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Kurukshetra News: पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर पर्यटकों को होंगे असम के प्रख्यात कामाख्या मंदिर के दर्शन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Dec 2023 02:19 AM IST
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Tourists will be able to visit the famous Kamakhya temple of Assam on the banks of sacred Brahmasarovar.
कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर तट अब असम की सभ्यता से लेकर इतिहास, लोक संस्कृति व पर्यटन के रंग में रंगा दिखाई देगा, जहां इस प्रदेश के खास व्यंजनों का भी पर्यटक स्वाद चख सकेंगे। यहां के बिहू व भावना नृत्य ही नहीं प्रख्यात कलाकार श्रीकृष्ण की रासलीला का भी मंचन करेंगे तो वहीं असम के महाभारतकालीन योद्धा भगदत्त की युद्ध कुशलता से भी पर्यटक रूबरू हो सकेंगे। यह मौका होगा अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के मुख्य कार्यक्रमों का। इस बार असम अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का स्टेट पार्टनर है, जिसके चलते इस प्रदेश का विशेष पवेलियन लगाया जा रहा है। इस पवेलियन का उद्घाटन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ करेंगे।
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ब्रह्मसरोवर तट पुरूषोत्तमपुरा बाग के सामने स्थापित समकालीन मूर्तियाेंं की शिल्पकला के बीच राष्ट्रीय ध्वज के ठीक नीचे ही यह पवेलियन खास तौर पर तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए असम के ही गुवाहटी व आसपास के 25 विशेष कारीगरों को बुलाया गया है, जो सात दिसंबर से यह पवेलियन तैयार कर रहे हैं। यहां तक कि पवेलियन तैयार करने में प्रयोग किए जा रहे बांस तक असम से लाए गए हैं तो वहीं प्रख्यात कला निदेशक नीलमदास व मनोजदास के निर्देशन में इसे तैयार किया जा रहा है।
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असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी शक्तिपीठ का होगा पवेलियन का लुक
देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शुमार असम के कामाख्या देवी शक्तिपीठ की लुक इस पवेलियन को दी जाएगी। उसी तर्ज पर गेट होगा तो अंदर भी पर्यटक वहीं अनुभव कर सकेंगे। यहां तक कि पवेलियन में इस शक्तिपीठ काे विस्तार से दर्शाया जाएगा। यही नहीं असम में वैष्णव संतों दामोदरदेव, माधवदेव और शंकरदेव द्वारा असमिया लोगों के लिए पेश किए नामघरों के भी यहां दर्शन होंगे। यही नहीं असम में जिस तर्ज पर श्रीमद्भगवद गीता को पूजा जाता है, उसी तर्ज पर यहां थापोना स्थापित किया जाएगा।
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महाभारत युद्ध में पांडवों से लड़ते दिखाई देंगे महान योद्धा भगदत्त
पवेलियन को इतिहास व पौराणिक कथाओं से ओतप्रोत किया जाएगा, जिसके चलते यहां महाभारत युद्ध के महान योद्धा रहे भगदत्त की युद्ध कुशलता को भी दर्शाया जाएगा। उस समय के प्राग्ज्योतिष व आधुनिक असम के राजा रहे भगदत्त महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे और बड़ी वीरता का प्रदर्शन किया था। अंत में वह और उसका हाथी सुप्रतीक, दोनों अर्जुन के हाथों मारे गए थे। उनकी युद्ध कुशलता को थर्माकॉल के जरिए चित्रित किया जाएगा।


बिहू व भावना नृत्य के साथ-साथ रासलीला
पवेलियन में असम की लोक संस्कृति की भी छटा बिखरेगी, जिसमें वहां के प्रख्यात कलाकार मुख्य तौर पर बिहू व भावना नृत्य की प्रस्तुति देंगे। यही नहीं भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का भी प्रदर्शन किया जाएगा तो वहीं पर्यटन की दृष्टि से काजीरंगा नेशनल पार्क सहित अन्य दर्शनीय स्थल भी दिखाए जाएंगे। इसी पवेलियन में असम के पीठा, लारो, पूड़ी, कोरा चावल सहित आठ प्रकार के प्रमुख व्यंजन भी होंगे, जो उसी तर्ज पर तैयार किए जाएंगे।



10 दिन में तैयार होगा पवेलियन : नीलमदास
प्रख्यात कला निदेशक नीलम दास बताते हैं कि असम प्रदेश श्रीकृष्ण व श्रीमदभगवद्गीता की विशेष पूजा के लिए भी जाना जाता है तो वहीं वहां के योद्धा भगदत्त महाभारत युद्ध में शामिल भी हुए। ऐसे में इस पवेलियन को स्टेट पार्टनर होने के चलते खासतौर पर तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए वहीं से 25 कारीगर बुलाए गए हैं।
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