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घोड़ा गाड़ी चलाने वाले की बेटी रानी ने टोक्यो में रचा इतिहास
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टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में जीत दर्ज करने के बाद प्रसन्नचित मुद्रा में रानी रामपाल, नवजो?
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहाबाद। घोड़ा गाड़ी चलाने वाले रामपाल की बेटी रानी रामपाल का टोक्यो ओलंपिक सेमीफाइनल तक का सफर आसान नहीं था। रानी रामपाल ने अपनी मेहनत, लगन व विश्वास से इतिहास रच दिया। तीन मैच में लगातार हार के बाद जबरदस्त वापसी करते हुए म्हारी छोरियों ने वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से शिकस्त देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई है। पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचकर टीम ने इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक जीत का गोल बेशक पंजाब की गुरजीत कौर की हॉकी से निकला हो, लेकिन इसे सहेजने में शाहाबाद की बेटी कप्तान रानी रामपाल, नवजोत कौर व नवनीत कौर का योगदान भी बेहद अहम है।
हॉकी की दुनिया में रानी रामपाल बड़ा नाम बन चुका है। रानी रामपाल दूसरी बार ओलंपिक में भारतीय टीम की कप्तानी कर रही हैं। उनके पास हॉकी के अनुभव का भंडार है। रानी रामपाल की हॉकी शुरुआत शाहाबाद के एसजीएनपी स्कूल से कोच बलदेव सिंह के नेतृत्व से शुरू हुई थी। तब रानी के पिता रामपाल सड़कों पर घोड़ा गाड़ी चलाते थे और लड़कियों को हॉकी स्टिक थामे आते-जाते देखा करते थे। गरीबी के दंश बावजूद रामपाल ने अपनी बेटी को हॉकी स्टिक थमाने की सोची और रानी को कोच बलदेव सिंह के पास प्रशिक्षण के लिए छोड़ आए।
बस यहीं से रानी के हॉकी जीवन की शुरुआत हुई। कई मुसीबत झेलने के बाद भी रानी ने हॉकी खेलना नहीं छोड़ा। रानी के पिता कभी घोड़ा गाड़ी तो कभी साइकिल पर उसे मैदान में छोड़ते थे। परिणाम स्वरूप 13 वर्ष की आयु में रानी रामपाल भारतीय टीम में शामिल हो गई। बस उसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यहां तक की रानी रामपाल ने एक भी छुट्टी कभी मैदान से नहीं की और जिस दिन भाई की शादी थी उस दिन भी लंच के बाद रानी मैदान में अभ्यास करती दिखी।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रानी रामपाल ने कई पुरस्कार अपने नाम किए है। इन उपलब्धियों की बदौलत रानी को रेलवे में नौकरी मिली। बाद में रानी रामपाल पटियाला साईं सेंटर में कोच के पद पर तैनात हुईं। इन उपलब्धियों को देखते हुए रानी को अर्जुन अवार्ड, हरियाणा सरकार की ओर से भीम अवार्ड से नवाजा गया। पिछले ओलंपिक में भी रानी के विजयी गोल ने देश की टीम को ओलंपिक तक पहुंचाया था। इस बार भी रानी की कप्तानी में टीम के उम्दा प्रदर्शन ने इतिहास रच कर दिखाया है।
शाहाबाद बना हॉकी का संसारपुर
शाहाबाद को हॉकी के संसारपुर का खिताब दिया जाए तो उसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि शाहाबाद के 17 खिलाड़ियों को हॉकी में भीम अवार्ड मिल चुका है। खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह, रानी रामपाल, जसजीत कौर, सुरेंद्र कौर को अर्जुन अवार्ड से नवाजा जा चुका है। हॉकी की बदौलत ही 50 से अधिक महिला खिलाड़ी रेलवे व अन्य सरकारी विभाग में कार्यरत हैं।
ओलंपिक में बेटियों की जीत पर झूमे परिजन व हॉकी प्रेमी
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहाबाद। टोक्यो ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल में बेटियों की शानदार जीत पर हॉकी खिलाड़ियों के परिजन और खेली प्रेमी बेहद खुश हैं। हॉकी प्रेमियों खिलाड़ियों के घर पर पहुंचकर मिठाई खिलाकर उनकी खुशी को दोगुना कर दिया। वहीं बेटियों की इस ऐतिहासिक जीत पर खिलाड़ियों के परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
परिजनों ने बेटियों को सेमीफाइनल व फाइनल में जीत की प्रार्थना करके आशीर्वाद दिया है। उन्होंने कहा कि जीत की खुशी दिवाली से कम नहीं है और घरों पर दीपमाला कर खुशी का इजहार किया जाएगा। इस जीत पर विधायक रामकरण काला, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव कृष्ण बेदी, प्राचार्य डॉ. अशोक चौधरी, डॉ. आरएस घुम्मन, राजकुमार गर्ग, मनजीत सिंह नागपाल, सुखविंद्र कंबोज, रवि हंस, काकू मल्होत्रा, कर्णराज सिंह तूर, बलदेव राज सेठी, बलदेव चावला, प्रभजीत सिंह जीता, रमेश कश्यप ने खुशी जताई है।
मैच से पहले और बाद में धार्मिक स्थानों पर जाकर की अरदास
रानी के पिता रामपाल व माता राममूर्ति, नवजोत कौर के पिता सतनाम सिंह व नवनीत के पिता बूटा सिंह ने कहा कि मैच शुरू होने से पहले उन्होंने तड़के गुरुद्वारे व मंदिर पहुंचकर टीम की जीत के लिए अरदास की। टीम की जीत के बाद भी मंदिर व गुरुद्वारे में जाकर शुक्रिया अदा किया परिजनों ने कहा कि बेटियों ने दिखा दिया है कि वह किसी भी क्षेत्र में कम नहीं है। इस जीत जीत के साथ हॉकी को देश में नई पहचान मिली है। अब सरकार को देश में हॉकी को मजबूत करने के लिए सशक्त कदम उठाने चाहिए। परिजनों ने कहा कि वह टीवी पर मैच देख रहे थे। जब पेनल्टी कार्नर को मौका मिला और टीम ने इस मौके को गोल में तब्दील किया तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। सभी ने एक दूसरे को फोन पर बधाई देकर इस खुशी का इजहार किया।
संयम से दोनों टीमों को हासिल करना होगा लक्ष्य : संदीप सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी
पिहोवा। ड्रैग फ्लिकर के नाम से विश्व विख्यात भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान एवं खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह ने कहा कि भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि हमारे खिलाड़ी कोई भी चैलेंज स्वीकार करने में सक्षम है। दोनों टीमों का प्रदर्शन देखकर अब लग रहा है कि ओलंपिक का मेडल भारत की झोली में आने वाला है। बड़े संयम और सावधानी से दोनों टीमों को लक्ष्य हासिल करना होगा। देश पलकें बिछाकर इंतजार कर रहा है।
पहले पुरुष टीम की जीत के बाद जब सोमवार को महिला टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हराया तो खेल राज्यमंत्री ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि म्हारी छोरियां के छोरों से कम हैं, टोक्यो में लठ गाड़ कर ही लौटेंगी। टीम इंडिया में श्रीजेश की गोलकीपिंग भारत की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ है। साथ ही अनुभवी खिलाड़ियों का लाभ भी भारत को मिल रहा है। इसके चलते भारत रविवार को क्वार्टर फाइनल में ब्रिटेन को हराकर टॉप चार में पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि साल दर साल महिला व पुरुष हॉकी के प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ है। कप्तान रानी रामपाल और वंदना कटारिया जैसी परिस्थितियों को तुरंत समझ जाने वाली खिलाड़ियों का लाभ देश को जरूर मिलेगा। लीग मैच में मिली हार के बाद हमारे खिलाड़ियों को अपनी गलतियों का पता चल गया और उन्होंने समय रहते इसमें सुधार कर लिया। इसके बाद दोनों टीमों ने शानदार वापसी करते हुए लगातार मैच जीते। अब एक बार फिर हॉकी में भारत बड़ी ताकत बन रहा है और गोल्डन एरा की वापसी हो रही है। उन्होंने कहा कि हार-जीत तो बाद की बात है। ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना ही बहुत बड़ी बात है। इसके लिए बहुत संघर्ष और त्याग करना पड़ता है। अब बस पदक हमसे दो कदम दूर है।
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शाहाबाद। घोड़ा गाड़ी चलाने वाले रामपाल की बेटी रानी रामपाल का टोक्यो ओलंपिक सेमीफाइनल तक का सफर आसान नहीं था। रानी रामपाल ने अपनी मेहनत, लगन व विश्वास से इतिहास रच दिया। तीन मैच में लगातार हार के बाद जबरदस्त वापसी करते हुए म्हारी छोरियों ने वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से शिकस्त देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई है। पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचकर टीम ने इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक जीत का गोल बेशक पंजाब की गुरजीत कौर की हॉकी से निकला हो, लेकिन इसे सहेजने में शाहाबाद की बेटी कप्तान रानी रामपाल, नवजोत कौर व नवनीत कौर का योगदान भी बेहद अहम है।
हॉकी की दुनिया में रानी रामपाल बड़ा नाम बन चुका है। रानी रामपाल दूसरी बार ओलंपिक में भारतीय टीम की कप्तानी कर रही हैं। उनके पास हॉकी के अनुभव का भंडार है। रानी रामपाल की हॉकी शुरुआत शाहाबाद के एसजीएनपी स्कूल से कोच बलदेव सिंह के नेतृत्व से शुरू हुई थी। तब रानी के पिता रामपाल सड़कों पर घोड़ा गाड़ी चलाते थे और लड़कियों को हॉकी स्टिक थामे आते-जाते देखा करते थे। गरीबी के दंश बावजूद रामपाल ने अपनी बेटी को हॉकी स्टिक थमाने की सोची और रानी को कोच बलदेव सिंह के पास प्रशिक्षण के लिए छोड़ आए।
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बस यहीं से रानी के हॉकी जीवन की शुरुआत हुई। कई मुसीबत झेलने के बाद भी रानी ने हॉकी खेलना नहीं छोड़ा। रानी के पिता कभी घोड़ा गाड़ी तो कभी साइकिल पर उसे मैदान में छोड़ते थे। परिणाम स्वरूप 13 वर्ष की आयु में रानी रामपाल भारतीय टीम में शामिल हो गई। बस उसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यहां तक की रानी रामपाल ने एक भी छुट्टी कभी मैदान से नहीं की और जिस दिन भाई की शादी थी उस दिन भी लंच के बाद रानी मैदान में अभ्यास करती दिखी।
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शाहाबाद बना हॉकी का संसारपुर
शाहाबाद को हॉकी के संसारपुर का खिताब दिया जाए तो उसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि शाहाबाद के 17 खिलाड़ियों को हॉकी में भीम अवार्ड मिल चुका है। खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह, रानी रामपाल, जसजीत कौर, सुरेंद्र कौर को अर्जुन अवार्ड से नवाजा जा चुका है। हॉकी की बदौलत ही 50 से अधिक महिला खिलाड़ी रेलवे व अन्य सरकारी विभाग में कार्यरत हैं।
ओलंपिक में बेटियों की जीत पर झूमे परिजन व हॉकी प्रेमी
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहाबाद। टोक्यो ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल में बेटियों की शानदार जीत पर हॉकी खिलाड़ियों के परिजन और खेली प्रेमी बेहद खुश हैं। हॉकी प्रेमियों खिलाड़ियों के घर पर पहुंचकर मिठाई खिलाकर उनकी खुशी को दोगुना कर दिया। वहीं बेटियों की इस ऐतिहासिक जीत पर खिलाड़ियों के परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
परिजनों ने बेटियों को सेमीफाइनल व फाइनल में जीत की प्रार्थना करके आशीर्वाद दिया है। उन्होंने कहा कि जीत की खुशी दिवाली से कम नहीं है और घरों पर दीपमाला कर खुशी का इजहार किया जाएगा। इस जीत पर विधायक रामकरण काला, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव कृष्ण बेदी, प्राचार्य डॉ. अशोक चौधरी, डॉ. आरएस घुम्मन, राजकुमार गर्ग, मनजीत सिंह नागपाल, सुखविंद्र कंबोज, रवि हंस, काकू मल्होत्रा, कर्णराज सिंह तूर, बलदेव राज सेठी, बलदेव चावला, प्रभजीत सिंह जीता, रमेश कश्यप ने खुशी जताई है।
मैच से पहले और बाद में धार्मिक स्थानों पर जाकर की अरदास
रानी के पिता रामपाल व माता राममूर्ति, नवजोत कौर के पिता सतनाम सिंह व नवनीत के पिता बूटा सिंह ने कहा कि मैच शुरू होने से पहले उन्होंने तड़के गुरुद्वारे व मंदिर पहुंचकर टीम की जीत के लिए अरदास की। टीम की जीत के बाद भी मंदिर व गुरुद्वारे में जाकर शुक्रिया अदा किया परिजनों ने कहा कि बेटियों ने दिखा दिया है कि वह किसी भी क्षेत्र में कम नहीं है। इस जीत जीत के साथ हॉकी को देश में नई पहचान मिली है। अब सरकार को देश में हॉकी को मजबूत करने के लिए सशक्त कदम उठाने चाहिए। परिजनों ने कहा कि वह टीवी पर मैच देख रहे थे। जब पेनल्टी कार्नर को मौका मिला और टीम ने इस मौके को गोल में तब्दील किया तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। सभी ने एक दूसरे को फोन पर बधाई देकर इस खुशी का इजहार किया।
संयम से दोनों टीमों को हासिल करना होगा लक्ष्य : संदीप सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी
पिहोवा। ड्रैग फ्लिकर के नाम से विश्व विख्यात भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान एवं खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह ने कहा कि भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि हमारे खिलाड़ी कोई भी चैलेंज स्वीकार करने में सक्षम है। दोनों टीमों का प्रदर्शन देखकर अब लग रहा है कि ओलंपिक का मेडल भारत की झोली में आने वाला है। बड़े संयम और सावधानी से दोनों टीमों को लक्ष्य हासिल करना होगा। देश पलकें बिछाकर इंतजार कर रहा है।
पहले पुरुष टीम की जीत के बाद जब सोमवार को महिला टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हराया तो खेल राज्यमंत्री ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि म्हारी छोरियां के छोरों से कम हैं, टोक्यो में लठ गाड़ कर ही लौटेंगी। टीम इंडिया में श्रीजेश की गोलकीपिंग भारत की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ है। साथ ही अनुभवी खिलाड़ियों का लाभ भी भारत को मिल रहा है। इसके चलते भारत रविवार को क्वार्टर फाइनल में ब्रिटेन को हराकर टॉप चार में पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि साल दर साल महिला व पुरुष हॉकी के प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ है। कप्तान रानी रामपाल और वंदना कटारिया जैसी परिस्थितियों को तुरंत समझ जाने वाली खिलाड़ियों का लाभ देश को जरूर मिलेगा। लीग मैच में मिली हार के बाद हमारे खिलाड़ियों को अपनी गलतियों का पता चल गया और उन्होंने समय रहते इसमें सुधार कर लिया। इसके बाद दोनों टीमों ने शानदार वापसी करते हुए लगातार मैच जीते। अब एक बार फिर हॉकी में भारत बड़ी ताकत बन रहा है और गोल्डन एरा की वापसी हो रही है। उन्होंने कहा कि हार-जीत तो बाद की बात है। ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना ही बहुत बड़ी बात है। इसके लिए बहुत संघर्ष और त्याग करना पड़ता है। अब बस पदक हमसे दो कदम दूर है।