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भगवान और भक्त के दिव्य प्रेम की साक्षी है कुरुक्षेत्र की धरा : ज्ञानानंद
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कुरुक्षेत्र। गीता ज्ञान संस्था में दिव्य गीता सत्संग में प्रवचन सुनते श्रद्धालु।
कुरुक्षेत्र। गीता जयंती के उपलक्ष्य में गीता ज्ञान संस्थानम् में आयोजित दिव्य सत्संग शनिवार को भी जारी रहा, जिसमें गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि कुरुक्षेत्र की धरा भगवान और भक्त के दिव्य प्रेम की साक्षी है। इस धरा पर तीनों लोक के मालिक भगवान श्री कृष्ण ने भक्त के वशीभूत होकर अपने परम भक्त अर्जुन का 18 दिन तक रथ हांका था। रथ में अर्जुन को ऊंचे स्थान पर बैठाया और स्वयं नीचे स्थान पर बैठे। इसलिए कुरुक्षेत्र की धरा बहुत ही सौभाग्यशाली है। यही प्रेम की दिव्यता है।
भगवान श्री कृष्ण ने इस धरा पर आकर विश्व कल्याण के लिए अर्जुन के माध्यम से गीता का संदेश दिया। जब अर्जुन ने युद्ध करने से इन्कार कर दिया, वह मोहग्रस्त हो गया और शोक में चला गया तो भगवान ने उसे गीता के माध्यम से विश्व कल्याण हेतु गीता का संदेश दिया। अर्जुन की समस्या का समाधान किया। उन्होंने कहा कि गीता में विश्व की हर समस्या का समाधान है।
गीता मनीषी ने कहा कि भगवान की हर लीला में गीता का तत्व छिपा हुआ है। गीता भी गोविंद की एक लीला है। जब धृतराष्ट्र पुत्र मोह में फंस गया और अपने भाई के पुत्रों का हक नहीं दिया तब भगवान ने यह लीला रची। भगवान श्री कृृष्ण ने नर और नारायण के रूप में आकर गीता के माध्यम से विश्व की हर समस्या का समाधान किया। निरंजनी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर आचार्य कैलाशानंद गिरी ने कहा कि आज विश्व में जो गीता जयंती समारोह मनाया जाता है, उसका श्रेय गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज को जाता है।
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इस अवसर पर महंत बंसी पुरी, बाबा भूपेंद्र सिंह पटियाला वाले ने प्रवचन दिए। कार्यक्रम में महंत लक्ष्मीनारायण पुरी, सीएम ओएसडी विरेंद्र, कुवि के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. मार्कंडेय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंजाब प्रांत प्रचारक नरेंद्र, केडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंकज सेतिया, अशोक चावला, जीओ गीता के संयुक्त सचिव मदन मोहन छाबड़ा, डाॅ. सुखबीर मैहला, विजय नरूला, धीरज गुलाटी, संस्थानम के मीडिया प्रभारी रामपाल शर्मा ने गीता पूजन व आरती में भाग लिया।
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भगवान श्री कृष्ण ने इस धरा पर आकर विश्व कल्याण के लिए अर्जुन के माध्यम से गीता का संदेश दिया। जब अर्जुन ने युद्ध करने से इन्कार कर दिया, वह मोहग्रस्त हो गया और शोक में चला गया तो भगवान ने उसे गीता के माध्यम से विश्व कल्याण हेतु गीता का संदेश दिया। अर्जुन की समस्या का समाधान किया। उन्होंने कहा कि गीता में विश्व की हर समस्या का समाधान है।
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गीता मनीषी ने कहा कि भगवान की हर लीला में गीता का तत्व छिपा हुआ है। गीता भी गोविंद की एक लीला है। जब धृतराष्ट्र पुत्र मोह में फंस गया और अपने भाई के पुत्रों का हक नहीं दिया तब भगवान ने यह लीला रची। भगवान श्री कृृष्ण ने नर और नारायण के रूप में आकर गीता के माध्यम से विश्व की हर समस्या का समाधान किया। निरंजनी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर आचार्य कैलाशानंद गिरी ने कहा कि आज विश्व में जो गीता जयंती समारोह मनाया जाता है, उसका श्रेय गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज को जाता है।
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इस अवसर पर महंत बंसी पुरी, बाबा भूपेंद्र सिंह पटियाला वाले ने प्रवचन दिए। कार्यक्रम में महंत लक्ष्मीनारायण पुरी, सीएम ओएसडी विरेंद्र, कुवि के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. मार्कंडेय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंजाब प्रांत प्रचारक नरेंद्र, केडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंकज सेतिया, अशोक चावला, जीओ गीता के संयुक्त सचिव मदन मोहन छाबड़ा, डाॅ. सुखबीर मैहला, विजय नरूला, धीरज गुलाटी, संस्थानम के मीडिया प्रभारी रामपाल शर्मा ने गीता पूजन व आरती में भाग लिया।