटिलेटर के बारे में अस्पताल प्रबंधन तरह-तरह के दावे कर रहा है। बताया यही जा रहा है कि यह वेंटिलेटर अस्पताल के स्टोर में सीलबंद पड़े हैं, जिनकी ओर किसी का कोई ध्यान नहीं है कि वह अभी काम करने की स्थिति में है या खराब हो चुके हैं। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि वेंटिलेटर योजना के तहत सरकार के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों को यह वेंटिलेटर दिए गए थे।
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एक मरीज को किया गया था भर्ती
कोरोना काल के दौरान बनाए गए वार्ड में सिर्फ एक मरीज को वेंटिलेटर की सुविधा मिली थी। उसके बाद यह वेंटिलेटर बंद ही पड़े हैं। उस समय भी विभाग में वेंटिलेटर ऑपरेटर और विशेषज्ञ स्टाफ न होने के कारण मरीज को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। आज भी अस्पताल उसी स्थिति से जूझ रहा है।
जरूरत होने पर शुरू किए जाएंगे अन्य वेंटिलेटर : डाॅ. सुखबीर सिंह
जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि अस्पताल में इंस्टॉल वेंटिलेटर काम कर रहे हैं। जरूरत होने पर बकाया वेंटिलेटर को इंस्टॉल करके उनसे भी काम लिया जाएगा। उधर, अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुपमा सिंह का कहना है कि वेटिलेटर अस्पताल में पाइप फिटेडिड हैं, जिससे मरीजों को ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है।
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अस्पताल का दावा : अस्पताल की पहली मंजिल पर बने एचडीयू-एक और दो वार्ड में लगे हैं 12 वेंटिलेटर
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, मगर जिले में यह सुविधाएं कितनी बेहतर उसकी हकीकत एलएनजेपी अस्पताल खुद बयां कर रहा है। वेंटिलेटर न मिलने से लोग अपने मरीज को निजी अस्पताल में दाखिल कराने को मजबूर हैं। कोरोना काल में अस्पताल को 32 वेंटिलेटर दिए गए थे। इसमें से अधिकतर धूल से अटे पड़े हैं। प्रबंधन 12 वेंटिलेटर इंस्टॉल होने का दावा कर रहा है। पर इनमें से अधिकतर काम नहीं कर रहे हैं। वहीं अस्पताल में आए 20 वेंटिलेटर का पता नहीं है।
जानकारी के अनुसार पीएम केयर योजना के तहत कोरोना काल में एलएनजेपी अस्पताल को 32 वेंटिलेटर दिए गए थे ताकि गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर के लिए भटकना न पड़े। उस समय प्रबंधन ने जगह की कमी बताकर केवल 12 वेंटिलेटर को इंस्टॉल कर चलाने का दावा किया था। हालांकि 12 वेंटिलेटर अभी भी अस्पताल की पहली मंजिल पर एचडीयू-एक और दो वार्ड में पड़े हैं। हैरानी की बात तो यह है कि करीब चार साल का समय बीत जाने के बाद भी इन वेंटिलेटर को भी इंस्टॉल नहीं किया गया है।
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उधर, बकाया 20 वेंटिलेटर के बारे में अस्पताल प्रबंधन तरह-तरह के दावे कर रहा है। बताया यही जा रहा है कि यह वेंटिलेटर अस्पताल के स्टोर में सीलबंद पड़े हैं, जिनकी ओर किसी का कोई ध्यान नहीं है कि वह अभी काम करने की स्थिति में है या खराब हो चुके हैं। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि वेंटिलेटर योजना के तहत सरकार के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों को यह वेंटिलेटर दिए गए थे।
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एक मरीज को किया गया था भर्ती
कोरोना काल के दौरान बनाए गए वार्ड में सिर्फ एक मरीज को वेंटिलेटर की सुविधा मिली थी। उसके बाद यह वेंटिलेटर बंद ही पड़े हैं। उस समय भी विभाग में वेंटिलेटर ऑपरेटर और विशेषज्ञ स्टाफ न होने के कारण मरीज को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। आज भी अस्पताल उसी स्थिति से जूझ रहा है।
जरूरत होने पर शुरू किए जाएंगे अन्य वेंटिलेटर : डाॅ. सुखबीर सिंह
जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि अस्पताल में इंस्टॉल वेंटिलेटर काम कर रहे हैं। जरूरत होने पर बकाया वेंटिलेटर को इंस्टॉल करके उनसे भी काम लिया जाएगा। उधर, अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुपमा सिंह का कहना है कि वेटिलेटर अस्पताल में पाइप फिटेडिड हैं, जिससे मरीजों को ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है।