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Kurukshetra News: कुचामणि ख्याल शैली में वीर तेजा जी के बलिदान का मंचन, दर्शक भावुक
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कुरुक्षेत्र। भरतमुनि रंगशाला में कुचामणि ख्याल लोक नाट्य समिति नागौर कलाकारों को सम्मानित करते
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज ने पंचजन्य नाट्य समारोह का आयोजन किया। इसके चौथे दिन कला कीर्ति भवन में वीर तेजा जी की महानता नाटक का मंचन हुआ। कुचामणि ख्याल लोक नाट्य समिति नागौर के कलाकारों ने इसे जीवंत किया।
यह नाटक राजस्थान के लोक देवता वीर तेजा जी के जीवन और उनके सर्वोच्च बलिदान को दर्शाता है। कलाकारों ने दिखाया कि कैसे तेजा जी ने लाछां गूजरी की गायों को डाकुओं से बचाया। गायों की रक्षा करते समय उन्हें बाषक नाग मिले। तेजा जी ने नाग देवता को वचन दिया कि वह गायों को मुक्त कराकर वापस आएंगे। युद्ध में घायल होने के बावजूद तेजा जी अपना वचन निभाने नाग देवता के पास लौटे। नाग ने उनके शरीर पर घाव देखे और डसने की जगह नहीं मिली। तब वीर तेजा जी ने अपनी जीभ आगे कर दी। नाग के डसने से धर्म की रक्षा करते हुए उनका प्राणांत हो गया।
नाटक का संदेश और प्रभाव
इस लोक गाथा ने सत्य, साहस और जीव-दया का महत्वपूर्ण संदेश दिया। कलाकारों ने दर्शकों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। आंबा लाल नांदला ने नाटक का लेखन किया और दयाराम भांड ने निर्देशन किया। केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने युवाओं को जड़ों से जोड़ने के लिए ऐसे पारंपरिक नाटकों को आवश्यक बताया। इस अवसर पर प्रमोद कौशिक, डॉ. ममता सचदेवा, राजीव, सुनीता, शालू यादव, कृष्ण पांचाल, महेश जोशी और विकास शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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यह नाटक राजस्थान के लोक देवता वीर तेजा जी के जीवन और उनके सर्वोच्च बलिदान को दर्शाता है। कलाकारों ने दिखाया कि कैसे तेजा जी ने लाछां गूजरी की गायों को डाकुओं से बचाया। गायों की रक्षा करते समय उन्हें बाषक नाग मिले। तेजा जी ने नाग देवता को वचन दिया कि वह गायों को मुक्त कराकर वापस आएंगे। युद्ध में घायल होने के बावजूद तेजा जी अपना वचन निभाने नाग देवता के पास लौटे। नाग ने उनके शरीर पर घाव देखे और डसने की जगह नहीं मिली। तब वीर तेजा जी ने अपनी जीभ आगे कर दी। नाग के डसने से धर्म की रक्षा करते हुए उनका प्राणांत हो गया।
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नाटक का संदेश और प्रभाव
इस लोक गाथा ने सत्य, साहस और जीव-दया का महत्वपूर्ण संदेश दिया। कलाकारों ने दर्शकों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। आंबा लाल नांदला ने नाटक का लेखन किया और दयाराम भांड ने निर्देशन किया। केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने युवाओं को जड़ों से जोड़ने के लिए ऐसे पारंपरिक नाटकों को आवश्यक बताया। इस अवसर पर प्रमोद कौशिक, डॉ. ममता सचदेवा, राजीव, सुनीता, शालू यादव, कृष्ण पांचाल, महेश जोशी और विकास शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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