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Kurukshetra News: डेढ़ माह से स्कूलों में आटा खत्म, विद्यार्थी चावल से बने व्यंजन खाने पर मजबूर
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कुरुक्षेत्र। करीब डेढ़ माह से जिले के स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत आटा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिस कारण विद्यार्थी चावल आधारित भोजन खाने को मजबूर हो रहे हैं, जोकि विभाग द्वारा निर्धारित मेन्यू के मुताबिक नहीं है। मिड-डे मील का उद्देश्य बच्चों को पोषणयुक्त और संतुलित आहार उपलब्ध कराना है, लेकिन आटे की अनुपलब्धता से यह योजना पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
जिले के शाहाबाद और बाबैन खंड के स्कूलों में ही भोजन तैयार किया जाता है, जहां ज्यादातर स्कूलों में करीब डेढ़ माह से आटा खत्म हो चुका है। स्कूलों के द्वारा इसकी मांग भी भेजी जा चुकी है, मगर अभी तक भी इसका वितरण स्कूलों में नहीं हो सका है। अध्यापकों के लिए हर रोज मेन्यू के मुताबिक भोजन तैयार कराना मुश्किल हो गया है। आटा उपलब्ध न होने से स्कूलों में व्यवस्था डगमगा रही है। आटे से बनने वाले अन्य खाद्य पदार्थ मिड-डे मील में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
ऐसे में शिक्षकों के लिए भी मेन्यू के मुताबिक भोजन तैयार कराना चुनौती बन चुकी है। कई स्कूलों में शिक्षक अपने वेतन से आटा खरीदने को मजबूर हो रहे हैं तो कहीं शिक्षकों को उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है। मिड डे मील योजना सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अच्छे पोषण के लिए शुरू की गई, जिसको लेकर समय- समय पर विभाग की ओर से इसमें सुधार भी किए गए और बच्चों के अच्छे पोषण के लिए विभिन्न मेन्यू भी शामिल की गई लेकिन इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं। बच्चों को मेन्यू के मुताबिक भोजन दे पाना विभाग के लिए चुनौती बन चुका है।
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जल्द स्कूलों में होगी आटे की सप्लाई : विनोद
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने बताया कि चावल की सप्लाई स्कूलों में कर दी गई है। हैफेड से आटे की डिमांड की गई थी। मिड-डे मील योजना के तहत उपयोग होने वाले आटे के सैंपलिंग ली गई है। जांच प्रक्रिया पूरी होने पर जल्द ही स्कूलों में आटे की सप्लाई कर दी जाएगी।
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जिले के शाहाबाद और बाबैन खंड के स्कूलों में ही भोजन तैयार किया जाता है, जहां ज्यादातर स्कूलों में करीब डेढ़ माह से आटा खत्म हो चुका है। स्कूलों के द्वारा इसकी मांग भी भेजी जा चुकी है, मगर अभी तक भी इसका वितरण स्कूलों में नहीं हो सका है। अध्यापकों के लिए हर रोज मेन्यू के मुताबिक भोजन तैयार कराना मुश्किल हो गया है। आटा उपलब्ध न होने से स्कूलों में व्यवस्था डगमगा रही है। आटे से बनने वाले अन्य खाद्य पदार्थ मिड-डे मील में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
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ऐसे में शिक्षकों के लिए भी मेन्यू के मुताबिक भोजन तैयार कराना चुनौती बन चुकी है। कई स्कूलों में शिक्षक अपने वेतन से आटा खरीदने को मजबूर हो रहे हैं तो कहीं शिक्षकों को उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है। मिड डे मील योजना सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अच्छे पोषण के लिए शुरू की गई, जिसको लेकर समय- समय पर विभाग की ओर से इसमें सुधार भी किए गए और बच्चों के अच्छे पोषण के लिए विभिन्न मेन्यू भी शामिल की गई लेकिन इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं। बच्चों को मेन्यू के मुताबिक भोजन दे पाना विभाग के लिए चुनौती बन चुका है।
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जल्द स्कूलों में होगी आटे की सप्लाई : विनोद
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने बताया कि चावल की सप्लाई स्कूलों में कर दी गई है। हैफेड से आटे की डिमांड की गई थी। मिड-डे मील योजना के तहत उपयोग होने वाले आटे के सैंपलिंग ली गई है। जांच प्रक्रिया पूरी होने पर जल्द ही स्कूलों में आटे की सप्लाई कर दी जाएगी।