फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   The feeling of separation in love is not good..., Kurukshetra

प्यार में जुदाई का अहसास अच्छा नहीं लगता...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 01:38 AM IST
विज्ञापन
The feeling of separation in love is not good..., Kurukshetra
सीनियर सिटीजन फोरम सेक्टर-13 में आयोजित कवि सम्मेलन में हिस्सा लेते कवि। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कुरुक्षेत्र। प्यार में जुदाई का अहसास अच्छा नहीं लगता, एक मुस्कुराता चेहरा, उदास अच्छा नहीं लगता... यह रचना डॉ. बलवान सिंह ने सेक्टर-13 स्थित सीनियर सिटीजन फोरम में अदबी संगम कुरुक्षेत्र साहित्य संस्था की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में सुनाई। कवि सम्मेलन में कवियों, शायरों ने वसंत ऋतु, देश हित व युद्ध की विभीषिका पर रचनाएं पेश कीं।
कवि वीरेंद्र राठौर ने अपनी रचना हद से बढ़कर के हम तो सयाने हुए, हमको थोड़ी सी तू रहनुमाई भी दे, जख्म गहरे दिए इस जहां ने हमें, इनसे बचने की कोई दवाई भी दे सुनाई। इसके बाद प्रकाश कुरुक्षेत्र ने जो दोस्तों में जलाई थी रोशनी के लिए, उसी शमां से ही दिल को जला रहा हूं मैं। कोई तो रोक लो मुझको गजल सुनाने से, गजल समझ के हकीक़त सुना रहा हूं मैं से समा बांध दिया। गुलशन ग्रोवर ने प्यार का एक दिन है न काफी प्रिये, प्यार मुझको तुम्हारा सदा चाहिए रचना सुनाई।
विज्ञापन

वहीं, डॉ. संजीव अंजुम ने जज्बा जब हो तो बन मौन, हम नींव खड़ी करते हैं। कविता रोहिल्ला नज्म ने जो कोई तुमसे सवाल पूछे, या गुजरे लम्हों का हाल पूछे ? तो वक्त रहते ही बात कर लो कविता सुनाई। डॉ. सुभाष गर्ग पार्थ ने तेरी बंसी धुन पर तांडव, धुन ये भारी हो गई है और डॉ. सुमन सांगवान ने हम सब अच्छे हैं तो फिर वो कौन है ? नफरत के जो बीज बोए, भाई को भाई से लड़ाए, वो कौन है ? सुनाकर एकता का संदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

अदबी संगम कुरुक्षेत्र अध्यक्ष एवं शायर सूबे सिंह सुजान ने कहा कि हर शब्द में अपने, दिल को खोलने की सोची, दिल खोल नहीं पाया, गजलें तो लिखी बरसों। मैंने ये उदासी, तन्हाई में पकाई है, अब फूल खिलेंगे, दी आंसू ने नमी बरसों। कवयित्री गायत्री कौशल ने आपसे मिलिए,
इनकी हल्के में बड़ी साख है। कीमत सिर्फ पचास लाख है। आकर किसी ने दी, जब तेरे आने की खबर, हमने तमाम शहर की गलियां बुहार दी... कविता सुनाई। डॉ. हरीश कुमार रंगा ने समंदर तो झूठी गवाही देता है, दरिया को सब कुछ दिखाई देता है... सुनाकर सभी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं साहित्यकार रत्न चंद सरदाना ने की। संचालन सचिव डॉ. संजीव अंजुम ने किया। इसके अलावा डॉ बृजेश कठिल, संजय कुमार,डॉ. ममता सूद, कस्तूरी लाल शाद, रत्न चंद सरदाना, दीपक मासूम, सत प्रकाश, सोहनलाल, सुधीर ढांढा, डॉ. राकेश भास्कर, श्याम लाल बागड़ी, कविता रोहिल्ला, मेहरचंद धीमान, ज्ञान सागर, उर्मिला, आरके शर्मा, संजय कुमार मित्तल आदि नवोदित कवियों ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed