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राष्ट्र की एकता और अखंडता में हिंदी का योगदान अविस्मरणीय

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Aug 2021 02:23 AM IST
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The contribution of Hindi in the unity and integrity of the nation is unforgettable.
हिंदी दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा है। दुनिया में सर्वप्रथम संस्कृत भाषा का निर्माण हुआ इसके बाद देवनागरी लिपि जो आज हिंदी के नाम से जानी जाती है अस्तित्व में आई। हिंदी संस्कृत भाषा का सरल अनुवाद है। संस्कृत को सरल करने के लिए हिंदी का जन्म हुआ। हिंदी के बाद भारत वर्ष में तमिल, तेलगु कन्नड़, गुजराती, उर्दू तथा कई अन्य भाषा अस्तित्व में आयी। संसार में ऐसा कोई देश नहीं जहां हिंदी न बोली जाती हो, क्योंकि हर जगह भाषा का अस्तित्व भारत से हुआ है और हिंदी भारत की धरोहर है।
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हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं में से एक
जिला सिविल सर्जन डॉ. संत लाल वर्मा ने कहा कि हिंदी हमारे देश की राजभाषा है और केंद्रीय स्तर पर भारत में दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार ये विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व है और राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए हिंदी का योगदान अविस्मरणीय है।
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हिंदी सम्मान, स्वाभिमान और गर्व की भाषा
डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि हिंदी हमारे सम्मान, स्वाभिमान और गर्व की भाषा है। हिंदी ने हमें विश्व में एक अलग पहचान दिलाई है। ये विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली दूसरी भाषा है फिर भी कुछ लोग इस भाषा का इस्तेमाल करने में शर्म महसूस करते हैं। ये शर्म नहीं, बल्कि गर्व करने वाली भाषा है।
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हिंदी को व्यावहारिक होने की आवश्यकता
उप सिविल सर्जन डॉ. आरके सहाय का कहना है कि हिंदी को ज्यादा व्यावहारिक होने की और देश-विदेश में बोले जाने वाले शब्दों के अधिक से अधिक समावेशन की आवश्यकता है। कहा कि अब न्यायालयों सहित कई बड़ी जगह हिंदी भाषियों के लिए खुल कर दरवाजे खोले गए हैं। कहा कि अगर अगले कुछ दशकों में हिंदी को ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी शिक्षा की भाषा के रूप में विकसित नहीं किया जा सका तो हमारी भावी पीढ़ी इसे बोलचाल की सामान्य भाषा कहकर खारिज कर देगी।
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