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कच्ची घोड़ी के दीवाने हुए पर्यटक
Updated Thu, 17 Dec 2015 12:34 AM IST
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क्राफ्ट मेले में राजस्थानी कच्ची घोड़ी नृत्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया। कच्ची घोड़ी के साथ पर्यटक भी जमकर थिरके। बुधवार को ब्रह्मसरोवर के तट पर उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
पंजाब के गिद्दा, भांगड़े ने पर्यटकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। हिमाचल, जम्मू कश्मीर और आसाम के कलाकारों ने भी अपने-अपने प्रदेश के लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी। राजस्थान के रत्नलाल ने बताया कि वे हर साल गीता जयंती समारोह में भाग लेने के लिए आते हैं।
कच्ची घोड़ी डांस उनका पुश्तैनी काम है। यह कच्ची घोड़ी बांस की बनती है। इसके बाद उस पर कपड़ा चढ़ाया जाता है। बाद में गोटे और जरी से सजाया जाता है। आखिर में इस पर लगाम डाली जाती है। यह डांस राजस्थान के राज घरानों में विशेष उत्सवों पर होता है।
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इस नृत्य में ढोल वाला, झांझ मंजीरा और ढोल मंजीरा बजाते है। राजस्थान में लोक देवता तेजा जी की आराधना में सावन-भादों माह में भी इस लोक नृत्य को करते हैं। इसमें कुल आठ सदस्य हैं। इनमें रामफूल, बनवारी लाल, गोपाल लाल, जगदीश, पप्पू, सोजीराम आदि शामिल हैं।
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पंजाब के गिद्दा, भांगड़े ने पर्यटकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। हिमाचल, जम्मू कश्मीर और आसाम के कलाकारों ने भी अपने-अपने प्रदेश के लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी। राजस्थान के रत्नलाल ने बताया कि वे हर साल गीता जयंती समारोह में भाग लेने के लिए आते हैं।
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कच्ची घोड़ी डांस उनका पुश्तैनी काम है। यह कच्ची घोड़ी बांस की बनती है। इसके बाद उस पर कपड़ा चढ़ाया जाता है। बाद में गोटे और जरी से सजाया जाता है। आखिर में इस पर लगाम डाली जाती है। यह डांस राजस्थान के राज घरानों में विशेष उत्सवों पर होता है।
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इस नृत्य में ढोल वाला, झांझ मंजीरा और ढोल मंजीरा बजाते है। राजस्थान में लोक देवता तेजा जी की आराधना में सावन-भादों माह में भी इस लोक नृत्य को करते हैं। इसमें कुल आठ सदस्य हैं। इनमें रामफूल, बनवारी लाल, गोपाल लाल, जगदीश, पप्पू, सोजीराम आदि शामिल हैं।