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Kurukshetra News: राजा बलि का अहंकार तोड़ने के लिए भगवान ने धारण किया था वामन अवतार
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कुरुक्षेत्र। झांसा रोड स्थित एन्क्लेव में कथा के दौरान मंच पर आशीर्वाद लेने पहुंचे श्रद्धालु।
कुरुक्षेत्र। गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में झांसा रोड स्थित एन्क्लेव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रवचन किए गए। भागवत प्रवक्ता कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि भगवान विष्णु ने सतयुग में अपना पांचवां अवतार वामन का लिया था।
भगवान वामन ॠषि कश्यप तथा उनकी पत्नी अदिति के पुत्र थे। भागवत कथा सुनने वाला मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है। भागवत कथा का ज्ञान मनुष्य को मिलते रहना चाहिए, जिससे समाज सद्मार्ग के रास्ते पर चले। शास्त्री ने कहा कि राजा बलि ने इंद्र का देवलोक हड़प लिया था। इंद्र को देवलोक पर अधिकार दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। भगवान वामन एक बौने ब्राह्मण के वेश में राजा बलि के पास गए। भगवान वामन ने बलि से अपने रहने के लिए तीन पग भूमि मांगी। गुरु शुक्राचार्य ने बलि को दान देने से रोका और चेताया कि ये कोई साधारण ब्राह्मण नहीं है। यह स्वयं भगवान विष्णु हैं। राजा बलि को पता लगा कि भगवान स्वयं उसके द्वार पर आए हैं, उसने भगवान वामन को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया इसके बाद भगवान वामन ने अपना विशाल स्वरूप धारण कर लिया।
पहले पग में पूरा भूलोक (पृथ्वी) और दूसरे में देवलोक नाप लिया। तीसरे कदम के लिए कोई भूमि नहीं बची तो बलि ने अपने वचन एवं धर्म पथ पर अड़िग रहकर तीसरे पग के लिए अपना सिर सामने करके स्वयं अपने को समर्पित कर दिया। भगवान वामन बलि की वचनबद्धता से प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे पाताल लोक देने का निश्चय किया। उन्होंने तीसरा पग बलि के सिर पर रखा, जिससे वह पाताल लोक में पहुंच गए।
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भगवान वामन ॠषि कश्यप तथा उनकी पत्नी अदिति के पुत्र थे। भागवत कथा सुनने वाला मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है। भागवत कथा का ज्ञान मनुष्य को मिलते रहना चाहिए, जिससे समाज सद्मार्ग के रास्ते पर चले। शास्त्री ने कहा कि राजा बलि ने इंद्र का देवलोक हड़प लिया था। इंद्र को देवलोक पर अधिकार दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। भगवान वामन एक बौने ब्राह्मण के वेश में राजा बलि के पास गए। भगवान वामन ने बलि से अपने रहने के लिए तीन पग भूमि मांगी। गुरु शुक्राचार्य ने बलि को दान देने से रोका और चेताया कि ये कोई साधारण ब्राह्मण नहीं है। यह स्वयं भगवान विष्णु हैं। राजा बलि को पता लगा कि भगवान स्वयं उसके द्वार पर आए हैं, उसने भगवान वामन को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया इसके बाद भगवान वामन ने अपना विशाल स्वरूप धारण कर लिया।
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पहले पग में पूरा भूलोक (पृथ्वी) और दूसरे में देवलोक नाप लिया। तीसरे कदम के लिए कोई भूमि नहीं बची तो बलि ने अपने वचन एवं धर्म पथ पर अड़िग रहकर तीसरे पग के लिए अपना सिर सामने करके स्वयं अपने को समर्पित कर दिया। भगवान वामन बलि की वचनबद्धता से प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे पाताल लोक देने का निश्चय किया। उन्होंने तीसरा पग बलि के सिर पर रखा, जिससे वह पाताल लोक में पहुंच गए।
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