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जिन रुपये से भरनी थी कनाडा की उड़ान, उससे अपनाई पराली प्रबंधन की राह
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विजय कुमार
- फोटो : Kurukshetra
सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र। विदेशों की चकाचौंध में आज जहां हर युवा डूबा दिखाई दे रहा है और विदेश जाने का सपना पूरा करने के लिए जमीन से लेकर घर तक बेच रहे हैं। ऐसे ही युवाओं को आइना दिखा रहे हैं गांव सिंहपुरा के रहने वाले विजय कुमार। जिन्होंने कनाडा जाने की चाह छोड़ उन्हीं रुपयों से पराली प्रबंधन का कारोबार शुरू किया है। पहले ही सीजन में अब तक 30 लाख रुपये कमा चुके हैं और 20 से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
बीए तक की पढ़ाई कर चुके विजय कुमार बताते हैं कि वह भी दूसरे युवाओं की तरह विदेश जाना चाहता था। उन्होंने कनाडा जाने के लिए सभी दस्तावेजों सहित तैयारी पूरी कर ली थी। पहले परिवार कनाडा भेजने के लिए मना करता रहा। दूसरे युवाओं का हवाला देकर उन्होंने अपने परिवार को राजी कर लिया था।
एजेंट से 32 लाख रुपये में सौदा तय कर लिया था। इसी दौरान धान की फसल पकी तो पराली न जलाने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों से जानकारी मिली और अहसास हुआ कि पराली जलाकर किसान न केवल अपना बल्कि खेत व देश का भी नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने ठाना कि न केवल पराली जलाने से रोकने के प्रयास करेगा, बल्कि इसे ही अपना कारोबार बनाएगा। जिस पैसे को एजेंट को देकर वह कनाडा जाना चाहता था, उसी से ही पराली प्रबंधन शुरू कर किया।
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विजय कुमार बताते हैं कि पहले ही सीजन मेें वह अब तक पराली का कारोबार कर करीब 30 लाख रुपये तक कमा चुके हैं। 20 से ज्यादा लोगों को भी उन्होंने रोजगार दिया है। तीन मशीनों के जरिए वह पराली के गांठ बनवाकर स्टोर कर रहा है, जहां उसके पास पॉवर प्लांट से लेकर पंजाब तक की विभिन्न फैक्टरियों से आर्डर आ रहे हैं। संवाद
छह गांवों में जलाने से बचाई पराली
विजय के मुताबिक उन्होंने पहले अपने पांच एकड़ खेत की पराली एकत्रित की तो फिर अपने गांव और बाद में आसपास के छह गांवों से पराली एकत्रित की। किसी भी गांव में पराली जलने नहीं दी। इससे जहां खेतों का उपजाऊपन बचा तो जीव जंतुओं की जिंदगी भी बची है। यहीं नहीं प्रदूषण से भी छुटकारा मिला है और सरकार के अभियान में भी भागीदार बन सका है। अब अगले सीजन के लिए उसने कारोबार बढ़ाने की योजना बनानी शुुरू कर दी है।
धान के बाद गन्ने और फिर गेहूं के अवशेष की तूड़ी बनाने का करेंगे काम
विजय बताते हैं कि धान के बाद गन्ने का सीजन आने वाला है। किसान गन्ने की पत्ती को भी आग के हवाले करते रहे हैं, लेकिन वे इसका भी प्रबंधन करेंगे। इसके बाद गेहूं अवशेष की तूड़ी बनाने पर काम किया जाएगा। इसी बीच अपनेे खेत में भी काम किया जाता रहेगा। अगले साल से कारोबार और बढ़ाया जाएगा, जिसमें 50 युवाओं तक को रोजगार देने का लक्ष्य है।
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कुरुक्षेत्र। विदेशों की चकाचौंध में आज जहां हर युवा डूबा दिखाई दे रहा है और विदेश जाने का सपना पूरा करने के लिए जमीन से लेकर घर तक बेच रहे हैं। ऐसे ही युवाओं को आइना दिखा रहे हैं गांव सिंहपुरा के रहने वाले विजय कुमार। जिन्होंने कनाडा जाने की चाह छोड़ उन्हीं रुपयों से पराली प्रबंधन का कारोबार शुरू किया है। पहले ही सीजन में अब तक 30 लाख रुपये कमा चुके हैं और 20 से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
बीए तक की पढ़ाई कर चुके विजय कुमार बताते हैं कि वह भी दूसरे युवाओं की तरह विदेश जाना चाहता था। उन्होंने कनाडा जाने के लिए सभी दस्तावेजों सहित तैयारी पूरी कर ली थी। पहले परिवार कनाडा भेजने के लिए मना करता रहा। दूसरे युवाओं का हवाला देकर उन्होंने अपने परिवार को राजी कर लिया था।
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एजेंट से 32 लाख रुपये में सौदा तय कर लिया था। इसी दौरान धान की फसल पकी तो पराली न जलाने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों से जानकारी मिली और अहसास हुआ कि पराली जलाकर किसान न केवल अपना बल्कि खेत व देश का भी नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने ठाना कि न केवल पराली जलाने से रोकने के प्रयास करेगा, बल्कि इसे ही अपना कारोबार बनाएगा। जिस पैसे को एजेंट को देकर वह कनाडा जाना चाहता था, उसी से ही पराली प्रबंधन शुरू कर किया।
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विजय कुमार बताते हैं कि पहले ही सीजन मेें वह अब तक पराली का कारोबार कर करीब 30 लाख रुपये तक कमा चुके हैं। 20 से ज्यादा लोगों को भी उन्होंने रोजगार दिया है। तीन मशीनों के जरिए वह पराली के गांठ बनवाकर स्टोर कर रहा है, जहां उसके पास पॉवर प्लांट से लेकर पंजाब तक की विभिन्न फैक्टरियों से आर्डर आ रहे हैं। संवाद
छह गांवों में जलाने से बचाई पराली
विजय के मुताबिक उन्होंने पहले अपने पांच एकड़ खेत की पराली एकत्रित की तो फिर अपने गांव और बाद में आसपास के छह गांवों से पराली एकत्रित की। किसी भी गांव में पराली जलने नहीं दी। इससे जहां खेतों का उपजाऊपन बचा तो जीव जंतुओं की जिंदगी भी बची है। यहीं नहीं प्रदूषण से भी छुटकारा मिला है और सरकार के अभियान में भी भागीदार बन सका है। अब अगले सीजन के लिए उसने कारोबार बढ़ाने की योजना बनानी शुुरू कर दी है।
धान के बाद गन्ने और फिर गेहूं के अवशेष की तूड़ी बनाने का करेंगे काम
विजय बताते हैं कि धान के बाद गन्ने का सीजन आने वाला है। किसान गन्ने की पत्ती को भी आग के हवाले करते रहे हैं, लेकिन वे इसका भी प्रबंधन करेंगे। इसके बाद गेहूं अवशेष की तूड़ी बनाने पर काम किया जाएगा। इसी बीच अपनेे खेत में भी काम किया जाता रहेगा। अगले साल से कारोबार और बढ़ाया जाएगा, जिसमें 50 युवाओं तक को रोजगार देने का लक्ष्य है।

कुरुक्षेत्र। पराली प्रबंधन के लिए लगाए प्लांट पर किया जा रहा काम। संवाद- फोटो : Kurukshetra