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छठे पातशाह ने धर्म और न्याय की रक्षा का संदेश दिया : सिंह
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शाहाबाद। मीरी-पीरी के मालिक छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी महाराज के गुरता गद्दी दिवस को समर्पित रात्रि दीवान गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार में सजाए गए। संगत ने बानी गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर श्रद्धा और उत्साह से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
समागम में हजूरी रागी भाई पवनदीप सिंह जत्था और भाई गुरजोत सिंह जत्था ने गुरबाणी कीर्तन कर संगत को निहाल किया। जत्थों ने गुरु साहिब के शौर्य, आध्यात्मिक नेतृत्व और मीरी-पीरी की परंपरा की महत्ता पर आधारित शब्द प्रस्तुत किए। तत्पश्चात श्री सहज पाठ सेवा सोसायटी के प्रचारक भाई राजपाल सिंह ने संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा।
उन्होंने गुरु हरगोबिंद साहिब जी के द्वारा स्थापित दोहरी सत्ता मीरी (सांसारिक सत्ता) और पीरी (आध्यात्मिक सत्ता) की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गुरु साहिब ने एक हाथ में तलवार और दूसरे में रोशनाई रखकर धर्म और न्याय की रक्षा का संदेश दिया। गुरु साहिब ने अकाल तख्त साहिब की स्थापना कर सिख पंथ को संगठित और सशक्त रूप प्रदान किया। संगत ने भावपूर्ण वातावरण में बैठकर गुरु साहिब के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा ली। संवाद
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समागम में हजूरी रागी भाई पवनदीप सिंह जत्था और भाई गुरजोत सिंह जत्था ने गुरबाणी कीर्तन कर संगत को निहाल किया। जत्थों ने गुरु साहिब के शौर्य, आध्यात्मिक नेतृत्व और मीरी-पीरी की परंपरा की महत्ता पर आधारित शब्द प्रस्तुत किए। तत्पश्चात श्री सहज पाठ सेवा सोसायटी के प्रचारक भाई राजपाल सिंह ने संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा।
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उन्होंने गुरु हरगोबिंद साहिब जी के द्वारा स्थापित दोहरी सत्ता मीरी (सांसारिक सत्ता) और पीरी (आध्यात्मिक सत्ता) की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गुरु साहिब ने एक हाथ में तलवार और दूसरे में रोशनाई रखकर धर्म और न्याय की रक्षा का संदेश दिया। गुरु साहिब ने अकाल तख्त साहिब की स्थापना कर सिख पंथ को संगठित और सशक्त रूप प्रदान किया। संगत ने भावपूर्ण वातावरण में बैठकर गुरु साहिब के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा ली। संवाद
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