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Kurukshetra News: मूसलाधार बारिश ने तोड़ा 40 सालों का रिकॉर्ड, चारों तरफ पानी
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फोटो 39 व 40
- 242 एमएम दर्ज की गई बारिश
- सड़कों पर पानी, कई गांवों का टूटा संपर्क
संवाद न्यूज एजेंसी
इस्माईलाबाद। मूसलाधार बरसात ने क्षेत्र में 40 वर्षों से भी ज्यादा का रिकार्ड तोड़ दिया है। 24 घंटे के दौरान सुबह आठ बजे तक 242 एमएम बरसात दर्ज की गई। लगातार भारी बारिश के चलते शहर की कई सड़कें खस्ताहाल हो गई तो वहीं कई गांवों से संपर्क भी टूट गया है। काठगढ़ रोड़, ठसका रोड, फिरनी पर जलभराव के कारण लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। खासकर ठसका रोड पर स्थित राइस मिलों व मकानों में बरसाती पानी ने घुसकर लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया है। वहीं शहर के कई मकानों के भीतर पानी घुसने व छतों के टपकने से लोगों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ठसका मीरांजी रोड व आसपास के खेतों में जमा बरसाती पानी से बाढ़ सी स्थिति बनी हुई है।
हालांकि सोमवार देर सायं बरसात रुकने से जलस्तर कम होने लगा है। बरसात के कारण शहर में कई संस्थानों की दीवारें ढह गई। वहीं हाईवे पर कई स्थानों पर सड़क धसने से यातायात भी बाधित हो गया। हालांकि बाद में इस पर रोड़ा आदि डाला गया, लेकिन हैवी वाहनों को इसके ऊपर जाने से मना किया गया है। इसको लेकर अवरोध खड़े किए गए हैं।
खतरे से पांच फुट ऊपर मारकंडा का पानी, तटबंध को किया ठीक
मारकंडा नदी में उफान जोरों पर है। इस समय भी नदी में पानी खतरे के निशान से पांच फुट ऊपर चल रहा है। मारकंडा नदी में जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। वहीं गांव नैसी के निकट टूटे तटबंध को ठीक करने के लिए नहरी विभाग के साथ साथ ग्रामीण भी आगे आए और बरसात में भी जुटे रहे। खेतों में घुसे मारकंडा नदी के पानी से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। कई स्थानों पर पांच से छह फुट तक पानी जमा है। नैसी के आसपास के डेरे पानी में डूबे हुए हैं। इन डेरों को पुलिस की मदद से खाली कराकर उनमें रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है।
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वहीं नहरी विभाग के गेज रीडर योगेंद्र कुमार ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण मारकंडा नदी में पानी बढ़ने की आशंका है। इस समय भी नदी में खतरे के निशान से पांच फुट ऊपर पानी बह रहा है। उन्होंने कहा कि मारकंडा नदी के पानी पर नजर रखी जा रही है। लगातार पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित कालाअम्ब आदि क्षेत्रों में स्थापित कंट्रोल रूम से संपर्क बनाया हुआ है। इसके अलावा कमजोर तटबंधों की मजबूती के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
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- 242 एमएम दर्ज की गई बारिश
- सड़कों पर पानी, कई गांवों का टूटा संपर्क
संवाद न्यूज एजेंसी
इस्माईलाबाद। मूसलाधार बरसात ने क्षेत्र में 40 वर्षों से भी ज्यादा का रिकार्ड तोड़ दिया है। 24 घंटे के दौरान सुबह आठ बजे तक 242 एमएम बरसात दर्ज की गई। लगातार भारी बारिश के चलते शहर की कई सड़कें खस्ताहाल हो गई तो वहीं कई गांवों से संपर्क भी टूट गया है। काठगढ़ रोड़, ठसका रोड, फिरनी पर जलभराव के कारण लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। खासकर ठसका रोड पर स्थित राइस मिलों व मकानों में बरसाती पानी ने घुसकर लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया है। वहीं शहर के कई मकानों के भीतर पानी घुसने व छतों के टपकने से लोगों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ठसका मीरांजी रोड व आसपास के खेतों में जमा बरसाती पानी से बाढ़ सी स्थिति बनी हुई है।
हालांकि सोमवार देर सायं बरसात रुकने से जलस्तर कम होने लगा है। बरसात के कारण शहर में कई संस्थानों की दीवारें ढह गई। वहीं हाईवे पर कई स्थानों पर सड़क धसने से यातायात भी बाधित हो गया। हालांकि बाद में इस पर रोड़ा आदि डाला गया, लेकिन हैवी वाहनों को इसके ऊपर जाने से मना किया गया है। इसको लेकर अवरोध खड़े किए गए हैं।
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खतरे से पांच फुट ऊपर मारकंडा का पानी, तटबंध को किया ठीक
मारकंडा नदी में उफान जोरों पर है। इस समय भी नदी में पानी खतरे के निशान से पांच फुट ऊपर चल रहा है। मारकंडा नदी में जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। वहीं गांव नैसी के निकट टूटे तटबंध को ठीक करने के लिए नहरी विभाग के साथ साथ ग्रामीण भी आगे आए और बरसात में भी जुटे रहे। खेतों में घुसे मारकंडा नदी के पानी से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। कई स्थानों पर पांच से छह फुट तक पानी जमा है। नैसी के आसपास के डेरे पानी में डूबे हुए हैं। इन डेरों को पुलिस की मदद से खाली कराकर उनमें रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है।
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वहीं नहरी विभाग के गेज रीडर योगेंद्र कुमार ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण मारकंडा नदी में पानी बढ़ने की आशंका है। इस समय भी नदी में खतरे के निशान से पांच फुट ऊपर पानी बह रहा है। उन्होंने कहा कि मारकंडा नदी के पानी पर नजर रखी जा रही है। लगातार पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित कालाअम्ब आदि क्षेत्रों में स्थापित कंट्रोल रूम से संपर्क बनाया हुआ है। इसके अलावा कमजोर तटबंधों की मजबूती के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।