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Kurukshetra News: उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हुई चैती छठ की पूजा
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कुरुक्षेत्र। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सिंदूर लगाती महिलाएं। संवाद
कुरुक्षेत्र। बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चैती छठ पूजा संपन्न हो गई। यह पूजा लोक आस्था का महापर्व माना जाता है। बुधवार सुबह से ही पवित्र ब्रह्मसरोवर के घाटों पर व्रतियों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी ने पूरी निष्ठा के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और सुख-शांति व समृद्धि की कामना की।
सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत तोड़ा। व्रत तोड़ने के लिए सबसे पहले अदरकमिटा, घी मिश्रित चाय और प्रसाद का सेवन किया गया जिसके बाद अन्न ग्रहण किया गया।
छठ पर्व सेवा समिति के प्रधान संतोष पासवान ने बताया कि चैती छठ पूजा को कार्तिक छठ व्रत की तरह ही कठिन तपस्या वाला पर्व माना जाता है। यह चार दिवसीय अनुष्ठान होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस कठिन व्रत को करने से उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कुछ श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर कोशी भराई का अनुष्ठान भी करते हैं। इसमें मिट्टी के हाथी के चारों ओर दीपक जलाए जाते हैं और उस पर गन्ना लगाया जाता है। यह पर्व अपनी पवित्रता, साफ-सफाई, शुद्धता और नियमों के विशेष पालन के लिए जाना जाता है।
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सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत तोड़ा। व्रत तोड़ने के लिए सबसे पहले अदरकमिटा, घी मिश्रित चाय और प्रसाद का सेवन किया गया जिसके बाद अन्न ग्रहण किया गया।
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छठ पर्व सेवा समिति के प्रधान संतोष पासवान ने बताया कि चैती छठ पूजा को कार्तिक छठ व्रत की तरह ही कठिन तपस्या वाला पर्व माना जाता है। यह चार दिवसीय अनुष्ठान होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस कठिन व्रत को करने से उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कुछ श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर कोशी भराई का अनुष्ठान भी करते हैं। इसमें मिट्टी के हाथी के चारों ओर दीपक जलाए जाते हैं और उस पर गन्ना लगाया जाता है। यह पर्व अपनी पवित्रता, साफ-सफाई, शुद्धता और नियमों के विशेष पालन के लिए जाना जाता है।

कुरुक्षेत्र। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सिंदूर लगाती महिलाएं। संवाद
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