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भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप को नहीं किया जा सकता परिभाषित : भारती
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कुरुक्षेत्र। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से हुडा ग्राउंड के नज़दीक सेक्टर 10 में आयोजित श्री कृष्ण कथामृत के पांचवें दिन साध्वी कालिंदी भारती ने भागवत कथा के कई दिव्य रहस्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का व्यक्तित्व इतना विराट है कि उसे किसी एक परिभाषा में परिभाषित नहीं किया जा सकता।
कहीं तो वे वृंदावन की निकुंज गलियों में गो चराते गोपालक है,कहीं अपनी बांसुरी की सुर लहरियों सें सबको मोहित करने वाले बंसी बजैया,कहीं ग्वाल सखाओं के साथ गोपियों के घर से माखन चुराने वाले माखन चुरैया, कभी अपनी कनिष्ठिका पर गोवर्धन को धारण करने वाले गोवर्धन धारी,कभी अधर्मी कंस, शिशुपाल इत्यादि के प्राण हरने वाले यदुवीर है तो कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में अर्जुन को गीता का उपदेश देने वाले योगेश्वर परम योगी।
साध्वी ने बताया कि प्रत्येक मानव स्वयं को दोराहे पर पाता है-जिसे शास्त्र व ग्रन्थों में श्रेय मार्ग - सर्व कल्याणकारी मार्ग व प्रेय मार्ग अर्थात ऐंद्रिय सुखों से भरपूर स्वार्थ व विनाश से भरपूर मार्ग कहते है। साधारण शब्दों में एक आत्मा का मार्ग है व दूसरा मन का। एक सुलझन की ओर ले जाता है और एक उलझन की ओर । इन्हीं के बीच फंसकर सही चयन न कर पाने की दशा ही तनााव, उदासी व क्षोम का कारण है जिससे अनेक मनोवैज्ञानिक व्याधियां उत्पन्न होती हैं। यही आधुनिक समाज की समस्या है। यदि हम स्वयं को पहचानें, भीतर उठने वाली अंतरात्मा की चीत्कार सुने, उस पर अमल करें तो निश्चय ही समस्याओं का समाधान हो जाए। इसके लिए आवश्यकता है कथा में साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों का गायन किया। इस मौके पर रंजीत सिंह सर संघ चालक आर एसएस, प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान कुलपति श्री कृष्णा आयुष विश्विद्यालय, डीपी चौधरी उपाध्यक्ष जिला परिषद् , राजवंत कौर प्रेजिडेंट कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी आदि मौजूद रहे।
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कहीं तो वे वृंदावन की निकुंज गलियों में गो चराते गोपालक है,कहीं अपनी बांसुरी की सुर लहरियों सें सबको मोहित करने वाले बंसी बजैया,कहीं ग्वाल सखाओं के साथ गोपियों के घर से माखन चुराने वाले माखन चुरैया, कभी अपनी कनिष्ठिका पर गोवर्धन को धारण करने वाले गोवर्धन धारी,कभी अधर्मी कंस, शिशुपाल इत्यादि के प्राण हरने वाले यदुवीर है तो कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में अर्जुन को गीता का उपदेश देने वाले योगेश्वर परम योगी।
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साध्वी ने बताया कि प्रत्येक मानव स्वयं को दोराहे पर पाता है-जिसे शास्त्र व ग्रन्थों में श्रेय मार्ग - सर्व कल्याणकारी मार्ग व प्रेय मार्ग अर्थात ऐंद्रिय सुखों से भरपूर स्वार्थ व विनाश से भरपूर मार्ग कहते है। साधारण शब्दों में एक आत्मा का मार्ग है व दूसरा मन का। एक सुलझन की ओर ले जाता है और एक उलझन की ओर । इन्हीं के बीच फंसकर सही चयन न कर पाने की दशा ही तनााव, उदासी व क्षोम का कारण है जिससे अनेक मनोवैज्ञानिक व्याधियां उत्पन्न होती हैं। यही आधुनिक समाज की समस्या है। यदि हम स्वयं को पहचानें, भीतर उठने वाली अंतरात्मा की चीत्कार सुने, उस पर अमल करें तो निश्चय ही समस्याओं का समाधान हो जाए। इसके लिए आवश्यकता है कथा में साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों का गायन किया। इस मौके पर रंजीत सिंह सर संघ चालक आर एसएस, प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान कुलपति श्री कृष्णा आयुष विश्विद्यालय, डीपी चौधरी उपाध्यक्ष जिला परिषद् , राजवंत कौर प्रेजिडेंट कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी आदि मौजूद रहे।
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