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कमाल की हिम्मत: कुरुक्षेत्र में थर्ड जेंडर ने मुख्य धारा में जुड़ने का किया सार्थक प्रयास, खुद बना रहे उत्पाद
Tue, 03 Dec 2024 05:17 PM IST
नवीन दलाल
सेवा सिंह, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
सेवा सिंह, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Tue, 03 Dec 2024 05:17 PM IST
सार
कैफ का कहना है कि शुरुआती दौर में उन्हें अपना व्यवसाय शुरु करने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा। वे 20 वर्ष की थी जब से उन्होंने अपना खुद का कार्य करने की ठानी तथा पहली बार कपड़ों के बैग में छुपाकर दौलतपुर में लगे मेले में सामान लेकर गई थी
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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव
- फोटो : संवाद
विस्तार
सम्मानपूर्वक जिंदगी बिताने की ठानी तो विपरीत परिस्थितियां भी छोटी पड़ने लगी। न केवल अपना रोजगार शुरू किया बल्कि समाज की मुख्यधारा में भी खड़े दिखाई देने लगे। महज कुछ खिलौनों से की गई शुरूआत आज लाखों के कारोबार तक पहुंच चुकी है। घर से लेकर समाज तक सम्मान बढ़ा तो खुद पर गर्व भी महसूस होने लगा।
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यह किसी सफल उद्यमी की नहीं बल्कि समाज में अलग ही नजर से देखे जाने वाले थर्ड जैंडर से जुड़ी कैफ के संघर्ष की कहानी है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रह्मसरोवर तट पर हस्तनिर्मित घरेलू और सजावटी सामान की स्टाॅल लगाई है। उनके साथ उनकी साथी महक भी सहयोग कर रही हैं।
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आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी कैफ इस महोत्सव में समाज में बदलाव लाने और आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा भी बनी हुई है, हर कोई उनके हौसले और कारीगरी को भी पसंद कर रहा है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों और समाज के संकीर्ण दृष्टिकोण के बावजूद आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना तथा समाज में नई सोच का उदाहरण पेश किया।
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कैफ बताती है कि पिछले 25 वर्षों से अपने जीवन में कड़ा संघर्ष कर रही हैं। शुरुआती दिनों में, उन्हें समाज की गलत नजरों और तिरस्कार का सामना भी करना पड़ा तो कई बार उन पर चोरी के आरोप भी लगे। उनकी संघर्ष यात्रा इतनी कठिन थी कि अपने उत्पादों को छुपाकर ले जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनका कहना है कि अब वे भिक्षा मांग कर अपना जीवन चलाने वाली नहीं है और न ही किसी पर निर्भर है। अपने दम परने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, उनकी पांच बहनें हैं, जिसमें से तीन शादीशुदा हैं और पिता को पैरालाइज होने के बाद परिवार की जिम्मेदारी भी संभाल रही है। अब दो और बहनों की शादी की तैयारी में लगी है। यहीं नहीं वे अपने साथ दूसरे थ्रड जेंडर को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत है, ताकि वे भी सम्मान से जिंदगी जी सके।
मुख्यधारा से जुड़ने का मिलने लगा सम्मान
कैफ का कहना है कि समाज की मुख्यधारा से जुड़ने से उन्हें न केवल आत्मसम्मान मिला है, बल्कि लोग भी उन्हें अब आदर से देखने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे समुदाय के लोग भी मेहनत और हुनर से अपनी जिंदगी संवार सकते हैं, लेकिन अभी जरूरत है समाज के सकारात्मक दृष्टिकोण की। उन्होंने बताया कि उन्हें भिक्षा व बधाई लेना पसंद नहीं था, जिस कारण अपना काम करना शुरु किया, जिसके बाद बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा। बस और ट्रेन में सामान लेकर जाते हुए भी पुलिस और लोग चोरी के सामान की दृष्टि से देखते हैं।
पहली बार कपड़ों के बैग में सामान छुपाकर दौलतपुर लेकर गई
कैफ का कहना है कि शुरुआती दौर में उन्हें अपना व्यवसाय शुरु करने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा। वे 20 वर्ष की थी जब से उन्होंने अपना खुद का कार्य करने की ठानी तथा पहली बार कपड़ों के बैग में छुपाकर दौलतपुर में लगे मेले में सामान लेकर गई थी, जहां दुकान लगाने के लिए पैसे मांगे गए। लेकिन उन्होंने बाहर ही अपना सामान बेचा तथा छह हजार रुपये की बिक्र की, जिसके बाद अलग-अलग जगह हरियाणा और पंजाब के मेलों में अपनी दुकान लगाती हैं। इसके बाद वे ऋषिकेश, हरिद्वार सहित अन्य बाजारों में अपना सामान सप्लाई करती हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले 15 सालों से ब्रह्मसरोवर के तट पर दुकान लगा रही हैं। खुद का कार्य करने के बाद लोग सम्मान की दृष्टि से देखते हैं कि अच्छा कार्य कर रहे हैं।