{"_id":"6760886e8f2b534ba30e2be4","slug":"the-boxers-of-the-academy-were-made-to-take-an-oath-not-to-consume-drugs-kurukshetra-news-c-45-1-sknl1006-128567-2024-12-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: अकादमी के मुक्केबाजों को दिलाई नशा न करने की शपथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: अकादमी के मुक्केबाजों को दिलाई नशा न करने की शपथ
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। युद्ध-नशे के विरुद्ध अभियान के तहत मुक्केबाजों को नशा न करने की शपथ दिलाई। सोमवार को किरमिच रोड पर दयालपुर गांव के निकट मनोज कुमार बॉक्सिंग अकादमी के 35 से अधिक शपथ लेकर अभियान का हिस्सा बने।
इस कार्यक्रम में अकादमी के संचालक राजेश कुमार, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मनोज कुमार, कोच गोपाल और कपिल ने बच्चों को नशे के खिलाफ जागरूक किया। इससे पहले खिलाड़ियों को नशे से होने वाले सामाजिक, आर्थिक व शारीरिक नुकसान की जानकारी दी गई। इसके बाद बच्चों ने दो बार शपथ को दोहरा कर नशा न करने और अन्य लोगों को भी नशे से बचाने का प्रयास करने की शपथ ली।
उधर, अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच राजेश कुमार ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नशे से दूर रहकर खेलों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। खेल न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारते हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाकर उन्हें सकारात्मक दिशा में ले जाते हैं। नशा करने से न सिर्फ उनके धन और शरीर को नुकसान होता है, बल्कि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी खराब होती है।
विज्ञापन
सरकार से भी आग्रह किया कि खेलों को नर्सरी स्तर से अनिवार्य किया जाए। खेल शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनकर नशे की लत से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
विज्ञापन
इस कार्यक्रम में अकादमी के संचालक राजेश कुमार, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मनोज कुमार, कोच गोपाल और कपिल ने बच्चों को नशे के खिलाफ जागरूक किया। इससे पहले खिलाड़ियों को नशे से होने वाले सामाजिक, आर्थिक व शारीरिक नुकसान की जानकारी दी गई। इसके बाद बच्चों ने दो बार शपथ को दोहरा कर नशा न करने और अन्य लोगों को भी नशे से बचाने का प्रयास करने की शपथ ली।
विज्ञापन
उधर, अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच राजेश कुमार ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नशे से दूर रहकर खेलों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। खेल न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारते हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाकर उन्हें सकारात्मक दिशा में ले जाते हैं। नशा करने से न सिर्फ उनके धन और शरीर को नुकसान होता है, बल्कि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी खराब होती है।
विज्ञापन
सरकार से भी आग्रह किया कि खेलों को नर्सरी स्तर से अनिवार्य किया जाए। खेल शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनकर नशे की लत से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।