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दम तोड़ रहे पेड़ और विभाग मना रहा वन महोत्सव.

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jul 2021 12:03 AM IST
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Trees dying due to negligence and the department is celebrating the Forest Festival
वन विभाग द्वारा वन महोत्सव को लेकर आज ब्रह्मसरोवर के वीवीआईपी घाट पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें पेड़ लगाने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें होंगी। मुख्यमंत्री आनलाइन संबोधित करेंगे और सभी अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इससे पहले 21 जुलाई से यहां पेड़ों को बचाने के लिए प्रतियोगिताएं भी कराई जा रही हैं। लेकिन इसी घट के बाहर निकलते ही वन विभाग की लापरवाही से कई पेड़ दम तोड़ रहे हैं। वन विभाग द्वारा पौधे लगाकर सात से आठ साल पहले उनकी सुरक्षा के लिए जो ट्री गार्ड लगाए गए थे उन्हें पौधों के पेड़ बनने के बाद भी आज तक नहीं हटाया गया। हालात ऐसे हैं कि कुछ पेड़ों में तो ट्री गार्ड खंजर की तरह घुस चुके हैं, लेकिन किसी ने आज तक इन्हें हटाने की जहमत नहीं उठाई। मामले में दिसंबर 2010 में उपायुक्त द्वारा भी कहा गया था कि वन विभाग के अधिकारियों को आदेश देकर बड़े हो चुके सभी पेड़ों से ट्री गार्ड हटवा दिए जाएंगे। डीसी के आदेशों के बाद भी ये गार्ड आज भी पेड़ों का दम घोंट रहे हैं। विभाग इनको हटाने के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहा है। हैरानी की बात है कि वन महोत्सव के उपलक्ष्य में ब्रह्मसरोवर के वीवीआईपी घाट पर जहां पेटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जा रही हैं वहीं विभाग द्वारा लोगों को पेड़ लगाकर लोगों को विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। ब्रह्मसरोवर के आस पास 50 से ज्यादा ऐसे पेड़ हैं, जिन्हें यह ट्री गार्ड कस कर जकड़े हुए हैं, जिस वजह से उनके विकास पर असर पड़ रहा है।
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ऐसा नहीं कि वन विभाग के सहित अन्य अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं है। ब्रह्मसरोवर पर पहले भी कई कार्यक्रम आयोजित होते आए हैं ऐसे में यहां प्रशासनिक अधिकारियों व वीआईपी का आना-जाना लगा रहता है, किंतु किसी का ध्यान इस ओर नहीं जाता। सिर्फ यही नहीं शहर में और भी बहुत सी जगह ट्री गार्ड पेड़ों के लिए रक्षक की जगह भक्षक बनने का काम कर रहे हैं।
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इतना ही नहीं ब्रह्मसरोवर के बाहर व शहर में कई जगह पेड़ों के नीचे कंक्रीट व टाइल्स लगाई हुई हैं, जिससे उनकी जड़ों को हवा पानी नहीं मिल पा रहा है। एनजीटी के आदेशानुसार पेड़ों के तने से कम से कम एक मीटर तक कच्ची जगह रखना जरूरी है। इस बारे ग्रीन अर्थ संस्था प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंप चुकी है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब संस्थान पेड़ हमारी विरासत नामक अभियान चलाकर खुद इन पेड़ों के नीचे कच्चा कर रही है।
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ग्रीन अर्थ संस्था के पदाधिकारी नरेश भारद्वाज ने कहा कि पौधों पर ट्री गार्ड की जरूरत तब तक है, जब तक उन्हें पशुओं से क्षति पहुंचाने का खतरा रहता है। इस खतरे की सीमा के निकल जाने के बाद इन्हें हटा दिया जाना चाहिए। इन्हें हटाकर नए लगने वाले पौधों पर लगाया जा सकता है। इससे सरकारी व्यय घटेगा, लेकिन वन विभाग एक बार जिस पौधे पर ट्री गार्ड लगा दिया फिर उसे उतारना जरूरी नहीं समझ रहा। उनकी संस्था द्वारा पशुओं से सुरक्षित होने के बाद बहुत से पेड़ पौधों को ट्री गार्ड मुक्त कराया गया है।

वन मंडल अधिकारी रविंद्र धनखड़ ने कहा कि वन विभाग नए पर्यावरण संरक्षण के लिए नए पौधे तो लगा ही रहा है। वहीं अब जो पौधे पेड़ बन चुके हैं और अभी भी उन पर ट्री गार्ड लगा हुआ है। उन सभी से ट्री गार्ड उतरवाए जाएंगे, ताकि इन पेड़ों के विकास में कोई रुकावट न आए।
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