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Kurukshetra News: पवित्र ब्रह्मसरोवर को मिलेगा नया स्वरूप, आगरा के रेड मार्बल से चमकेगा
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कुरुक्षेत्र। करीब 40 साल पहले ब्रह्मसरोवर के परिक्रमा पथ पर लगाए गए लाल पत्थर, जो अधिकतर खस्ता
कुरुक्षेत्र। एशिया के सबसे बड़े माने जाने वाले धर्मनगरी स्थित पवित्र ब्रह्मसरोवर को नया स्वरूप मिलने वाला है। आगरा के रेड मार्बल पत्थर से सरोवर चमक उठेगा, वहीं घाटों के चारों ओर खास परिक्रमा पथ भी होगा। लाइटों से लेकर अन्य साज सज्जा भी खास रूप में की जाएगी। इसके लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने पहल शुरू कर दी है।
अगले दो से तीन माह में इसकी डीपीआर तैयार कर लिए जाने की योजना है। उसके बाद टेंडर आदि की प्रक्रिया पूरी कर कार्य शुरू किया जाएगा। केडीबी राज्यपाल व मुख्यमंत्री के साथ इस योजना पर करीब पांच माह पहले भी विस्तार से चर्चा कर चुका है। वहीं अब सरकार ने इसे हरि झंडी दे दी है जिसके बाद बोर्ड ने भी प्राथमिक तौर पर खाका तैयार कर लिया है। पहले की गई चर्चा के मुताबिक इस पर करीब 15 करोड़ का बजट खर्च हो सकता है। करीब 40 वर्ष बाद ब्रह्मसरोवर को यह नया स्वरूप मिल पाएगा जिससे न केवल यहां पर्यटकों व श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ेगा बल्कि धर्मनगरी की पहचान भी और मजबूत होगी।
1968 से 1990 तक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए स्व. गुलजारी लाल नंदा ने कुरुक्षेत्र के सभी तीर्थस्थलों के विकास का बीड़ा उठाया था जिसमें ब्रह्मसरोवर सबसे प्रमुख था। उन्होंने स्वयं ब्रह्मसरोवर की खुदाई और सफाई में श्रमदान किया जिससे यह कीचड़ भरे तालाब से एक विकसित और सुंदर सरोवर बन सका था। बताया जाता है कि पूर्वी घाट के जीर्णोद्धार के साथ ही वर्ष 1975 में व पश्चिमी घाट के पत्थर 1985-86 में लगाए गए थे। अब सरोवर के चारों ओर परिक्रमा पथ (फर्श ) व साज सज्जा को नया स्वरूप दिया जाने वाला है जिसकी मांग पिछले कई साल से उठ रही है। अनेक जगह ब्रह्मसरोवर परिक्रमा पथ के पत्थर टूट भी चुके हैं।
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3600 फीट लंबे, 1500 फीट चौड़े और 45 फीट गहरे माने जाने वाले इस सरोवर के दोनों घाटों के चारों ओर परिक्रमा पथ भी पत्थर बदले जाने के दौरान ही खास तौर पर तैयार किया जाएगा। विशेष पत्थर से तैयार होने वाले इस परिक्रमा पथ पर जगह-जगह दूरी से लेकर द्वारों तक की जानकारी भी लिखी मिलेगी।
हिस्सो में पूरा किया जाना है काम : उपेंद्र
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि ब्रह्मसरोवर परिक्रमा पथ के अधिकतर पत्थर खराब हो चुके हैं, जिसके चलते अब दोनों घाटों के चारों ओर के सभी पत्थर बदले जाने की योजना तैयार की है। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले दो से तीन माह में डीपीआर तैयार हो जाएगी जिसके बाद ही बजट व अन्य रूपरेखा पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगी। यह तय है कि पूरे फर्श पर पहले की तरह ही आगरा का रेड मार्बल पत्थर ही लगाया जाना है।
ब्रह्मसरोवर की है खास महत्ता
देश के स्वच्छ आइकॉनिक साइट में शुमार पवित्र ब्रह्मसरोवर की खास महत्ता है। इसे भगवान ब्रह्मा की ओर से ब्रह्मांड की रचना के लिए किए गए यज्ञ से जुड़ा माना जाता है। किंवदंतियों के अनुसार पहली बार कौरव और पांडवों के पूर्वजों राजा कुरु ने इसकी खुदाई की थी। सामान्य दिनों में यहां पांच से सात हजार श्रद्धालु व पर्यटकाें का आगमन रहता है जबकि सूर्यग्रहण और अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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अगले दो से तीन माह में इसकी डीपीआर तैयार कर लिए जाने की योजना है। उसके बाद टेंडर आदि की प्रक्रिया पूरी कर कार्य शुरू किया जाएगा। केडीबी राज्यपाल व मुख्यमंत्री के साथ इस योजना पर करीब पांच माह पहले भी विस्तार से चर्चा कर चुका है। वहीं अब सरकार ने इसे हरि झंडी दे दी है जिसके बाद बोर्ड ने भी प्राथमिक तौर पर खाका तैयार कर लिया है। पहले की गई चर्चा के मुताबिक इस पर करीब 15 करोड़ का बजट खर्च हो सकता है। करीब 40 वर्ष बाद ब्रह्मसरोवर को यह नया स्वरूप मिल पाएगा जिससे न केवल यहां पर्यटकों व श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ेगा बल्कि धर्मनगरी की पहचान भी और मजबूत होगी।
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1968 से 1990 तक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए स्व. गुलजारी लाल नंदा ने कुरुक्षेत्र के सभी तीर्थस्थलों के विकास का बीड़ा उठाया था जिसमें ब्रह्मसरोवर सबसे प्रमुख था। उन्होंने स्वयं ब्रह्मसरोवर की खुदाई और सफाई में श्रमदान किया जिससे यह कीचड़ भरे तालाब से एक विकसित और सुंदर सरोवर बन सका था। बताया जाता है कि पूर्वी घाट के जीर्णोद्धार के साथ ही वर्ष 1975 में व पश्चिमी घाट के पत्थर 1985-86 में लगाए गए थे। अब सरोवर के चारों ओर परिक्रमा पथ (फर्श ) व साज सज्जा को नया स्वरूप दिया जाने वाला है जिसकी मांग पिछले कई साल से उठ रही है। अनेक जगह ब्रह्मसरोवर परिक्रमा पथ के पत्थर टूट भी चुके हैं।
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3600 फीट लंबे, 1500 फीट चौड़े और 45 फीट गहरे माने जाने वाले इस सरोवर के दोनों घाटों के चारों ओर परिक्रमा पथ भी पत्थर बदले जाने के दौरान ही खास तौर पर तैयार किया जाएगा। विशेष पत्थर से तैयार होने वाले इस परिक्रमा पथ पर जगह-जगह दूरी से लेकर द्वारों तक की जानकारी भी लिखी मिलेगी।
हिस्सो में पूरा किया जाना है काम : उपेंद्र
केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि ब्रह्मसरोवर परिक्रमा पथ के अधिकतर पत्थर खराब हो चुके हैं, जिसके चलते अब दोनों घाटों के चारों ओर के सभी पत्थर बदले जाने की योजना तैयार की है। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले दो से तीन माह में डीपीआर तैयार हो जाएगी जिसके बाद ही बजट व अन्य रूपरेखा पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगी। यह तय है कि पूरे फर्श पर पहले की तरह ही आगरा का रेड मार्बल पत्थर ही लगाया जाना है।
ब्रह्मसरोवर की है खास महत्ता
देश के स्वच्छ आइकॉनिक साइट में शुमार पवित्र ब्रह्मसरोवर की खास महत्ता है। इसे भगवान ब्रह्मा की ओर से ब्रह्मांड की रचना के लिए किए गए यज्ञ से जुड़ा माना जाता है। किंवदंतियों के अनुसार पहली बार कौरव और पांडवों के पूर्वजों राजा कुरु ने इसकी खुदाई की थी। सामान्य दिनों में यहां पांच से सात हजार श्रद्धालु व पर्यटकाें का आगमन रहता है जबकि सूर्यग्रहण और अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।