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Kurukshetra News: नैसी के पास टूटा तटबंध किया दुरुस्त
Fri, 22 Aug 2025 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 22 Aug 2025 12:32 AM IST
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इस्माईलाबाद। गांव नैसी से टूटे हुए तटबंध को बुधवार देर रात्रि कड़ी मशक्कत कर दुरुस्त कर दिया। इस दौरान किसानों से लेकर कर्मचारियों व अधिकारियों के भी पसीने छूटे रहे। आधी रात के करीब यह तटबंध पूरी तरह से दुरुस्त हो पाया और रात तीन बजे भी अधिकारी दौड़ते दिखाई दिए। एसडीएम अभिनव सिवाच सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ रात करीब तीन बजे ही मारकंडा नदी पर जलबहेड़ा गांव के पास पहुंचे, जहां जलस्तर बढ़ जाने व पावर हाउस में भी पानी घुस जाने की सूचना दी लेकिन सब सामान्य मिला तो राहत की सांस ली। उन्होंने आसपास भी नदी का जायजा लिया।
वीरवार को मारकंडा नदी में दोपहर बाद करीब 12700 क्यूसेक पानी बहता रहा, जो खतरे के निशान से अधिक रहा। तटबंधों को छू रहे इस जलस्तर ने किसानों की चिंता बढ़ाए रखी। किसान दिन रात नदी पर पहरा दे रहे हैं।
किसान बलजीत सिंह ने कहा कि मारकंडा नदी में आए उफान से नैसी के साथ-साथ आसपास के कई गांवों में भय की स्थिति बनी रहती है। बाढ़ का पानी हर वर्ष धान की फसल को अपनी चपेट में लेकर खराब कर देता है। सरकार को मारकंडा नदी के तटबंधों की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
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किसान जसमेर सिंह ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द बाढ़ प्रभावित खेतों की गिरदावरी करवा कर किसानों को नुकसान के हिसाब से मुआवजा देना चाहिए तथा मारकंडा नदी के तटबंधों को पक्का कर मजबूत करना चाहिए ताकि हर वर्ष किसानों पर बाढ़ की स्थिति का सामना न करना पड़े।
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वीरवार को मारकंडा नदी में दोपहर बाद करीब 12700 क्यूसेक पानी बहता रहा, जो खतरे के निशान से अधिक रहा। तटबंधों को छू रहे इस जलस्तर ने किसानों की चिंता बढ़ाए रखी। किसान दिन रात नदी पर पहरा दे रहे हैं।
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किसान बलजीत सिंह ने कहा कि मारकंडा नदी में आए उफान से नैसी के साथ-साथ आसपास के कई गांवों में भय की स्थिति बनी रहती है। बाढ़ का पानी हर वर्ष धान की फसल को अपनी चपेट में लेकर खराब कर देता है। सरकार को मारकंडा नदी के तटबंधों की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
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किसान जसमेर सिंह ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द बाढ़ प्रभावित खेतों की गिरदावरी करवा कर किसानों को नुकसान के हिसाब से मुआवजा देना चाहिए तथा मारकंडा नदी के तटबंधों को पक्का कर मजबूत करना चाहिए ताकि हर वर्ष किसानों पर बाढ़ की स्थिति का सामना न करना पड़े।