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छात्रवृत्ति के दम पर त्वीशी ने फहराया परचम

Tue, 15 Jul 2014 12:22 AM IST
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 15 Jul 2014 12:22 AM IST
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कुरुक्षेत्र। त्वीशी ने जेईई (मेन) में राष्ट्रीय स्तर पर 233वां रैंक हासिल कर एक बार फिर से अपनी प्रतिभा को लोहा मनवाया है।
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हरियाणा में 11वें स्थान पर रहने वाली त्वीशी मई माह में सीबीएसई की ओर से घोषित 12वीं परीक्षा परिणाम में भी जिला में शिखर पर रही थीं। बारहवीं के साथ-साथ उपरोक्त परीक्षा की तैयारी में जुटी शहर की लाड़ली ने न सिर्फ इसे उत्तीर्ण किया, बल्कि देश भर में 233वां रैंक हासिल कर एक और उपलब्धि अपने नाम की।

त्वीशी का सीधा सा फंडा है कि हर काम में सफलता हासिल करने का माध्यम सिर्फ  कड़ा परिश्रम ही है। वह पहले स्वयं शेड्यूल तैयार करती है और फिर उसे अमलीजामा पहनाती है। चाहे इस शेड्यूल में सारा दिन लगे या फिर चंद घंटे।
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उसका लक्ष्य निर्धारित शेड्यूल पर काम करना है और इसी फार्मूले को अपनाकर त्वीशी ने एक बार फिर से न केवल कुरुक्षेत्र, बल्कि अपने अभिभावकों के साथ-साथ प्रदेश का नाम भी रोशन किया है। इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस का सपना संजोने वाली त्वीशी से जब सफलता हासिल करने के लिए अध्ययन का शेड्यूल पूछा तो उसने कुछ यूं कहां-सफलता मिलकर रहेगी, समझ लो संकल्प का बल, आज ही उठ कर खड़ा हो, मत कह कि करूंगा कल।
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सीबीएसई की ओर से घोषित बारहवीं के परीक्षा परिणाम में इस होनहार छात्रा 98.6 प्रतिशत अंकों के साथ जिला में पहला स्थान हासिल कर पहले भी स्कूल और अपने अभिभावकों का भी नाम रोशन कर चुकी है।

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोफेसर डा. संजय त्यागी ने बताया कि जैसे ही परिणाम का पता लगा तो त्वीशी खुशी से उछल पड़ी। बेटी का उत्कृष्ट प्रदर्शन देख पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने बताया कि उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है।

त्वीशी की सफलता के पीछे उसकी मां तोषिका का भी बहुत बड़ा त्याग है, जिन्होंने बेटी का पढ़ाई में सहयोग देने के लिए टीचर की नौकरी छोड़ दी। 10 साल तक बाल भवन पब्लिक स्कूल में बतौर टीचर काम करने के बाद त्वीशी की माता तोषिका त्यागी ने अपनी लाडली को सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाने के लिए नौकरी त्याग दी।


डॉ. संजय त्यागी ने बताया कि आकाश इंस्टीट्यूट (कोचिंग संस्थान) से त्वीशी ने दो साल तक मुफ्त कोचिंग ली है। एक पात्रता टेस्ट पास कर त्वीशी ने मेरिट लिस्ट में स्थान बनाया और फिर उसमें सफलता मिलने पर इंस्टीट्यूट ने उसे देश में कहीं भी कोचिंग लेने के लिए आमंत्रित किया, वह भी मुफ्त। इसके बाद दो साल तक त्वीशी ने छात्रवृत्ति का फायदा उठाते हुए खूब मेहनत की और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
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