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Kurukshetra News: श्रोताओं को सुनाई राजा परीक्षित और कलियुग की कथा
Fri, 22 Aug 2025 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 22 Aug 2025 12:53 AM IST
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कुरुक्षेत्र। श्रद्धालुओं के साथ मौजूद कथावाचक अनिल शास्त्री। विज्ञप्ति
- फोटो : mathura
कुरुक्षेत्र। श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित सेक्टर-5 श्री शिव शक्ति मंदिर परिसर में श्रीमद्भगवद कथा जारी रही। वीरवार को कथावाचक अनिल शास्त्री ने उपस्थित श्रोताओं को राजा परीक्षित की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि इसमें राजा परीक्षित, बैल रूप में धर्म, गाय रूप में पृथ्वी और कलियुग के बीच का संवाद बताया गया है। यह कथा सामाजिक, नैतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि धर्म और पृथ्वी का प्रतीकात्मक महत्व है। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा करना ही सच्चा राजधर्म है और अधर्म के प्रभाव को सीमित करना आवश्यक है। धन के मोह में पड़कर व्यक्ति अधर्म के मार्ग पर जा सकता है।
कलियुग में भी संयम, सदाचार और भक्ति से जीवन को पवित्र रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि कथा हमें सिखाती है कि कलियुग में रहते हुए भी व्यक्ति धर्म, सत्य और संयम के रास्ते पर चल सकता है। अधर्म के स्थलों (जुआ, शराब, वेश्यावृत्ति, हिंसा, लालच) से दूरी बनाए रखना ही इस युग में धर्म की रक्षा का मार्ग है।
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उन्होंने कहा कि इसमें राजा परीक्षित, बैल रूप में धर्म, गाय रूप में पृथ्वी और कलियुग के बीच का संवाद बताया गया है। यह कथा सामाजिक, नैतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि धर्म और पृथ्वी का प्रतीकात्मक महत्व है। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा करना ही सच्चा राजधर्म है और अधर्म के प्रभाव को सीमित करना आवश्यक है। धन के मोह में पड़कर व्यक्ति अधर्म के मार्ग पर जा सकता है।
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कलियुग में भी संयम, सदाचार और भक्ति से जीवन को पवित्र रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि कथा हमें सिखाती है कि कलियुग में रहते हुए भी व्यक्ति धर्म, सत्य और संयम के रास्ते पर चल सकता है। अधर्म के स्थलों (जुआ, शराब, वेश्यावृत्ति, हिंसा, लालच) से दूरी बनाए रखना ही इस युग में धर्म की रक्षा का मार्ग है।
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