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Kurukshetra News: श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के लिए बना असमंजस, 15 को माना जा रहा शास्त्र सम्मत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 13 Aug 2025 12:58 AM IST
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There is confusion regarding Shri Krishna Janmashtami fast, 15th is considered as per scriptures
कुरुक्षेत्र। जन्माष्टमी व्रत की व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। बाजार से लेकर घरों तक इस पर्व की धूम दिखाई देने लगी है। इसी बीच इस पर्व पर रखे जाने वाले व्रत के लिए लोगों में असमंजस बना हुआ है। व्रत 15 को रखें या 16 को, श्रद्धालुओं में यह चर्चा का विषय बना हुआ है जबकि सभी पंचांगकारों ने जन्माष्टमी का व्रत 15 को मनाना शास्त्र सम्मत बताया है।
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भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को जन्माष्टमी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र पर हुआ था। हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र पर कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। हर साल इस पावन दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
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मनाया जाएगा श्री कृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव
ज्योतिषाचार्य पंडित बलराज बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस साल जन्माष्टमी की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार 15 की रात 11:49 बजे अष्टमी तिथि शुरू हो रही है और इसका समापन 16 को रात्रि 9:24 बजे होगी। वहीं, रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 17 को सुबह चार बजकर 38 मिनट पर होगा। इस साल अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का मिलन ही नहीं हो रहा है। जिस वजह से भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
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ज्योतिषाचार्य रामराज कौशिक के मुताबिक वैष्णव संप्रदाय के अनुसार निर्धारित जन्माष्टमी के दिन ही तथा श्री कृष्ण जन्मस्थली मथुरा को आधार मानकर मनाए जाने वाली श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन ही केंद्रीय सरकार अवकाश की घोषणा करती है। श्रीमद् भागवत, भविष्य पुराण, अग्नि पुराण, विष्णु आदि पुराणों संहिताओं एवं व्रत उत्सव निर्णायक जैसे ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का अवतार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि बुधवार रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि चंद्रमा कालीन अर्ध रात्रि के समय हुआ था। ऋषि व्यास नारद आदि ऋषियों के मत अनुसार भी सप्तमीयुता अष्टमी ही व्रत पूजन आदि हेतु ग्रहण करनी चाहिए।
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