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Kurukshetra News: पवित्र ब्रह्मसरोवर पर वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियों और राज्यों के पारंपरिक लोक संगीत ने बांधा समा
Tue, 18 Nov 2025 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 18 Nov 2025 01:07 AM IST
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में प्रस्तुति देती राजस्थान की कलाकार।
- फोटो : जिला अस्पताल के पास जाम के बीच फंसी एंबुलेंस व शव वाहन।
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते पवित्र ब्रह्मसरोवर लोक संस्कृति व शिल्पकला के लघु भारत का रूप ले चुका है। यहां विभिन्न राज्यों के शिल्पकार और कलाकार अपनी शिल्पकला और लोक कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। तीसरे दिन सोमवार को महोत्सव में राजस्थान से लेकर जम्मू के कलाकारों ने पारंपरिक लोक गीतों व नृत्यों से समा बांधा। दिनभर ब्रह्मसरोवर के घाट वाद्य यंत्रों की धुनों से गुंजते रहे और इनकी स्वर लहरियों पर पर्यटक भी थिरकते नजर आए।
महोत्सव में वाद्य यंत्रों की धुनों और लोक गीतों को सुनने के लिए ब्रह्मसरोवर के दक्षिण तट पर दर्शकों का तांता लगा रहा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने राउफ, कुल्लू नाटी, गाथा गायन, छपेली, शामी, गुदुम बाजा, करमा, राई और पंजाब के लुडी आदि लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी।
एनजेडसीसी के अधिकारी भूपेंद्र सिंह के मुताबिक मंगलवार को भी इन राज्यों के कलाकार आकर्षक प्रस्तुतियां देंगे और इसके बाद दूसरे राज्यों के कलाकार अपने प्रदेशों के लोक नृत्यों की प्रस्तुति देंगे।
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प्रदेश अनुसार आवंटित किए स्टॉल
शिल्प व सरस मेले में हरियाणा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तामिलनाडु, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, असम, उत्तराखंड, पंजाब सहित विभिन्न प्रदेशों के शिल्पकार अपनी-अपनी खास शिल्पकला को सजाए हुए हैं, जिन्हें देख पर्यटक उत्साहित हैं। प्रदेश अनुसार शिल्पकारों को स्टॉल आवंटित किए गए हैं।
स्टीक वॉकर बने आकर्षण का केंद्र
महोत्सव में राजस्थान से कलाकारों का कच्ची घोड़ी समूह पहुंचा है, जो महोत्सव में खास रंग भर रहा है। राजस्थान की परंपरा के अनुसार सोमवार को इन कलाकारों ने कच्ची घोड़ी का नृत्य कर महोत्सव की रौनक बढ़ाई। वहीं एनजेडसीसी की तरफ से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी स्टीक वॉकर कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है। स्टीक वॉकर अपने पैरों के नीचे बांस बांधकर अपने कद को बढ़ा लेते हैं और इसके बाद पूरे मेले में घूमते हैं। ये कलाकार खासतौर पर बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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महोत्सव में वाद्य यंत्रों की धुनों और लोक गीतों को सुनने के लिए ब्रह्मसरोवर के दक्षिण तट पर दर्शकों का तांता लगा रहा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने राउफ, कुल्लू नाटी, गाथा गायन, छपेली, शामी, गुदुम बाजा, करमा, राई और पंजाब के लुडी आदि लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी।
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एनजेडसीसी के अधिकारी भूपेंद्र सिंह के मुताबिक मंगलवार को भी इन राज्यों के कलाकार आकर्षक प्रस्तुतियां देंगे और इसके बाद दूसरे राज्यों के कलाकार अपने प्रदेशों के लोक नृत्यों की प्रस्तुति देंगे।
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प्रदेश अनुसार आवंटित किए स्टॉल
शिल्प व सरस मेले में हरियाणा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तामिलनाडु, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, असम, उत्तराखंड, पंजाब सहित विभिन्न प्रदेशों के शिल्पकार अपनी-अपनी खास शिल्पकला को सजाए हुए हैं, जिन्हें देख पर्यटक उत्साहित हैं। प्रदेश अनुसार शिल्पकारों को स्टॉल आवंटित किए गए हैं।
स्टीक वॉकर बने आकर्षण का केंद्र
महोत्सव में राजस्थान से कलाकारों का कच्ची घोड़ी समूह पहुंचा है, जो महोत्सव में खास रंग भर रहा है। राजस्थान की परंपरा के अनुसार सोमवार को इन कलाकारों ने कच्ची घोड़ी का नृत्य कर महोत्सव की रौनक बढ़ाई। वहीं एनजेडसीसी की तरफ से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी स्टीक वॉकर कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है। स्टीक वॉकर अपने पैरों के नीचे बांस बांधकर अपने कद को बढ़ा लेते हैं और इसके बाद पूरे मेले में घूमते हैं। ये कलाकार खासतौर पर बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में प्रस्तुति देती राजस्थान की कलाकार।- फोटो : जिला अस्पताल के पास जाम के बीच फंसी एंबुलेंस व शव वाहन।

कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में प्रस्तुति देती राजस्थान की कलाकार।- फोटो : जिला अस्पताल के पास जाम के बीच फंसी एंबुलेंस व शव वाहन।

कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में प्रस्तुति देती राजस्थान की कलाकार।- फोटो : जिला अस्पताल के पास जाम के बीच फंसी एंबुलेंस व शव वाहन।