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Kurukshetra News: बरसात के साथ आई तेज आंधी ने किसानों की बढ़ाई चिंता, फसल बिछी
Sat, 20 Sep 2025 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 20 Sep 2025 02:16 AM IST
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इस्माईलाबाद। शुक्रवार को आई आंधी के चलते बिछी धान की फसल। संवाद
कुरुक्षेत्र/इस्माईलाबाद। शहर में शुक्रवार दोपहर के समय कई क्षेत्रों में आई आंधी के साथ हल्की बारिश ने धान की फसल को बिछा दिया है। इससे फिर किसानों की चिंताएं बढ़ गईं। हालांकि मारकंडा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है जिससे किसानों ने राहत की सांस ली है। वीरवार को पहाड़ी क्षेत्र में हुई भारी बरसात के चलते शुक्रवार को मारकंडा नदी में उफान आने की उम्मीद से किसान चिंतित थे।
वीरवार शाम को मुलाना के बाद शाहाबाद में भी जलस्तर बढ़ गया था। गांव नैसी से एक तटबंध टूटा होने के चलते किसान सहमे हुए थे। किसानों को डर था कि कहीं पिछली बार की तरह अगर ज्यादा पानी आया तो उनके खेत पानी से भर जाएंगे।
पहले आई बाढ़ का पानी अभी सूखा भी नहीं है और दोबारा से पानी आने पर अगली फसल की बुआई भी प्रभावित होगी लेकिन शुक्रवार को जलबेहड़ा में एक बार जलस्तर बढ़ने के बाद केवल दो हजार क्यूसेक पानी ही दिनभर मारकंडा नदी में बहता रहा।
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इससे किसी भी किसान के खेत में पानी नहीं घुसा है जो किसानों के लिए बड़ी राहत रही। तेज हवा के साथ बरसात से धान की फसल खेतों में बिछने पर किसान प्रदीप, अनिल, संजीव, तरसेम, राम रत्न आदि ने कहा कि इस बार तो किसानों पर मार ही मार पड़ रही है। बाढ़ से जो फसलें बची थीं उन्हें तेज आंधी के साथ आई बरसात ने खेतों में बिछा दिया है। इससे उत्पादन में काफी गिरावट आएगी। किसानों ने कहा कि पहले ही धान की निकासी काफी कम है और अब और भी कम हो जाएगी।
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वीरवार शाम को मुलाना के बाद शाहाबाद में भी जलस्तर बढ़ गया था। गांव नैसी से एक तटबंध टूटा होने के चलते किसान सहमे हुए थे। किसानों को डर था कि कहीं पिछली बार की तरह अगर ज्यादा पानी आया तो उनके खेत पानी से भर जाएंगे।
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पहले आई बाढ़ का पानी अभी सूखा भी नहीं है और दोबारा से पानी आने पर अगली फसल की बुआई भी प्रभावित होगी लेकिन शुक्रवार को जलबेहड़ा में एक बार जलस्तर बढ़ने के बाद केवल दो हजार क्यूसेक पानी ही दिनभर मारकंडा नदी में बहता रहा।
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इससे किसी भी किसान के खेत में पानी नहीं घुसा है जो किसानों के लिए बड़ी राहत रही। तेज हवा के साथ बरसात से धान की फसल खेतों में बिछने पर किसान प्रदीप, अनिल, संजीव, तरसेम, राम रत्न आदि ने कहा कि इस बार तो किसानों पर मार ही मार पड़ रही है। बाढ़ से जो फसलें बची थीं उन्हें तेज आंधी के साथ आई बरसात ने खेतों में बिछा दिया है। इससे उत्पादन में काफी गिरावट आएगी। किसानों ने कहा कि पहले ही धान की निकासी काफी कम है और अब और भी कम हो जाएगी।