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कुरुक्षेत्र: गुरुद्वारा प्रबंधन संभालने के लिए कमेटियों के बीच टकराव की आशंका

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Feb 2023 02:13 AM IST
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There is a possibility of conflict between the committees to take over the management of the Gurdwara.
कुरुक्षेत्र। गुरुघरों के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर प्रदेश सरकार द्वारा मनोनीत की गई एचएसजीपीसी व सिख नेता जगदीश सिंह झींडा द्वारा बनाई गई कमेटी अलग- अलग राह पर चल पड़ी है, जिससे दोनों के बीच टकराव की आशंका भी बढ़ गई है। मनोनीत कमेटी ने गुरघरों के संचालन के लिए हलचल शुरू कर दी है, वहीं जगदीश सिंह झींडा ने भी एलान कर दिया है कि वे धक्काशाही नहीं होने देंगे। झींडा एचएसजीपीसी के पूर्व एडहॉक प्रधान रह चुके हैं।
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शनिवार को जगदीश सिंह झींडा ने गुरुद्वारा छठी पातशाही में अपनी कमेटी की आपात बैठक बुलाई, जिसमें वर्तमान हालात पर खुलकर चर्चा की गई। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में झींडा ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा मनोनीत कमेटी कानून व हरियाणा गुरुद्वारा सिख एक्ट को दरकिनार कर गुरुघरों का प्रबंधन हथियाना चाहती है।
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इसी मंशा के चलते शुक्रवार को अंबाला में मनोनीत कमेटी के प्रधान कई सदस्यों के साथ डीसी कार्यालय पहुंचे थे, जहां मंजी साहिब गुरुद्वारा के मैनेजर को बुलाया गया और उस पर सहमति से प्रबंधन कमेटी को सौंपने का दबाव बनाया गया। हालांकि मैनेजर ने इससे इनकार कर दिया, लेकिन मनोनीत कमेटी का यह प्रयास बेहद निंदनीय है। झींडा ने कहा कि आज तक के इतिहास में कभी नहीं हुआ कि गुरुघर का प्रबंधन प्रशासन के दबाव में लिया गया हो। पहले नोटिस देना चाहिए और फिर गुरुघर पहुंचकर ही प्रबंधन संभालना चाहिए।
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लेकिन इस कमेटी की ऐसी मनमानी नहीं चलने देंगे। महंत करमजीत सिंह जहां भी इस तरह से प्रबंधन हथियाने का प्रयास करेंगे, संगत के साथ मिलकर वे इसका कड़ा विरोध करेंगे। इस तरह किसी भी गुरुघर का प्रबंधन नहीं लेने दिया जाएगा। उधर, झींडा ने कहा कि उन्होंने प्रदेश में निकाली जाने वाली यात्रा फिलहाल स्थगित कर दी है।


सरकार के इशारे पर चल रही कमेटी
झींडा ने आरोप लगाया कि मनोनीत कमेटी सरकार के इशारे पर चल रही है। सरकार की मंशा सिखों को दो फाड़ करने की है। मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने गुरुघरों के संचालन में दखल देने से इनकार कर दिया था, लेकिन वर्तमान सरकार गुल्लकों का मुंह अपनी ओर करने पर तुली है। झींडा ने कहा कि वे सिखों को एकजुट करना चाहते थे और महंत करमजीत के पाले में गेंद डाल दी थी। तय हुआ था कि दोनों कमेटी के सदस्यों को पूरा सम्मान मिलेगा और कोई तनाव नहीं होने देंगे, लेकिन महंत करमजीत ने वादाखिलाफी की है। अब उनसे गुरुद्वारा प्रबंधन को लेकर कोई भाईचारा नहीं रहा।



गुप्त तरीके से डीसी के पास पहुंचे महंत
सरकार द्वारा मनोनीत कमेटी के प्रधान महंत करमजीत सिंह शनिवार को डीसी शांतनु शर्मा के पास पहुंचे। उनके साथ महासचिव गुरविंद्र सिंह धमीजा, बीबी रविंद्र कौर, कंवलजीत अजराना, विनर सिंह व गगनदीप सिंह सहित अन्य सदस्य भी थे। डीसी के साथ गुप्त बैठक हुई, जिसकी किसी को भनक तक नहीं लगने दी गई। चर्चा है कि गुरुघरों का प्रबंधन संभालने को लेकर ही चर्चा की गई है।
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