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पंचायतों में शैक्षणिक योग्यता ने बिगाड़े गणित
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 11 Sep 2015 12:51 AM IST
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खंड के 64 गांवों में से 63 गांवों में ही ग्राम पंचायत का चुनाव होगा। एक ग्राम पंचायत समालखा में कार्यकाल पूरा न होने के कारण चुनाव नहीं होगा।
खंड लाडवा के करीब 33 फीसदी गांवों की पंचायतों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। खंड में 21 ग्राम पंचायतों में सामान्य और अनुसूचित जाति की महिलाओं के हाथ में सरपंची की कमान होगी।
इनमें से चार पंचायतें अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। अन्य पंचायतों में भी महिलाएं मैदान में उतर सकती हैं।
पंचायती चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण के बाद प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक योग्यता लागू कर दी है। इससे युवा महिलाओं के लिए राजनीति में अच्छे दिनों की शुरुआत माना जा रहा है। पंचायती चुनावों में नए नियमों के चलते ज्यादातर युवा महिलाएं ही चुनावी अखाड़े में उतर सकती हैं।
महिला आरक्षित पंचायतों में बुजुर्ग महिला के अनपढ़ होने या कम शैक्षणिक योग्यता होने के चलते चुनाव लड़ने के इच्छुक परिवारों के सारे समीकरण ही गड़बड़ा गए हैं। इससे ज्यादातर पंचायतों में बहुएं और बेटियां ही गांव के राजनीतिक परिवारों की नैया पार लगाएंगी।
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इस खंड में अभी तक महिलाओं के लिए आरक्षित ग्राम पंचायतों में विवाहित महिलाएं ही चुनाव लड़ती आई हैं। इस बार ऐसा हो सकता है कि परिवार की पढ़ी-लिखी अविवाहित बेटी ही चुनाव मैदान में उतर जाए। महिला आरक्षित पंचायतों में जिन परिवारों में पर्याप्त योग्यता की बहू-बेटियां नहीं हैं, उनके लिए चुनावी सफर मुश्किल हो गया है।
खंड में महिलाओं के लिए बोड़ला, लौहरा, संभालखा, गादली, अंटेड़ी, सुल्तानपुर, खरकाली, हलालपुर, लाठी धनौरा, बपदी, सूरा, बड़शामी, बहादुरपुरा, शहजादपुर, मुकरपुर, खैरी, मुरादनगर आरक्षित हैं। इसके अलावा अनुसूचित महिलाओं के लिए बन, कालीरोनो, गुढ़ी व दबखेड़ा पंचायतों को आरक्षित किया गया है।
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खंड लाडवा के करीब 33 फीसदी गांवों की पंचायतों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। खंड में 21 ग्राम पंचायतों में सामान्य और अनुसूचित जाति की महिलाओं के हाथ में सरपंची की कमान होगी।
इनमें से चार पंचायतें अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। अन्य पंचायतों में भी महिलाएं मैदान में उतर सकती हैं।
पंचायती चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण के बाद प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक योग्यता लागू कर दी है। इससे युवा महिलाओं के लिए राजनीति में अच्छे दिनों की शुरुआत माना जा रहा है। पंचायती चुनावों में नए नियमों के चलते ज्यादातर युवा महिलाएं ही चुनावी अखाड़े में उतर सकती हैं।
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महिला आरक्षित पंचायतों में बुजुर्ग महिला के अनपढ़ होने या कम शैक्षणिक योग्यता होने के चलते चुनाव लड़ने के इच्छुक परिवारों के सारे समीकरण ही गड़बड़ा गए हैं। इससे ज्यादातर पंचायतों में बहुएं और बेटियां ही गांव के राजनीतिक परिवारों की नैया पार लगाएंगी।
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इस खंड में अभी तक महिलाओं के लिए आरक्षित ग्राम पंचायतों में विवाहित महिलाएं ही चुनाव लड़ती आई हैं। इस बार ऐसा हो सकता है कि परिवार की पढ़ी-लिखी अविवाहित बेटी ही चुनाव मैदान में उतर जाए। महिला आरक्षित पंचायतों में जिन परिवारों में पर्याप्त योग्यता की बहू-बेटियां नहीं हैं, उनके लिए चुनावी सफर मुश्किल हो गया है।
खंड में महिलाओं के लिए बोड़ला, लौहरा, संभालखा, गादली, अंटेड़ी, सुल्तानपुर, खरकाली, हलालपुर, लाठी धनौरा, बपदी, सूरा, बड़शामी, बहादुरपुरा, शहजादपुर, मुकरपुर, खैरी, मुरादनगर आरक्षित हैं। इसके अलावा अनुसूचित महिलाओं के लिए बन, कालीरोनो, गुढ़ी व दबखेड़ा पंचायतों को आरक्षित किया गया है।