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प्रदेश की प्रगति के लिए नीडोनॉमिक्स का सिद्धांत एक स्थायी दृष्टिकोण : प्रो. गोयल
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कुरुक्षेत्र। प्रो. एमएम गोयल।
कुरुक्षेत्र। हरियाणा ने 1966 से पांच दशकों में एक जीवंत और विविध राज्य के रूप में प्रगति की है। वर्तमान में राज्य की आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने हेतु नीडोनॉमिक्स का गीता-प्रेरित सिद्धांत एक स्थायी दृष्टिकोण प्रदान करता है। ये विचार हरियाणा की 59वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक, तीन बार कुलपति रह चुके एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त अर्थशास्त्र के प्रो. मदन मोहन गोयल ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि नीडोनॉमिक्स पारदर्शी और उत्तरदायी वित्तीय प्रथाओं की वकालत करता है, जोकि अनावश्यक खर्च में कमी और उन परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हैं जो राज्य के लोगों को सीधे लाभ पहुंचाती हैं। सातवें राज्य वित्त आयोग की जल्द नियुक्ति और राज्य के वित्तपोषण के वैकल्पिक स्रोतों की पहचान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे। नीडोनॉमिक्स का सिद्धांत आवश्यकता आधारित खपत, नैतिक शासन और संसाधनों के कुशल उपयोग पर आधारित है, जो हरियाणा के समावेशी और सतत विकास में सहायक हो सकता है।
प्रो. गोयल का मानना है कि हरियाणा को एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें प्रत्येक नागरिक के कल्याण को प्राथमिकता दी जाए। नीडोनॉमिक्स की आवश्यकता आधारित आर्थिक दृष्टि को अपनाकर हरियाणा अपने संसाधनों का सम्मान करते हुए और समाज के कल्याण के आदर्शों का पालन करते हुए एक सुदृढ़ और समावेशी भविष्य का निर्माण कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि नीडोनॉमिक्स पारदर्शी और उत्तरदायी वित्तीय प्रथाओं की वकालत करता है, जोकि अनावश्यक खर्च में कमी और उन परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हैं जो राज्य के लोगों को सीधे लाभ पहुंचाती हैं। सातवें राज्य वित्त आयोग की जल्द नियुक्ति और राज्य के वित्तपोषण के वैकल्पिक स्रोतों की पहचान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे। नीडोनॉमिक्स का सिद्धांत आवश्यकता आधारित खपत, नैतिक शासन और संसाधनों के कुशल उपयोग पर आधारित है, जो हरियाणा के समावेशी और सतत विकास में सहायक हो सकता है।
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प्रो. गोयल का मानना है कि हरियाणा को एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें प्रत्येक नागरिक के कल्याण को प्राथमिकता दी जाए। नीडोनॉमिक्स की आवश्यकता आधारित आर्थिक दृष्टि को अपनाकर हरियाणा अपने संसाधनों का सम्मान करते हुए और समाज के कल्याण के आदर्शों का पालन करते हुए एक सुदृढ़ और समावेशी भविष्य का निर्माण कर सकता है।
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