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Kurukshetra News: रिफाइनरी की जुर्माना राशि से होगा शहर का विकास
Sun, 14 Sep 2025 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:52 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। रिफाइनरी पर प्रदूषण फैलाने पर लगाए गए 42.50 करोड़ रुपये की राशि से शहर समेत जिले में विकास कार्य कराए जाएंगे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वन विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग से पर्यावरण बहाली के लिए विस्तृत संशोधित प्रस्ताव मांगे हैं। सिंहपुरा-सिठाना ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सतपाल सिंह ने 2018 में एनजीटी में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि रिफाइनरी जिले के बोहली, ददलाना, सिंहपुरा और सिठाना गांवों के आसपास के क्षेत्रों में वायु और जल प्रदूषण पैदा कर रही है।
उन्होंने इससे गांवोंं में बीमारी फैलने की बात कही थी। एनजीटी ने 22 मार्च, 2021 को प्रदूषण मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए रिफाइनरी पर 42.50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। साथ ही प्रभावित गांवों में पर्यावरण और जन स्वास्थ्य की बहाली के लिए सुधारात्मक कार्य योजना बनाने का भी आदेश दिए थे। आईओसीएल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) में 42.50 करोड़ रुपये जमा करा दिए थे।
तीन विभागों को करना है काम
स्वास्थ्य विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग और वन विभाग को अपने क्षेत्र में पर्यावरण की बहाली और प्रदूषण पर अंकुश लगाने के प्रस्ताव बनाकर देने हैं। किसी भी विभाग ने अपेक्षाकृत राशि के प्रस्ताव बनाकर नहीं दिए हैं। अब इनसे फिर प्रस्ताव मांगे हैं। इसमें पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नए बोरवेल लगाने, अपशिष्ट जल निकासी के लिए नई पाइपलाइन बिछाने, पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाने, ग्रामीणों की जांच के लिए एक विशेष मोबाइल वैन खरीदने आदि की योजना बनाई हैं। वहीं आईओसीएल रिफाइनरी से सटे छह गांवों में पर्यावरण संरक्षण के लिए दो बैठक की हैं। सीपीसीबी ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति के 42.50 करोड़ में से 7.8 करोड़ रुपये प्रशासन को जारी कर दिए हैं।
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पर्यावरण की बहाली के मुद्दे को गंभीरता से लिया है। समिति की दो बैठक पहले ही हो चुकी हैं। अब तीसरी बैठक 20 सितंबर को प्रस्तावित हैं। तीनों विभागों ने प्रस्ताव पहले ही जमा कर दिए थे। तीनों को संशोधित प्रस्ताव जमा करने के निर्देश दिए हैं।
- कुलदीप सिंह, सहायक पर्यावरण अभियंता, एचएसपीसीबी
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पानीपत। रिफाइनरी पर प्रदूषण फैलाने पर लगाए गए 42.50 करोड़ रुपये की राशि से शहर समेत जिले में विकास कार्य कराए जाएंगे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वन विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग से पर्यावरण बहाली के लिए विस्तृत संशोधित प्रस्ताव मांगे हैं। सिंहपुरा-सिठाना ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सतपाल सिंह ने 2018 में एनजीटी में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि रिफाइनरी जिले के बोहली, ददलाना, सिंहपुरा और सिठाना गांवों के आसपास के क्षेत्रों में वायु और जल प्रदूषण पैदा कर रही है।
उन्होंने इससे गांवोंं में बीमारी फैलने की बात कही थी। एनजीटी ने 22 मार्च, 2021 को प्रदूषण मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए रिफाइनरी पर 42.50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। साथ ही प्रभावित गांवों में पर्यावरण और जन स्वास्थ्य की बहाली के लिए सुधारात्मक कार्य योजना बनाने का भी आदेश दिए थे। आईओसीएल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) में 42.50 करोड़ रुपये जमा करा दिए थे।
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तीन विभागों को करना है काम
स्वास्थ्य विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग और वन विभाग को अपने क्षेत्र में पर्यावरण की बहाली और प्रदूषण पर अंकुश लगाने के प्रस्ताव बनाकर देने हैं। किसी भी विभाग ने अपेक्षाकृत राशि के प्रस्ताव बनाकर नहीं दिए हैं। अब इनसे फिर प्रस्ताव मांगे हैं। इसमें पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नए बोरवेल लगाने, अपशिष्ट जल निकासी के लिए नई पाइपलाइन बिछाने, पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाने, ग्रामीणों की जांच के लिए एक विशेष मोबाइल वैन खरीदने आदि की योजना बनाई हैं। वहीं आईओसीएल रिफाइनरी से सटे छह गांवों में पर्यावरण संरक्षण के लिए दो बैठक की हैं। सीपीसीबी ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति के 42.50 करोड़ में से 7.8 करोड़ रुपये प्रशासन को जारी कर दिए हैं।
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पर्यावरण की बहाली के मुद्दे को गंभीरता से लिया है। समिति की दो बैठक पहले ही हो चुकी हैं। अब तीसरी बैठक 20 सितंबर को प्रस्तावित हैं। तीनों विभागों ने प्रस्ताव पहले ही जमा कर दिए थे। तीनों को संशोधित प्रस्ताव जमा करने के निर्देश दिए हैं।
- कुलदीप सिंह, सहायक पर्यावरण अभियंता, एचएसपीसीबी