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विकसित भारत का स्वरूप उद्यमिता एवं कौशल विकास में निहित : प्रो. सचदेवा
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बुधवार को विश्व उद्यमी दिवस पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी इंक्यूबेशन सेंटर (कुटिक) द्वारा भारत के लिए निर्माण विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यातिथि कुलपति प्रो. सोमनाथ ने कहा कि विकसित भारत-2047 बनने का स्वरूप उद्यमिता एवं कौशल विकास में निहित है। छात्रों को इन-हाउस नवाचार एवं उद्यमिता के अवसर प्रदान करने के लिए विवि द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है, जिसके तहत स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए दो इंक्यूबेशन सेंटर बनाए गए हैं।
कुलपति ने कहा कि विश्व में भारत 37 करोड़ युवाओं के साथ सबसे युवा देश है। युवा संवेदनशीलता से सृजनशीलता का प्रयास करें। जीवन में सफलता के लिए ज्ञान, कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है। युवाओं में कौशल विकास कर ही उन्हें रोजगार युक्त किया जा सकता है। विश्वविद्यालय में शोध को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट दर्ज करने के लिए इको सिस्टम विकसित किया गया है। अब तक 60 पेटेंट दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से कुछ पब्लिश व अवार्ड हो चुके हैं। युवाओं से समय बचाकर कोई न कोई स्किल सीखने का आह्वान किया ताकि वो आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।
कुटिक समन्वयक प्रो. अनुरेखा शर्मा ने कहा कि कुलपति के मार्गदर्शन में इंक्यूबेशन सेंटर द्वारा युवाओं में नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा दिया गया है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी अपने नए आइडिया पर शोध कर रहे हैं। इस मौके पर डीन प्रो. अनिल वोहरा, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. मुकेश कुमार, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, डॉ. सोमवीर जाखड़, डॉ. रूचि गुप्ता, डॉ. अश्विनी मित्तल, डॉ. अजय जांगडा, डॉ. ओपी ठाकुर सहित शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।
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युवाओं को उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाने के लिए किया प्रेरित
मुख्य वक्ता फनटूडू लैब्स के फांउडर, निदेशक व उद्यमी सौरभ जैन ने कहा कि स्टार्टअप के माध्यम से विकास की अपार संभावनाएं हैं। आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है। देश की हजारों समस्याओं का समाधान स्टार्टअप में ही निहित है। देश को आगे बढ़ाने में उद्यमियों का अहम योगदान रहा है। पेटीएम का उदाहरण देकर समझाया कि छोटे स्टार्टअप से शुरू होकर शिखर पर पहुंच चुका है। एआई तकनीक से आज दुनिया बदल रही है। विद्यार्थियों से पुस्तकें पढ़कर जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस दौरान अपने द्वारा लिखित स्टार्टअप मास्टर क्लास पुस्तक कुलपति को भेंट की।
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कुलपति ने कहा कि विश्व में भारत 37 करोड़ युवाओं के साथ सबसे युवा देश है। युवा संवेदनशीलता से सृजनशीलता का प्रयास करें। जीवन में सफलता के लिए ज्ञान, कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है। युवाओं में कौशल विकास कर ही उन्हें रोजगार युक्त किया जा सकता है। विश्वविद्यालय में शोध को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट दर्ज करने के लिए इको सिस्टम विकसित किया गया है। अब तक 60 पेटेंट दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से कुछ पब्लिश व अवार्ड हो चुके हैं। युवाओं से समय बचाकर कोई न कोई स्किल सीखने का आह्वान किया ताकि वो आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।
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कुटिक समन्वयक प्रो. अनुरेखा शर्मा ने कहा कि कुलपति के मार्गदर्शन में इंक्यूबेशन सेंटर द्वारा युवाओं में नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा दिया गया है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी अपने नए आइडिया पर शोध कर रहे हैं। इस मौके पर डीन प्रो. अनिल वोहरा, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. मुकेश कुमार, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, डॉ. सोमवीर जाखड़, डॉ. रूचि गुप्ता, डॉ. अश्विनी मित्तल, डॉ. अजय जांगडा, डॉ. ओपी ठाकुर सहित शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।
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युवाओं को उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाने के लिए किया प्रेरित
मुख्य वक्ता फनटूडू लैब्स के फांउडर, निदेशक व उद्यमी सौरभ जैन ने कहा कि स्टार्टअप के माध्यम से विकास की अपार संभावनाएं हैं। आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है। देश की हजारों समस्याओं का समाधान स्टार्टअप में ही निहित है। देश को आगे बढ़ाने में उद्यमियों का अहम योगदान रहा है। पेटीएम का उदाहरण देकर समझाया कि छोटे स्टार्टअप से शुरू होकर शिखर पर पहुंच चुका है। एआई तकनीक से आज दुनिया बदल रही है। विद्यार्थियों से पुस्तकें पढ़कर जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस दौरान अपने द्वारा लिखित स्टार्टअप मास्टर क्लास पुस्तक कुलपति को भेंट की।