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Kurukshetra News: दिन भर सामान समेटते रहे शिल्पकार
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव भले ही गत दिवस रविवार को संपन्न हो गया लेकिन अगले दिन सोमवार को भी दिन भर पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर मेले जैसा माहौल बना रहा। विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार महोत्सव संपन्न होने के बाद देर रात तक अपना सामान समेटते रहे तो वहीं दिन भर अनेक शिल्पकारों ने अपने सामान को बेचने के लिए सेल भी लगाई। वहीं सस्ता सामान खरीद करने के लिए पर्यटकों की भी भारी भीड़ उमड़ी रही।
पर्यटक महोत्सव की तरह ही सुबह से ब्रह्मसरोवर पर पहुंचने लगे तो शिल्पकारों ने भी सुबह ही अपने-अपने स्टॉल खोल दिए। जहां एक ओर शिल्पकार अपना सामान समेटते रहे तो वहीं सेल लगाकर सामान की खूब बिक्री भी की गई। उधर शहर व आसपास से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे और जमकर खरीददारी भी की। शिल्पकारों की रवानगी देर रात तक जारी रही।
बता दें कि 28 नवंबर से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव गत 15 दिसंबर को संपन्न हो गया। महोत्सव में 24 राज्यों के शिल्पकारों ने अपनी-अपनी शिल्पकला को शिल्प व सरस मेले में प्रदर्शित किया। यह मेला महोत्सव के शुरू होेने के पहले दिन से लेकर 15 दिसंबर तक जारी रहा। वहीं महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम पांच से 11 दिसंबर तक आयोजित किए गए। जहां बेहतर बिक्री होने से अधिकतर शिल्प्कारों के चेहरे पर खुशी छाई रही तो कुछ मायूसी लेकर भी लौटे। शिल्पकारों के मुताबिक उनके कारोबार में इंटरनेट की ठप रही व्यवस्था सबसे बड़ी बाधक रही। इससे ऑनलाइन भुगतान नहीं हो सका।
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पर्यटक महोत्सव की तरह ही सुबह से ब्रह्मसरोवर पर पहुंचने लगे तो शिल्पकारों ने भी सुबह ही अपने-अपने स्टॉल खोल दिए। जहां एक ओर शिल्पकार अपना सामान समेटते रहे तो वहीं सेल लगाकर सामान की खूब बिक्री भी की गई। उधर शहर व आसपास से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे और जमकर खरीददारी भी की। शिल्पकारों की रवानगी देर रात तक जारी रही।
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बता दें कि 28 नवंबर से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव गत 15 दिसंबर को संपन्न हो गया। महोत्सव में 24 राज्यों के शिल्पकारों ने अपनी-अपनी शिल्पकला को शिल्प व सरस मेले में प्रदर्शित किया। यह मेला महोत्सव के शुरू होेने के पहले दिन से लेकर 15 दिसंबर तक जारी रहा। वहीं महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम पांच से 11 दिसंबर तक आयोजित किए गए। जहां बेहतर बिक्री होने से अधिकतर शिल्प्कारों के चेहरे पर खुशी छाई रही तो कुछ मायूसी लेकर भी लौटे। शिल्पकारों के मुताबिक उनके कारोबार में इंटरनेट की ठप रही व्यवस्था सबसे बड़ी बाधक रही। इससे ऑनलाइन भुगतान नहीं हो सका।
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